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रामपुर के स्कूलों में गूजेगी वायलिन की धुन
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रामपुर। परंपरागत उद्योगों को बढ़ावा देने की कड़ी में अब रामपुर के वायलिन को भी अलग पहचान दिलाई जाएगी। इसके लिए जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने सभी स्कूलों से वायलिन बजाना सिखाने पर जोर दिया है, ताकि संगीत के क्षेत्र में आगे जाने के इच्छुक युवाओं की मदद हो सके और यहां के वायलिन को विश्वपटल पर उभारा जा सके।
प्रदेश सरकार की ओर से उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे उद्योगों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जो क्षेत्रीय होने के बाद भी अलग पहचान रखते थे, लेकिन संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में ये उद्योग अपनी पहचान खोते चले गए। रामपुर की बात की जाए तो यहां का चाकू उद्योग सबसे बड़ा और पुराना उद्योग था, लेकिन गुजरते दिनों के साथ चाकू की धार भी कुंद होती चली गई। इसके अलावा यहां का वायलिन, टोपी, जरी जरदोजी, पेचवर्क और पतंग का कारोबार भी काफी प्रसिद्ध था। यहां कि विदेशों तक में व्यापार होता था।
अब ऐसे पुराने उद्योगों को फिर से खड़ा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बाबत विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही डीएम से कहा है कि वे परंपरागत उद्योगों को भी विश्वपटल पर उकेरने के लिए प्रयास करें। लिहाजा, जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए। इसे बढ़ावा देने के लिए अभिनव प्रयोग यह किया गया है कि डीएम ने वायलिन उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षण संस्थाओं से सहयोग मांगा है। उन्होंने सभी स्कूल कालेजों से अपील की है कि वे अपनी संस्थाओं में बच्चों को वायलिन बजाना भी सिखाएं। उन्हें रामपुर की संस्कृति के बारे में बताएं। इससे एक तरफ तो उन बच्चों को मदद मिलेगी, जो संगीत के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं और दूसरा यहां के उद्योग को तेज गति से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
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प्रदेश सरकार की ओर से उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए तमाम प्रयास किए जा रहे हैं। ऐसे उद्योगों पर विशेष जोर दिया जा रहा है, जो क्षेत्रीय होने के बाद भी अलग पहचान रखते थे, लेकिन संसाधनों और सुविधाओं के अभाव में ये उद्योग अपनी पहचान खोते चले गए। रामपुर की बात की जाए तो यहां का चाकू उद्योग सबसे बड़ा और पुराना उद्योग था, लेकिन गुजरते दिनों के साथ चाकू की धार भी कुंद होती चली गई। इसके अलावा यहां का वायलिन, टोपी, जरी जरदोजी, पेचवर्क और पतंग का कारोबार भी काफी प्रसिद्ध था। यहां कि विदेशों तक में व्यापार होता था।
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अब ऐसे पुराने उद्योगों को फिर से खड़ा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस बाबत विस्तृत दिशा निर्देश जारी कर दिए हैं। साथ ही डीएम से कहा है कि वे परंपरागत उद्योगों को भी विश्वपटल पर उकेरने के लिए प्रयास करें। लिहाजा, जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने इस दिशा में प्रयास शुरू कर दिए। इसे बढ़ावा देने के लिए अभिनव प्रयोग यह किया गया है कि डीएम ने वायलिन उद्योग को आगे बढ़ाने के लिए शिक्षण संस्थाओं से सहयोग मांगा है। उन्होंने सभी स्कूल कालेजों से अपील की है कि वे अपनी संस्थाओं में बच्चों को वायलिन बजाना भी सिखाएं। उन्हें रामपुर की संस्कृति के बारे में बताएं। इससे एक तरफ तो उन बच्चों को मदद मिलेगी, जो संगीत के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं और दूसरा यहां के उद्योग को तेज गति से आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
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