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Moradabad News: कांठ की रामलीला में हुआ रावण संवाद का मंचन
Sun, 18 Oct 2026 02:49 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Sun, 18 Oct 2026 02:49 AM IST
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कांठ। नगर प्रशासन की ओर से गठित श्री रामलीला मंचन अस्थाई समिति के तत्वावधान में चल रहे 117वें रामलीला मंचन के क्रम में शनिवार को श्री भोले बाबा आदर्श रामलीला-रासलीला नाटक कला मंडल चंदौसी के कलाकारों ने विभीषण शरणागति और अंगद रावण संवाद का सफल मंचन किया।
शनिवार को रंगमंच पर दिखाया गया कि लंका जलने के बाद विभीषण ने रावण को समझाने का प्रयास किया। जिस पर रावण ने भरे दरबार में विभीषण को लात मारते हुए लंका से बाहर निकाल दिया। विभीषण सीधे रामादल में पहुंचे और श्रीराम की शरण ले ली। रामादल अपनी ओर से एक बार फिर अंगद को दूत के रूप में रावण को समझाने के लिए लंका भेजा गया। अंगद रावण के दरबार में पहुंचे। उन्होंने अपना परिचय देकर रावण के समक्ष श्रीराम के द्वारा भेजा गया संदेश रखा। जिस पर रावण भड़के रावण की बातों पर अंगद ने कहा कि श्रीराम से युद्ध तो बाद में करना पहले मेरे पांव को ही उठाकर दिखा दो। मेघनाथ सहित रावण के जितने भी योद्धा थे अंगद का पांव नहीं उठा पाए। बाद में रावण सिंहासन से उठकर अंगद का पांव उठाने के लिए झुका तो एकदम अंगद ने अपना पांव पीछे हटा लिया। कहा कि यदि पांव पकड़ने हैं तो इस दूत के नहीं बल्कि भगवान श्रीराम के पकड़ो। संचालन प्रदीप कुमार बिश्नोई और मंचन का निर्देशन डायरेक्टर सुधीर कुमार बिश्नोई ने किया। व्यवस्था में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज कुमार बिश्नोई, नवनीत पहलवान, त्रिवेद कुमार, सुशील लम्बरदार, इंद्रजीत सिंह, विनोद लम्बरदार आदि रहे।
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शनिवार को रंगमंच पर दिखाया गया कि लंका जलने के बाद विभीषण ने रावण को समझाने का प्रयास किया। जिस पर रावण ने भरे दरबार में विभीषण को लात मारते हुए लंका से बाहर निकाल दिया। विभीषण सीधे रामादल में पहुंचे और श्रीराम की शरण ले ली। रामादल अपनी ओर से एक बार फिर अंगद को दूत के रूप में रावण को समझाने के लिए लंका भेजा गया। अंगद रावण के दरबार में पहुंचे। उन्होंने अपना परिचय देकर रावण के समक्ष श्रीराम के द्वारा भेजा गया संदेश रखा। जिस पर रावण भड़के रावण की बातों पर अंगद ने कहा कि श्रीराम से युद्ध तो बाद में करना पहले मेरे पांव को ही उठाकर दिखा दो। मेघनाथ सहित रावण के जितने भी योद्धा थे अंगद का पांव नहीं उठा पाए। बाद में रावण सिंहासन से उठकर अंगद का पांव उठाने के लिए झुका तो एकदम अंगद ने अपना पांव पीछे हटा लिया। कहा कि यदि पांव पकड़ने हैं तो इस दूत के नहीं बल्कि भगवान श्रीराम के पकड़ो। संचालन प्रदीप कुमार बिश्नोई और मंचन का निर्देशन डायरेक्टर सुधीर कुमार बिश्नोई ने किया। व्यवस्था में समिति के कार्यकारी अध्यक्ष धीरज कुमार बिश्नोई, नवनीत पहलवान, त्रिवेद कुमार, सुशील लम्बरदार, इंद्रजीत सिंह, विनोद लम्बरदार आदि रहे।
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