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पापा की डांटने से बचने को लुधियाना भाग गया था केसीएम का छात्र
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मुरादाबाद। केसीएम स्कूल से सोमवार की दोपहर संदिग्ध हालात में लापता हुआ छात्र अर्चित घर पहुंच गया। छात्र ने पुलिस पूछताछ में बताया कि शिक्षक ने पापा से शिकायत उसकी कर दी थी। उसे डर था कि अब घर पर भी डांट पड़ेगी। इसलिए वह भाग गया था। उसने बताया कि मुरादाबाद से लखनऊ गया। फिर लखनऊ से लुधियाना ट्रेन से पहुंच गया था। लुधियाना रेलवे स्टेशन पर मिले मिर्जापुर निवासी सुरेश कुमार मिश्रा से अर्चित को बृहस्पतिवार दोपहर घर लेकर पहुंचे, तो परिवार की खुशियों का ठिकाना नहीं रहा। परिवार के लोगों ने कहा कि बेटे के सकुशल घर लौट आने पर काफी खुशी हुई। छात्र के घर पर बधाइयां देने वालों का भी तांता लग गया।
सिविल लाइंस स्थित केसीएम स्कूल से शिक्षक राजेश कुमार शर्मा ने दसवीं के छात्र अर्चित को डांटने के बाद स्कूल से बाहर निकाल दिया था। इसके बाद छात्र लापता हो गया था। मंगलवार दोपहर परिजनों ने स्कूल में हंगामा किया था। इसके बाद सक्रिय हुई पुलिस छात्र की तलाश में जुटी थी। पुलिस सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो पता चला कि छात्र मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से राजधानी में सवार हुआ था। इसके बाद लखनऊ में ट्रेन से उतरा था। पुलिस की एक टीम लखनऊ में छात्र की तलाश में जुटी थी।
बृहस्पतिवार दोपहर तीन बजे मिर्जापुर के चुनार थानाक्षेत्र के कुशहा गांव निवासी सुरेश कुमार मिश्रा छात्र अर्चित को लेकर उसके घर पहुंच गए। बेटे को देखकर, मां बाप, बहन, रिश्तेदार और आसपड़ोस के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सुरेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मंगलवार देर रात ढाई बजे अर्चित लुधियाना रेलवे स्टेशन पर मिला था। पूछताछ में उसने अपने घर से भाग आने की बात की थी। अर्चित ने सुरेश से गुहार लगाई कि वह उसे घर तक छोड़ दें। बच्चे के कहने पर वह उसे छोड़ने यहां आ गए। सिविल लाइंस थाना प्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बच्चा परिवार को मिल गया है। पिता की डांट से बचने को वह भाग गया था। वह ट्रेन से लुधियाना पहुंच गया था। वहां से एक व्यक्ति बच्चे को छोड़ आए हैं।
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अंकल! प्लीज मुझे कोई काम दिला दीजिए...
कंधों पर स्कूल बैग और मजदूरी मांग रहे अर्चित को देख भर आईं मेरी आंखें
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। लुधियाना रेलवे स्टेशन के बाहर सीढ़ियों पर मंगलवार देर रात करीब ढाई बजे 14-15 साल का एक किशोर कंधे पर बैग टांगे और स्कूल ड्रेस में बैठा हुआ था। किशोर के चेहरे से परेशानी साफ छलक रही थी। मैं भी वहीं बैठ गया। कुछ ही देर में किशोर मेरे पास पहुंचा और मुझसे काम दिलवाने की गुहार लगाने लगा। सुरेश मिश्रा ने बताया कि बच्चे की बातें सुनकर मेरी आंखें भर आईं। फिर मैंने उससे पूरी कहानी सुनी। पूछने पर उसने अपना नाम अर्चित बताया। कुछ देर ठहर जाने के बाद बोलते हुए रोने लगा। उसने बताया कि मुरादाबाद से भाग कर आया हूं। अंकल! प्लीज मुझे कोई काम दिला दीजिए।
