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Moradabad News: स्कूल भवन निर्माण के लिए छात्राओं ने किया प्रदर्शन
Fri, 25 Jul 2025 02:01 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Fri, 25 Jul 2025 02:01 AM IST
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बिलारी। सहसपुर गांव में परिषदीय कन्या जूनियर स्कूल का आठ साल बाद भी नया भवन नहीं बन पाया। स्कूल की छात्राएं सहसपुर प्राइमरी स्कूल के दो कमरों में बैठकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं। नया भवन न बनने को विभागीय अधिकारियों की लापरवाही को जिम्मेदार मानते हुए छात्राओं ने प्रदर्शन किया।
सहसपुर में राजमहल रोड पर परिषदीय जूनियर हाईस्कूल के निकट ही कन्या जूनियर स्कूल का भवन बना हुआ था। वर्ष 2016 में इस भवन को विभाग
द्वारा जर्जर घोषित कर दिया गया और वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जूनियर स्कूल की छात्राओं को निकट में ही संचालित परिषदीय प्राइमरी स्कूल के दो कक्षों में बैठाकर पढ़ाना शुरू कर दिया। जब भी ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूल खुला तब हर वर्ष छात्राओं ने स्कूल का अलग से नया भवन बनाने की मांग की मांग उठाई लेकिन अधिकारी कोई समाधान नहीं कर पाए।
वर्तमान में स्थिति यह है कि कन्या जूनियर स्कूल में कुल 135 पंजीकृत छात्राएं हैं। कक्षा सात और आठ की छात्राओं को एक ही साथ एक कमरे में बैठकर पढ़ाना पढ़ रहा है। स्कूली छात्राओं को न तो खेलने के लिए कोई मैदान है और न ही मिडडे मील बनाने के लिए कोई रसोई है। जरूरत पड़ने पर छात्राओं को प्राइमरी स्कूल के शौचालय में ही जाना पढ़ता है। लगातार आठ साल से परेशान छात्राओं का बृहस्पतिवार सुबह गुस्सा भड़क गया और उन्होंने कक्षाओं से बाहर आकर प्रदर्शन कर प्रभारी शिक्षक के माध्यम से खंड शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भेजा। प्रभारी शिक्षक ने छात्राओं को समझा बुझाकर शांंत किया।
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सहसपुर में राजमहल रोड पर परिषदीय जूनियर हाईस्कूल के निकट ही कन्या जूनियर स्कूल का भवन बना हुआ था। वर्ष 2016 में इस भवन को विभाग
द्वारा जर्जर घोषित कर दिया गया और वैकल्पिक व्यवस्था के तहत जूनियर स्कूल की छात्राओं को निकट में ही संचालित परिषदीय प्राइमरी स्कूल के दो कक्षों में बैठाकर पढ़ाना शुरू कर दिया। जब भी ग्रीष्मकालीन अवकाश के बाद स्कूल खुला तब हर वर्ष छात्राओं ने स्कूल का अलग से नया भवन बनाने की मांग की मांग उठाई लेकिन अधिकारी कोई समाधान नहीं कर पाए।
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वर्तमान में स्थिति यह है कि कन्या जूनियर स्कूल में कुल 135 पंजीकृत छात्राएं हैं। कक्षा सात और आठ की छात्राओं को एक ही साथ एक कमरे में बैठकर पढ़ाना पढ़ रहा है। स्कूली छात्राओं को न तो खेलने के लिए कोई मैदान है और न ही मिडडे मील बनाने के लिए कोई रसोई है। जरूरत पड़ने पर छात्राओं को प्राइमरी स्कूल के शौचालय में ही जाना पढ़ता है। लगातार आठ साल से परेशान छात्राओं का बृहस्पतिवार सुबह गुस्सा भड़क गया और उन्होंने कक्षाओं से बाहर आकर प्रदर्शन कर प्रभारी शिक्षक के माध्यम से खंड शिक्षा अधिकारी को ज्ञापन भेजा। प्रभारी शिक्षक ने छात्राओं को समझा बुझाकर शांंत किया।
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