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Moradabad News: श्रीनगर कॉलोनी... चुनावी वादों में ही सिमटकर रह गया विकास

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 21 May 2026 02:22 AM IST
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Srinagar Colony... development remains confined to election promises
मुरादाबाद। नगर निगम के वार्ड-37 स्थित श्रीनगर कॉलोनी में विकास के दावों की हकीकत कीचड़ और बदहाली में दबी नजर आती है। डेढ़ दशक से आबाद इस कॉलोनी में आज तक न पक्की सड़क बन सकी और न ही नालियों का निर्माण हुआ। हालात इतने खराब हैं कि लोग रोजाना धूल, गंदगी और जलभराव से जूझने के लिए मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि हर बार चुनाव में नेता यहां आते हैं, दावे करते हैं और उसके बाद कोई झांकने नहीं आता।
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कॉलोनी में पानी की पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन लोगों का आरोप है कि सप्लाई नाममात्र की भी नहीं आती। मजबूरी में अधिकांश घरों में मोटर लगवाकर पानी खींचा जा रहा है। सुबह और शाम पानी भरना यहां लोगों की दिनचर्या बन चुका है। लोगों का कहना है कि बरसात में हालात भयावह हो जाते हैं। गलियों में घुटनों तक गंदा पानी भर जाता है।
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आसपास वर्षों से बंद पड़ी सूत मिल का इलाका जंगल में तब्दील हो चुका है। यहां से सांप आबादी तक पहुंच जाते हैं। लोगों का कहना है कि बारिश के दिनों में बच्चे स्कूल नहीं जा पाते और नौकरीपेशा लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है। कॉलोनीवासियों का आरोप है कि जनप्रतिनिधि और नगर निगम की टीमें कई बार निरीक्षण कर चुकी हैं, लेकिन हर बार सिर्फ आश्वासन मिला।
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कुछ गलियों में सड़क निर्माण शुरू हुआ भी तो मिट्टी डालकर काम अधूरा छोड़ दिया गया। लोगों ने जलभराव से बचने के लिए आठ-आठ फीट ऊंचा भराव कर मकान बनाए लेकिन सिस्टम की नींद अब तक नहीं टूटी। महापौर विनोद अग्रवाल का कहना है कि लाइनपार की कई सड़कों को बनवाने के लिए टेंडर हुए हैं। जहां कमी होगी, सुधार कराया जाएगा।

लोगों के कोट्स (फोटो)
हम यहां 15 साल से रह रहे हैं लेकिन आज तक सड़क नहीं बनी। हर चुनाव में नेता आते हैं, वादे करते हैं और फिर गायब हो जाते हैं। बरसात में घर से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे ज्यादा परेशानी झेलनी पड़ती है।

- अनीता
पानी की लाइन बिछी है लेकिन सप्लाई नहीं आती। मोटर से पानी खींचना पड़ता है। कई बार शिकायत की लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। महिलाओं को सबसे ज्यादा दिक्कत होती है क्योंकि बिना पानी घर का काम प्रभावित होता है।
- कुसुम
बरसात में पूरी कॉलोनी तालाब बन जाती है। गंदा पानी घरों तक पहुंच जाता है। सांप निकलने का डर बना रहता है। बच्चे स्कूल नहीं जा पाते। नगर निगम के अधिकारी सिर्फ देखने आते हैं, काम कराने कोई नहीं आता।
- पुष्पा
सड़क निर्माण शुरू हुआ था तो उम्मीद जगी थी कि अब हालात सुधरेंगे, लेकिन मिट्टी डालकर काम छोड़ दिया गया। अब वही मिट्टी धूल बनकर लोगों के घरों में जा रही है। कॉलोनी के लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे हैं।

- विनीता
स्ट्रीट लाइट नहीं होने से रात में महिलाओं और बच्चों को डर लगता है। कई बार लोग गिरकर चोटिल हो चुके हैं। अंधेरे और खराब रास्तों के कारण शाम होते ही लोगों का निकलना बंद हो जाता है।

मनोज सिंह
हमने मकान बनाने से पहले आठ फीट तक भराव कराया, तब कहीं जाकर पानी से बच पाए। जिन लोगों ने ऐसा नहीं कराया, उनके घरों में बरसात में पानी भर जाता है। यह कॉलोनी उपेक्षा की मिसाल बन गई है।

- अनूप
जनप्रतिनिधियों ने सिर्फ वोट के समय याद किया। यहां रहने वाले लोगों को कोई सुविधा नहीं मिलती। अगर यही हाल रहा तो आने वाले समय में यहां रहना और मुश्किल हो जाएगा।
- कोमल
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