बच्चे के काम दिलाने के सवाल पर मैं ठिठक गया। मैंने उससे कहा कि ऐसा क्या हुआ जो तुम स्कूल ड्रेस में ही सैकड़ों किलोमीटर दूर आ गए। उसने बताया कि स्कूल में शिक्षक ने मुझे डांटा था। मम्मी-पापा से भी मेरी शिकायत कर दी थी। घर पहुंचता तो पापा भी डांटते, तब मैंने भागना ही उचित समझा। मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से बैठकर मैं लखनऊ पहुंच गया था। वहां से ट्रेन से उतर गया और फिर पंजाब मेल में बैठ गया था। मैंने सोचा कि अगर इस बच्चे को इसके घर नहीं पहुंचाया, तो ये कहीं गलत संगत में न पड़ जाए। मैंने ठान लिया था कि कुछ भी हो जाए। बच्चे को इसके घर तक पहुंचाकर आऊंगा। इस बच्चे के उम्र अभी पढ़ने की है। अगर ये घर नहीं लौटा तो हमारे जैसे ही कहीं न कहीं मजदूरी करेगा।
सुरेश ने परिवार में लौटाईं खुशियां
मुुरादाबाद। मूलरूप से मिर्जापुर निवासी सुरेश कुमार मिश्रा लुधियाना में ढाबे पर काम करते हैं। सुरेश ने अर्चित को घर लौटाकर न केवल परिवार की खुशियां लौटाईं, बल्कि पुलिस की चिंता भी खत्म का दी। वरना पुलिस की छह टीमें लगाने के बाद भी कोई सफलता नहीं मिल पा रही थी। ब्यूरो
परिजनों ने थाने में किया हंगामा, एसएसपी से लगाई गुहार
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। बृहस्पतिवार दोपहर अर्चित के परिजनों ने सिविल लाइंस थाने में हंगामा किया। उनकी मांग थी कि शिक्षक के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया जाए। इसके बाद छात्र के परिजन एसएसपी बबलू कुमार से भी मिले। एसएसपी ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर परिजन शांत होकर वहां से लौट गए। ब्यूरो
मेरी गलती बस इतनी थी कि बिना गेट पास अर्चित को भेज दिया
मुरादाबाद। केसीएम स्कूल के हिंदी के अध्यापक राजेश शर्मा का बातचीत में दर्द छलक आया। उन्होंने बताया कि अर्चित कई दिन बाद स्कूल पहुंचा था। उसकी कई शिकायतें थीं। उसके घर मेसेज भेजा गया था कि वह अपनी मम्मी-पापा से बात कराए, तब ही स्कूल आए। उसने मेसेज भी डिलीट कर दिए थे। मेरा कसूर बस इतना था कि मैंने बिना गेट पास के उसे इस विश्वास के साथ स्कूल से बाहर कर दिया था कि ये घर पहुंच जाएगा। इस मामले से समाज में मेरी प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचा है।
सुरेश मिश्रा फरिश्ते की तरह आए
मुरादाबाद। अर्चित के पिता राजीव कुमार पांडेय का कहना है कि पुलिस प्रशासन की ओर से मुझे पूरा सहयोग मिला। सुरेश कुमार मिश्रा मेरे और मेरे परिवार के लिए फरिश्ते की तरह आए। मैं सुरेश मिश्रा का जिंदगी भर ऋणी रहूंगा। पुलिस की जांच लखनऊ तक पहुंची, अर्चित 1675 किमी. का सफर कर घर लौटा।
छात्र को खोजने के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई थी
मुरादाबाद। केसीएम स्कूल से लापता हुए छात्र की खोजने के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई गई थीं। बुधवार सुबह पुलिस की एक टीम ने स्टेशन में लगे सीसीटीवी फुटेज को चेक किया था, जिससे पता चला था कि अर्चित प्लेटफार्म नंबर एक पर खड़ी राजधानी ट्रेन में सवार हो गया था। इसके बाद टीम ने बरेली, इसके बाद लखनऊ में टीमों ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी थी। तब पता चला कि छात्र लखनऊ में ट्रेन से उतरा था। इसके बाद एक टीम लखनऊ में ही जांच में जुटी थी, लेकिन तब तक छात्र अपने घर लौट आया।
