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पालने वाले पिता को हास्पिटल से डिस्चार्ज करा नहीं ले गया घर

Fri, 30 Sep 2016 02:14 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद Updated Fri, 30 Sep 2016 02:14 AM IST
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son not discharged his father to hospital
गोविंद नगर निवासी 55 वर्षीय एक पिता अस्पताल से बाहर अपनों के बीच जाने को तरस रहा है। लेकिन उसे यहां से ले जाने वाला कोई नहीं है। 2 सितंबर को बेटा लेने भी आया तो डिस्चार्ज तो करा लिया लेकिन गाड़ी लेकर आने के बहाने वहां से फरार हो गया। बेटे की इस उपेक्षा से पिता सदमे में है। 
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 रामकुमार ने चार साल पहले पत्नी के इलाज के लिए गोविंद नगर स्थित अपना घर बेच दिया लेकिन वह पत्नी को नहीं बचा पाया। तब से वह एक ठेकेदार के साथ रहता था। रामकुमार पॉलिश कारीगर है। 15 अगस्त को तबियत बिगड़ने के बाद रामकुमार को उसके ठेकेदार ने उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया।
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इलाज चलने के बाद वह स्वस्थ्य हो गया। दो सितंबर को उसने ठेकेदार से कहा कि वह उसके बेटे को बुला दे ताकि वह उसके साथ घर जा सके। बेटे ने ठेकेदार से पिता को अस्पताल से ले जाने के नाम पर रुपये भी मांग लिये। इसके बाद रामकुमार को लेने न तो ठेकेदार आया और न ही रामकुमार का बेटा बाबूराम।
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बाबू राम अपने पिता को यह कहकर अस्पताल में छोड़ कर गया था कि वह गाड़ी लाने जा रहा है। राजकुमार ने बताया कि उसका बेटा बाबू राम काशीराम नगर में रहता है और रेडिमेड कपड़े का काम करता है। उसके तीन बेटे हैं। दो बेटे मुरादाबाद से बाहर रहते हैं।

घर बेच देने के बाद पूरा रामकुमार का पूरा परिवार बिखर गया। बेटों ने पिता को उसके हाल पर छोड़ दिया। तब से रामकुमार ठेकेदार के घर रहता था। अब ठेकेदार ने भी उसे छोड़ दिया है।  डिस्चार्ज करने के बाद रामकुमार को अस्पताल में नहीं रखा जा सकता था। इस स्थिति में अस्पताल के डाक्टर प्रवीण शाह ने अपने रिस्क पर रामकुमार को दुबारा एडमिट कराया।

रामकुमार को टीबी की शिकायत थी लेकिन अब वह स्वस्थ है। अस्पताल से बाहर अपनों के पास जाने को तरस रहे रामकुमार ने कहा कि वह घर बेचने के बाद से किसी बेटे के पास रहने नहीं गया। इस दौरान उसने पैसों के मामले में बेटों की मदद की।


अपनी कमाई का बड़ा हिस्सा बेटों को दे देता था। लेकिन अब जब उसे मदद की जरूरत है तो सब ने साथ छोड़ दिया। अब वह कहां जाएगा इस सवाल पर रामकुमार की आंखें भर आई।  
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