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Moradabad News: कागज नहीं दिखा पाए झोलाछाप, लिखित में दिया अब नहीं चलाएंगे अस्पताल
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मुरादाबाद। स्वास्थ्य विभाग के नोटिस के बाद कलक्ट्रेट सभागार में पेश हुए 49 झोलाछापों में से कोई भी क्लीनिक या नर्सिंग होम के कागज नहीं दिखा पाया। किसी का पंजीकरण सीएमओ कार्यालय में नहीं मिला और कई के पास चिकित्सा की कोई डिग्री भी नहीं है। इन्होंने लिखित में बयान दिए हैं कि भविष्य में गैरकानूनी तरीके से संचालन नहीं करेंगे।
जिले में प्रसव के दौरान हो रही मौत की घटनाओं के बाद डीएम के निर्देश पर सीएम डॉ. कुलदीप सिंह ने 157 झोलाछाप चिह्नित कराए। पिछले माह इन सभी को नोटिस जारी किए गए। आठ व नौ अक्तूबर को कलक्ट्रेट सभागार में उपस्थित होकर दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया। पहले दिन 90 लोगों को पहुंचना था जिनमें से 49 पहुंचे। बाकी को नौ अक्तूबर को अपने दस्तावेजों के साथ पहुंचना है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन की टीम के सामने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने झोलाछापों के लिखित बयान लिए हैं। क्लीनिक, नर्सिंग होम संचालक के पास सीएमओ कार्यालय का पंजीकरण क्यों नहीं है। अस्पताल में कोई प्रशिक्षित व डिग्रीधारी डॉक्टर या स्टाफ क्यों नहीं है और कब से यह काम कर रहे हैं, इन सवालों का लिखित जवाब लिया गया। विभागीय जानकारों का कहना है कि कई झोलाछापों ने अधिकारियों को लिखित में दिया है कि भविष्य में ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे किसी की जान को खतरा हो।
डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल ने बताया कि दोनों दिन की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। इसके बाद प्रशासनिक समिति निर्णय लेगी कि जो संचालक दस्तावेज नहीं दिखा पाए उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। पुराने आदेश के मुताबिक दस्तावेज न दिखाने वालों के नर्सिंग होम के पोस्टर और पता सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा कराए जाएंगे, जिससे लोग इनके यहां इलाज कराने न जाएं। साथ ही झोलाछापों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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जिले में प्रसव के दौरान हो रही मौत की घटनाओं के बाद डीएम के निर्देश पर सीएम डॉ. कुलदीप सिंह ने 157 झोलाछाप चिह्नित कराए। पिछले माह इन सभी को नोटिस जारी किए गए। आठ व नौ अक्तूबर को कलक्ट्रेट सभागार में उपस्थित होकर दस्तावेज दिखाने के लिए कहा गया। पहले दिन 90 लोगों को पहुंचना था जिनमें से 49 पहुंचे। बाकी को नौ अक्तूबर को अपने दस्तावेजों के साथ पहुंचना है। स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों का कहना है कि जिला प्रशासन की टीम के सामने स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने झोलाछापों के लिखित बयान लिए हैं। क्लीनिक, नर्सिंग होम संचालक के पास सीएमओ कार्यालय का पंजीकरण क्यों नहीं है। अस्पताल में कोई प्रशिक्षित व डिग्रीधारी डॉक्टर या स्टाफ क्यों नहीं है और कब से यह काम कर रहे हैं, इन सवालों का लिखित जवाब लिया गया। विभागीय जानकारों का कहना है कि कई झोलाछापों ने अधिकारियों को लिखित में दिया है कि भविष्य में ऐसा कार्य नहीं करेंगे जिससे किसी की जान को खतरा हो।
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डिप्टी सीएमओ डॉ. संजीव बेलवाल ने बताया कि दोनों दिन की रिपोर्ट जिला प्रशासन को सौंपी जाएगी। इसके बाद प्रशासनिक समिति निर्णय लेगी कि जो संचालक दस्तावेज नहीं दिखा पाए उनके खिलाफ क्या कार्रवाई होगी। पुराने आदेश के मुताबिक दस्तावेज न दिखाने वालों के नर्सिंग होम के पोस्टर और पता सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा कराए जाएंगे, जिससे लोग इनके यहां इलाज कराने न जाएं। साथ ही झोलाछापों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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