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राजकीय महिला शरणालय : पहले निर्माण का...अब संचालन का हो रहा इंतजार
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मुरादाबाद। राजकीय महिला शरणालय के निर्माण के लिए करीब सात वर्ष तक इंतजार किया गया। अब दिसंबर में जब बिल्डिंग विभाग को हैंडओवर हो गई है तो उसके संचालन का समय निर्धारित नहीं है। करीब छह करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से बना भवन शुभारंभ के इंतजार में है। इसमें सौ बालिकाओं के रहने की व्यवस्था है। अधिकारियों का कहना है कि स्टाफ की नियुक्ति के बाद संचालन शुरु होगा।
वर्ष 2018 में महिला कल्याण विभाग द्वारा महिला शरणालय की नई इमारत के लिए शासन को भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद करीब छह करोड़ 73 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। बीच-बीच में किश्तों की देरी की वजह से निर्माण में विलंब होता गया। बिल्डिंग निर्माण के बाद अब दिसंबर में कार्यदायी संस्था ने इसे महिला कल्याण विभाग को हैंडओवर कर दिया। इस बिल्डिंग में दस से 18 आयु की सौ बालिकाओं के रहने की क्षमता है। यहां पर बरेली और मुरादाबाद मंडल की पॉस्को केस वाली बालिकाएं रह सकेंगी। यहां पर आवास, पढ़ाई और प्रशिक्षण की भी सुविधा रहेगी।
संस्था को भेजी जाती हैं करीब 60 बालिकाएं
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अमित कौशल ने बताया कि यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार प्रति वर्ष करीब चार सौ बालिकाएं या तो मनमर्जी से घर छोड़ देती हैं या फिर उन्हें बहला-फुसलाकर ले जाया जाता है। जब उन्हें परिजन नहीं अपनाना चाहते या फिर वह अपने घर लौटना नहीं चाहती तो फिर उन्हें बालिका गृह भेजा जाता है। ऐसी बालिकाओं की संख्या भी एक साल में करीब 60 से 70 होती है। वर्तमान में ऐसी बालिकाओं को जनपद मथुरा बालिका गृह में भेजा जा रहा है। कई बार काउंसिलिंग के बाद कुछ बालिकाओं को परिजन अपनाने को तैयार हो जाते हैं तो कुछ बेटियां भी परिजनों से लगातार संवाद होने पर घर लौटने को तैयार हो जाती हैं।
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वर्जन...
यदि अपने शहर में राजकीय महिला शरणालय जल्द शुरु हो जाता है तो परिजनों को बड़ी सहूलियत होगी। क्योंकि अभी उन्हें अपनी बेटियों से मिलने के लिए दूसरे जनपदों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक समस्या की होती है। अपने शहर में कम समय में मुलाकात आसान हो जाएगी और फिर आपसी बातचीत के द्वारा मतभेद दूर होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
अमित कौशल, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति
उम्मीद है कि इसी महीने शुरु हो जाएगा। आउट सोर्सिंग के कर्मचारी स्थानीय स्तर से रखे जाएंगे और सरकारी स्टाफ लखनऊ से आएगा। अभी स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई है। दिसंबर माह को बिल्डिंग हैंडओवर हो गई है।
चंद्रभूषण, डीपीओ
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वर्ष 2018 में महिला कल्याण विभाग द्वारा महिला शरणालय की नई इमारत के लिए शासन को भेजे गए प्रस्ताव को मंजूरी मिलने के बाद करीब छह करोड़ 73 लाख रुपये की धनराशि आवंटित की गई थी। बीच-बीच में किश्तों की देरी की वजह से निर्माण में विलंब होता गया। बिल्डिंग निर्माण के बाद अब दिसंबर में कार्यदायी संस्था ने इसे महिला कल्याण विभाग को हैंडओवर कर दिया। इस बिल्डिंग में दस से 18 आयु की सौ बालिकाओं के रहने की क्षमता है। यहां पर बरेली और मुरादाबाद मंडल की पॉस्को केस वाली बालिकाएं रह सकेंगी। यहां पर आवास, पढ़ाई और प्रशिक्षण की भी सुविधा रहेगी।
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संस्था को भेजी जाती हैं करीब 60 बालिकाएं
बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष अमित कौशल ने बताया कि यदि पिछले वर्षों के आंकड़ों के अनुसार प्रति वर्ष करीब चार सौ बालिकाएं या तो मनमर्जी से घर छोड़ देती हैं या फिर उन्हें बहला-फुसलाकर ले जाया जाता है। जब उन्हें परिजन नहीं अपनाना चाहते या फिर वह अपने घर लौटना नहीं चाहती तो फिर उन्हें बालिका गृह भेजा जाता है। ऐसी बालिकाओं की संख्या भी एक साल में करीब 60 से 70 होती है। वर्तमान में ऐसी बालिकाओं को जनपद मथुरा बालिका गृह में भेजा जा रहा है। कई बार काउंसिलिंग के बाद कुछ बालिकाओं को परिजन अपनाने को तैयार हो जाते हैं तो कुछ बेटियां भी परिजनों से लगातार संवाद होने पर घर लौटने को तैयार हो जाती हैं।
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वर्जन...
यदि अपने शहर में राजकीय महिला शरणालय जल्द शुरु हो जाता है तो परिजनों को बड़ी सहूलियत होगी। क्योंकि अभी उन्हें अपनी बेटियों से मिलने के लिए दूसरे जनपदों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसमें सबसे बड़ी चुनौती आर्थिक समस्या की होती है। अपने शहर में कम समय में मुलाकात आसान हो जाएगी और फिर आपसी बातचीत के द्वारा मतभेद दूर होने की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।
अमित कौशल, अध्यक्ष बाल कल्याण समिति
उम्मीद है कि इसी महीने शुरु हो जाएगा। आउट सोर्सिंग के कर्मचारी स्थानीय स्तर से रखे जाएंगे और सरकारी स्टाफ लखनऊ से आएगा। अभी स्टाफ की नियुक्ति नहीं हुई है। दिसंबर माह को बिल्डिंग हैंडओवर हो गई है।
चंद्रभूषण, डीपीओ