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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   The 'Dhanush Yajna' (bow-breaking ceremony) and the dialogue between Parashurama and Lakshmana were enacted.

Moradabad News: धनुष यज्ञ और परशुराम-लक्ष्मण संवाद का मंचन किया

Sun, 18 Oct 2026 02:48 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद Updated Sun, 18 Oct 2026 02:48 AM IST
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The 'Dhanush Yajna' (bow-breaking ceremony) and the dialogue between Parashurama and Lakshmana were enacted.
बिलारी। क्षेत्र के सहसपुर स्थित राजमहल में चल रही रामलीला में झांसी के ओरछाधाम से आए कलाकारों ने धनुष यज्ञ और परशुराम लक्ष्मण संवाद का प्रभावी ढंग से मंचन किया।
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रामलीला मंचन के दौरान ही धनुष टूटने पर हुई आवाज सुनकर भगवान परशुराम वहां पहुंचते हैं और क्रोधित होते हैं कि किसने यह साहस किया तब प्रभु राम कहते हैं कि प्रभु ऐसा तो कोई आपका दास ही कर सकता है। धनुष यज्ञ के दौरान पंडाल से भगवान श्रीराम के नाम के जयकारे गूंजने लगे। शनिवार को परंपरा के अनुसार रामलीला स्थल से बैंड बाजा सहित भव्य राम बरात निकाली गई जो नगर में घूम कर पुनः मंचन स्थल पर जाकर विसर्जित हुई। मार्ग में श्रद्धालुओं ने राम बरात पर फूल बरसाए। राम बरात में मेला प्रबंधक प्रदीप शर्मा, संजू गुप्ता, वसीम इदरीसी, पूर्व प्रधान कल्याण सिंह, डॉ बीरबल, सुरेश पाल आदि मुख्य रूप से मौजूद रहे। प्रदेश सरकार की पूर्व मंत्री और सहसपुर राजपरिवार की रानी रीना कुमारी की ओर से आयोजित इस रामलीला को देखने सहसपुर के अलावा आसपास के ग्रामों से बड़ी संख्या में लोग पहुंचे।
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फोटो संख्या-19,20



बिलारी के रामलीला में सुग्रीव मित्रता और बाली वध प्रसंग का हुआ मंचन



संवाद न्यूज एजेंसी



बिलारी। नगर के मंदिर पौड़ाखेड़ा परिसर में चल रही रामलीला में कलाकारों द्वारा जटायु मरण, सबरी मिलन, सुग्रीव मित्रता और बाली वध आदि प्रसंगों का भावपूर्ण मंचन किया गया।
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सनातन धर्मार्थ ट्रस्ट बिलारी के तत्वावधान में स्योंडारा की रामलीला कमेटी कलाकारों द्वारा किए जा रहे रामलीला मंचन में दिखाया गया कि माता सीता की खोज में निकले भगवान श्रीराम और लक्ष्मण की मुलाकात जटायु से होती है। जटायु उन्हें माता सीता के अपहरण के बारे में जानकारी देता है। उसके बाद जटायु के प्राण त्यागने का मार्मिक दृश्य दिखाया जाता है।आगामी प्रसंग में भगवान श्रीराम की मुलाकात माता सबरी से होती है जो उन्हें सुग्रीव के बारे में बताती है फिर श्रीराम और सुग्रीव की मित्रता का प्रसंग दिखाया जाता है। सुग्रीव की सहायता के लिए श्रीराम बाद में बाली का वध कर देते हैं। माता सीता की खोज के लिए हनुमान जी को लंका भेजने का प्रसंग दिखाया जाता है। रामलीला मंचन की व्यवस्थाओं में पंकज चौहान, दुष्यंत चौहान, संजय सक्सेना, बिजेंद्र चंद्रवंशी, अमित मौर्य, राजू प्रजापति, अजय पाल सिंह आदि का सहयोग रहा।
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