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Moradabad News: भाई की कलाई पर सजा बहन का प्यार...बलाएं लीं बार-बार
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मुरादाबाद। भाई बहन के अटूट प्यार का त्योहार रक्षाबंधन शनिवार को पूरे उल्लास के साथ मनाया गया। बहनों ने अपने भाई की कलाई पर प्रेम का धागा बांधा और उनकी सुख समृद्धि के लिए बलाएं लीं। भाइयों ने भी उन्हें उपहार देकर उनकी रक्षा का संकल्प लिया। त्योहार पर भद्रा का साया न होने की वजह से बहनों ने शाम तक राखी बांधी।
शनिवार सुबह से ही अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनों में जबरदस्त उत्साह था। कई बहनें पहले अक्षत, रोली, फूल, दीपक आदि लेकर पहले मंदिरों में पहुंची। वहां पर भगवान को राखियां अर्पित कीं और बाद में विधि विधान से अपने भाइयों की आरती उतारी और राखी बांधकर उनकी दीर्घायु की प्रार्थना की। छोटे बच्चों में रक्षाबंधन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने भी एक-दूसरे को राखी बांधी।
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दुकानों पर रही जबरदस्त भीड़
त्योहार पर मिठाई की दुकानों को आकर्षक तरीके से सजाया गया था। रंग-बिरंगे पर्दे, फूलों के अलावा लाइटों से सजावट की गई थी। खुली मिठाई के अलावा पैकिंग वाली मिठाई भी उपलब्ध थी। पैकिंग वाली मिठाई के साथ डिस्काउंट के अलावा उपहार भी दिए थे। कुछ दुकानों पर उपहार की टोकरी बनाई गई थी। सुबह से लेकर दोपहर तक दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी रही।
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पिछले 35 वर्षों से बहन का फर्ज निभा रहीं हैं इकबाल...फोटो
मुरादाबाद। रक्षाबंधन पर गुजराती मोहल्ला निवासी सुभाष चंद्र रस्तोगी को इकबाल खान पिछले 35 वर्षों से राखी बांध रही हैं। सुभाष चंद्र रस्तोगी ने बताया कि डॉ. हनीफ खान के यहां से हमारे पारिवारिक रिश्ते थे। 35 वर्ष पहले मेरी बहन सुशीला रस्तोगी का निधन हो गया था। रक्षाबंधन पर मैं बहुत उदास था। मेरी भावनाओं को समझकर डॉ. हनीफ की पत्नी इकबाल खान ने राखी बांधने की अनुमति मांगी। उनके यह पूछने भर से मुझे लगा कि मुझे वापस मेरी बहन मिल गई। तब से आज तक हर वर्ष मुझे राखी बांधती हैं। दो वर्ष पहले वह अपने बेटों के पास लंदन चली गई थीं। लेकिन जब राखी का समय आया तो वह वापस आ गईं और राखी बांधी। इस प्रेम और सौहार्द के रिश्ते को बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।
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शनिवार सुबह से ही अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए बहनों में जबरदस्त उत्साह था। कई बहनें पहले अक्षत, रोली, फूल, दीपक आदि लेकर पहले मंदिरों में पहुंची। वहां पर भगवान को राखियां अर्पित कीं और बाद में विधि विधान से अपने भाइयों की आरती उतारी और राखी बांधकर उनकी दीर्घायु की प्रार्थना की। छोटे बच्चों में रक्षाबंधन को लेकर खासा उत्साह देखने को मिला। उन्होंने भी एक-दूसरे को राखी बांधी।
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दुकानों पर रही जबरदस्त भीड़
त्योहार पर मिठाई की दुकानों को आकर्षक तरीके से सजाया गया था। रंग-बिरंगे पर्दे, फूलों के अलावा लाइटों से सजावट की गई थी। खुली मिठाई के अलावा पैकिंग वाली मिठाई भी उपलब्ध थी। पैकिंग वाली मिठाई के साथ डिस्काउंट के अलावा उपहार भी दिए थे। कुछ दुकानों पर उपहार की टोकरी बनाई गई थी। सुबह से लेकर दोपहर तक दुकानों पर खरीदारों की भीड़ लगी रही।
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पिछले 35 वर्षों से बहन का फर्ज निभा रहीं हैं इकबाल...फोटो
मुरादाबाद। रक्षाबंधन पर गुजराती मोहल्ला निवासी सुभाष चंद्र रस्तोगी को इकबाल खान पिछले 35 वर्षों से राखी बांध रही हैं। सुभाष चंद्र रस्तोगी ने बताया कि डॉ. हनीफ खान के यहां से हमारे पारिवारिक रिश्ते थे। 35 वर्ष पहले मेरी बहन सुशीला रस्तोगी का निधन हो गया था। रक्षाबंधन पर मैं बहुत उदास था। मेरी भावनाओं को समझकर डॉ. हनीफ की पत्नी इकबाल खान ने राखी बांधने की अनुमति मांगी। उनके यह पूछने भर से मुझे लगा कि मुझे वापस मेरी बहन मिल गई। तब से आज तक हर वर्ष मुझे राखी बांधती हैं। दो वर्ष पहले वह अपने बेटों के पास लंदन चली गई थीं। लेकिन जब राखी का समय आया तो वह वापस आ गईं और राखी बांधी। इस प्रेम और सौहार्द के रिश्ते को बयां करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं।
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