अच्छी पढ़ाई के लिए भेजा था मुरादाबाद
मुरादाबाद। रामपुर जनपद के भोट थानाक्षेत्र के करीमपुर गांव निवासी राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि वह किसान हैं। बेटा अर्चित और बेटी वाणी अच्छी पढ़ाई कर लें। इसलिए ही पत्नी ममता पांडे के दोनों बच्चों को मुरादाबाद में रहने की अनुमति दी थी। ममता मनोकामना मंदिर के पीछे रेलवे कालोनी में रहने वाली अपनी ननद के घर में रहती हैं।
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सिविल लाइंस स्थित केसीएम स्कूल से शिक्षक राजेश कुमार शर्मा ने दसवीं के छात्र अर्चित को डांटने के बाद स्कूल से बाहर निकाल दिया था। इसके बाद छात्र लापता हो गया था। मंगलवार दोपहर परिजनों ने स्कूल में हंगामा किया था। इसके बाद सक्रिय हुई पुलिस छात्र की तलाश में जुटी थी। पुलिस सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो पता चला कि छात्र मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से राजधानी में सवार हुआ था। इसके बाद लखनऊ में ट्रेन से उतरा था। पुलिस की एक टीम लखनऊ में छात्र की तलाश में जुटी थी।
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बृहस्पतिवार दोपहर तीन बजे मिर्जापुर के चुनार थानाक्षेत्र के कुशहा गांव निवासी सुरेश कुमार मिश्रा छात्र अर्चित को लेकर उसके घर पहुंच गए। बेटे को देखकर, मां बाप, बहन, रिश्तेदार और आसपड़ोस के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। सुरेश कुमार मिश्रा ने बताया कि मंगलवार देर रात ढाई बजे अर्चित लुधियाना रेलवे स्टेशन पर मिला था। पूछताछ में उसने अपने घर से भाग आने की बात की थी। अर्चित ने सुरेश से गुहार लगाई कि वह उसे घर तक छोड़ दें। बच्चे के कहने पर वह उसे छोड़ने यहां आ गए। सिविल लाइंस थाना प्रभारी रविंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि बच्चा परिवार को मिल गया है। पिता की डांट से बचने को वह भाग गया था। वह ट्रेन से लुधियाना पहुंच गया था। वहां से एक व्यक्ति बच्चे को छोड़ आए हैं।
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कंधों पर स्कूल बैग और मजदूरी मांग रहे अर्चित को देख भर आईं मेरी आंखें
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। लुधियाना रेलवे स्टेशन के बाहर सीढ़ियों पर मंगलवार देर रात करीब ढाई बजे 14-15 साल का एक किशोर कंधे पर बैग टांगे और स्कूल ड्रेस में बैठा हुआ था। किशोर के चेहरे से परेशानी साफ छलक रही थी। मैं भी वहीं बैठ गया। कुछ ही देर में किशोर मेरे पास पहुंचा और मुझसे काम दिलवाने की गुहार लगाने लगा। सुरेश मिश्रा ने बताया कि बच्चे की बातें सुनकर मेरी आंखें भर आईं। फिर मैंने उससे पूरी कहानी सुनी। पूछने पर उसने अपना नाम अर्चित बताया। कुछ देर ठहर जाने के बाद बोलते हुए रोने लगा। उसने बताया कि मुरादाबाद से भाग कर आया हूं। अंकल! प्लीज मुझे कोई काम दिला दीजिए।
