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Moradabad News: आस्था का केंद्र है छजलैट का ढाकी प्राचीन महादेव मंदिर
Mon, 24 Aug 2026 02:22 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Mon, 24 Aug 2026 02:22 AM IST
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कांठ। शिव भक्तों के लिए छजलैट के ढाकी स्थित प्राचीन महादेव मंदिर आस्था का केंद्र है। यहां सावन माह के प्रत्येक सोमवार, शिवरात्रि और महाशिवरात्रि को हजारों श्रद्धालु शिवलिंग के जोड़े पर जलाभिषेक कर पूजा-अर्चना करते हैं।
छजलैट से बिजनौर मार्ग से गांव ढाकी के लिए रास्ता जाता है। यहां पर शिव का प्राचीन और भव्य मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण गांव सदूपुरा के रिसाल सिंह की पत्नी उमा कौर ने करीब 84 वर्ष पूर्व कराया था। जहां आज मंदिर खड़ा है यहां पर करीब 153 साल पहले शिवलिंग जोड़े के रूप में प्रकट हुए थे। ग्रामीण पहले तो इनसे अनजान रहे। लेकिन जब यह धीरे-धीरे बढ़ने लगे तो जानकारों को दिखाया गया। शिवलिंग बताए जाने पर यहां पूजा-अर्चना की जाने लगी।
ग्रामीणों के अनुसार उस वक्त यह गांव अमरोहा के जमींदार फकरू हसन की जमींदारी में आता था। उसका जयंती प्रसाद नाम का कारिंदा मंदिर के सामने एक मकान में रहता था। बताते हैं कि उसने ढोंग बताते हुए शिवलिंगों को तुड़वा दिया। लेकिन रात को शिवलिंग पहले से ज्यादा बढ़ गए।
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कारिंदा इन्हें रोज तुड़वाता था और यह रोज बढ़ जाते थे। आस्था और बढ़ी तो ग्रामीणों ने यहां एक कच्चा चबूतरा बनाकर एक मढ़ी बना दी थी। तभी से इस मंदिर की मान्यता बढ़ गई। सोमवार को आज सावन के चौथे व अंतिम सोमवार को यहां श्रद्धालुओं के द्वारा जलाभिषेक किया जाएगा।
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छजलैट से बिजनौर मार्ग से गांव ढाकी के लिए रास्ता जाता है। यहां पर शिव का प्राचीन और भव्य मंदिर बना हुआ है। इस मंदिर का निर्माण गांव सदूपुरा के रिसाल सिंह की पत्नी उमा कौर ने करीब 84 वर्ष पूर्व कराया था। जहां आज मंदिर खड़ा है यहां पर करीब 153 साल पहले शिवलिंग जोड़े के रूप में प्रकट हुए थे। ग्रामीण पहले तो इनसे अनजान रहे। लेकिन जब यह धीरे-धीरे बढ़ने लगे तो जानकारों को दिखाया गया। शिवलिंग बताए जाने पर यहां पूजा-अर्चना की जाने लगी।
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ग्रामीणों के अनुसार उस वक्त यह गांव अमरोहा के जमींदार फकरू हसन की जमींदारी में आता था। उसका जयंती प्रसाद नाम का कारिंदा मंदिर के सामने एक मकान में रहता था। बताते हैं कि उसने ढोंग बताते हुए शिवलिंगों को तुड़वा दिया। लेकिन रात को शिवलिंग पहले से ज्यादा बढ़ गए।
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कारिंदा इन्हें रोज तुड़वाता था और यह रोज बढ़ जाते थे। आस्था और बढ़ी तो ग्रामीणों ने यहां एक कच्चा चबूतरा बनाकर एक मढ़ी बना दी थी। तभी से इस मंदिर की मान्यता बढ़ गई। सोमवार को आज सावन के चौथे व अंतिम सोमवार को यहां श्रद्धालुओं के द्वारा जलाभिषेक किया जाएगा।