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Moradabad News: मंडल स्तर पर प्रदेश के पहले गजेटियर का हुआ विमोचन

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 16 Oct 2023 12:22 PM IST
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State's first gazetteer released at divisional level
मुरादाबाद। कमिश्नर आंजनेय कुमार सिंह के निर्देशन में तैयार कराए गए मुरादाबाद मंडल के गजेटियर का रविवार को जनप्रतिनिधियों और साहित्यकारों ने विमोचन किया। यह प्रदेश का मंडल स्तर पर पहला गजेटियर होने का दावा किया जा रहा है। गजेटियर में मंडल की भौगोलिक संरचना, इतिहास, राजनीतिक, सामाजिक, आर्थिक एवं सांस्कृतिक पक्ष को दर्शाया गया है।
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पंचायत भवन सभागार में आयोजित कार्यक्रम में कमिश्नर ने बताया कि गजेटियर के प्रथम अंक का विमोचन नवरात्र में तैयार करने में काफी मुश्किलें पेश आई। मुरादाबाद मंडल ने गजेटियर को बनाने की शुरूआत छह माह पहले शुरू की थी। इस मामले की जानकारी मिलने पर प्रदेश सरकार ने प्रत्येक जिले का गजेटियर प्रकाशित करने का निर्णय लिया है। कहा जाता है कि भविष्य में भगवान कल्कि के रूप में अवतार लेंगे। मुरादाबाद मंडल में राजा पृथ्वीराज चौहान द्वारा मुरादाबाद में मंदिर बनाने और संभल आने का पता चला था। इतिहास बताता है कि चीनी यात्री ह्वेनसांग मुरादाबाद से उत्तराखंड की तरफ गया था। यह जिगर की धरती है। कवि दुष्यंत कुमार इसी मंडल में पैदा हुए थे लेकिन गजेटियर नहीं होने के कारण लोग नहीं जानते है कि जिले में कौन-कौन हमारी सांस्कृतिक और सामाजिक विरासत है।
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मुरादाबाद के बारे में कहा जाता है कि शाहजहां रुस्तम से नाराज होकर मुरादाबाद बनाया था लेकिन ये तथ्य इतिहास से मेल नहीं खाते हैं।गजेटियर की थीम पुनर्जीवन, पुनरस्थापना पर आधारित है। इस दौरान पद्मश्री दिलशाद हुसैन, वरिष्ठ नवगीतकार महेश्वर तिवारी, शायर मंसूर उस्मानी, मेयर विनोद अग्रवाल, एमएलसी डॉ. जयपाल सिंह व्यस्त, गोपाल अंजान, जिला पंचायत अध्यक्ष डॉ. शैफाली सिंह, डीआईजी मुनिराज जी, डीएम मानवेंद्र सिंह, ओम प्रकाश शास्त्री, वतन कुमार आदि मौजूद रहे।
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इस कारण गजेटियर की पड़ी आवश्यकता
मंडलायुक्त ने बताया कि गूगल पर भी भ्रामक सूचनाएं चलती रहती है। सही सूचना को जानने के लिए गजेटियर तैयार करने की आवश्यकता पड़ी। क्योंकि कुछ लोग गूगल देखकर नरेटिव सेट (कथा गढ़ने) करते हैं। अधिकारी किसी नरेटिव पर नहीं चलते हैं। वे मजबूत साक्ष्य लेकर कोई बात करते हैं। गजेटियर में छपे तथ्य प्रामाणिक होते हैं। एक बार अधिकारिक डॉटा गलत मिलने के कारण फिर उसे ठीक किया गया। इस कारण 360 डिग्री पीछे जाकर काम करना पड़ा और बिलंब हुआ।

जब संचालक को डांटना पड़ा
एमएलसी डॉ. जसपाल सिंह व्यस्त मंच संचालक की भाषा की कई गलतियों को सुनने के बाद सहन नहीं कर सके। उन्होंने पद्मश्री दिलशाद हुसैन का नाम नहीं लेने पर उसे हिदायत दी। मंच संचालक ने इसके पहले गोपाल अंजान का नाम सही नहीं लिया।
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