बच्चे के काम दिलाने के सवाल पर मैं ठिठक गया। मैंने उससे कहा कि ऐसा क्या हुआ जो तुम स्कूल ड्रेस में ही सैकड़ों किलोमीटर दूर आ गए। उसने बताया कि स्कूल में शिक्षक ने मुझे डांटा था। मम्मी-पापा से भी मेरी शिकायत कर दी थी। घर पहुंचता तो पापा भी डांटते, तब मैंने भागना ही उचित समझा। मुरादाबाद रेलवे स्टेशन से बैठकर मैं लखनऊ पहुंच गया था। वहां से ट्रेन से उतर गया और फिर पंजाब मेल में बैठ गया था। मैंने सोचा कि अगर इस बच्चे को इसके घर नहीं पहुंचाया, तो ये कहीं गलत संगत में न पड़ जाए। मैंने ठान लिया था कि कुछ भी हो जाए। बच्चे को इसके घर तक पहुंचाकर आऊंगा। इस बच्चे के उम्र अभी पढ़ने की है। अगर ये घर नहीं लौटा तो हमारे जैसे ही कहीं न कहीं मजदूरी करेगा।
सुरेश ने परिवार में लौटाईं खुशियां
मुुरादाबाद। मूलरूप से मिर्जापुर निवासी सुरेश कुमार मिश्रा लुधियाना में ढाबे पर काम करते हैं। सुरेश ने अर्चित को घर लौटाकर न केवल परिवार की खुशियां लौटाईं, बल्कि पुलिस की चिंता भी खत्म का दी। वरना पुलिस की छह टीमें लगाने के बाद भी कोई सफलता नहीं मिल पा रही थी। ब्यूरो
परिजनों ने थाने में किया हंगामा, एसएसपी से लगाई गुहार
अमर उजाला ब्यूरो
मुरादाबाद। बृहस्पतिवार दोपहर अर्चित के परिजनों ने सिविल लाइंस थाने में हंगामा किया। उनकी मांग थी कि शिक्षक के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया जाए। इसके बाद छात्र के परिजन एसएसपी बबलू कुमार से भी मिले। एसएसपी ने उन्हें उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर परिजन शांत होकर वहां से लौट गए। ब्यूरो
मेरी गलती बस इतनी थी कि बिना गेट पास अर्चित को भेज दिया
मुरादाबाद। केसीएम स्कूल के हिंदी के अध्यापक राजेश शर्मा का बातचीत में दर्द छलक आया। उन्होंने बताया कि अर्चित कई दिन बाद स्कूल पहुंचा था। उसकी कई शिकायतें थीं। उसके घर मेसेज भेजा गया था कि वह अपनी मम्मी-पापा से बात कराए, तब ही स्कूल आए। उसने मेसेज भी डिलीट कर दिए थे। मेरा कसूर बस इतना था कि मैंने बिना गेट पास के उसे इस विश्वास के साथ स्कूल से बाहर कर दिया था कि ये घर पहुंच जाएगा। इस मामले से समाज में मेरी प्रतिष्ठा को काफी नुकसान पहुंचा है।
सुरेश मिश्रा फरिश्ते की तरह आए
मुरादाबाद। अर्चित के पिता राजीव कुमार पांडेय का कहना है कि पुलिस प्रशासन की ओर से मुझे पूरा सहयोग मिला। सुरेश कुमार मिश्रा मेरे और मेरे परिवार के लिए फरिश्ते की तरह आए। मैं सुरेश मिश्रा का जिंदगी भर ऋणी रहूंगा। पुलिस की जांच लखनऊ तक पहुंची, अर्चित 1675 किमी. का सफर कर घर लौटा।
छात्र को खोजने के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई थी
मुरादाबाद। केसीएम स्कूल से लापता हुए छात्र की खोजने के लिए पुलिस की छह टीमें लगाई गई थीं। बुधवार सुबह पुलिस की एक टीम ने स्टेशन में लगे सीसीटीवी फुटेज को चेक किया था, जिससे पता चला था कि अर्चित प्लेटफार्म नंबर एक पर खड़ी राजधानी ट्रेन में सवार हो गया था। इसके बाद टीम ने बरेली, इसके बाद लखनऊ में टीमों ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज देखी थी। तब पता चला कि छात्र लखनऊ में ट्रेन से उतरा था। इसके बाद एक टीम लखनऊ में ही जांच में जुटी थी, लेकिन तब तक छात्र अपने घर लौट आया।
अच्छी पढ़ाई के लिए भेजा था मुरादाबाद
मुरादाबाद। रामपुर जनपद के भोट थानाक्षेत्र के करीमपुर गांव निवासी राजीव कुमार पांडेय ने बताया कि वह किसान हैं। बेटा अर्चित और बेटी वाणी अच्छी पढ़ाई कर लें। इसलिए ही पत्नी ममता पांडे के दोनों बच्चों को मुरादाबाद में रहने की अनुमति दी थी। ममता मनोकामना मंदिर के पीछे रेलवे कालोनी में रहने वाली अपनी ननद के घर में रहती हैं।