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कहीं जमीन-जायदाद न मांग लें बहनें, इस डर से यहां के भाई नहीं बंधवाते राखी

Sun, 02 Aug 2020 10:35 PM IST
Vikas Kumar संवाद न्यूज एजेंसी, संभल
संवाद न्यूज एजेंसी, संभल Published by: Vikas Kumar Updated Sun, 02 Aug 2020 10:35 PM IST
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Sisters do not ask for property so brother do not tied Rakhi in Benipur Chak village Sambhal
प्रतिकात्मक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

अनजाना डर और सदियों से लगातार इसका निर्वहन। भारतीय संस्कृति का हिस्सा रक्षाबंधन पर्व पर ऐसा अनजाने डर की यह कहानी किसी किताब में नहीं लिखी बल्कि संभल जिले के बेनीपुर चक गांव की है।

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शहर से मात्र पांच किलोमीटर दूर इस गांव में सदियों से रक्षाबंधन का पर्व नहीं मनाया जाता। वजह यह है कि कहीं बहन उपहार में जमींदारी न मांग ले जिससे उन्हें फिर अपना गांव छोड़ना न पड़े।दरअसल, संभल तहसील क्षेत्र के गांव बेनीपुर के ग्रामीण रक्षाबंधन नहीं मनाते। इसके पीछे मान्यता यह है कि कहीं बहन फिर से कोई ऐसा उपहार न मांग ले जिससे गांव छोड़ना पड़े। 
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गांव के बुजुर्गों की मानें तो वे पहले अलीगढ़ की अतरौली तहसील के गांव सेमराई में रहते थे। जबकि ये गांव ठाकुरों का था। बावजूद इसके यादव और ठाकुरों में  कभी कोई टकराव की स्थिति नहीं आई और दोनों ही वर्ग राजी खुशी रहते थे। कई पीढ़ियों तक ठाकुर परिवार में कोई बेटा नहीं जन्मा, इसलिए इस परिवार की एक बेटी ने यादवों के बेटों को राखी बांधना शुरू कर दिया, लेकिन एक बार ठाकुर की बेटी ने यादव भाई से उसकी जमींदारी उपहार में मांग ली। 
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इस पर उन्होंने गांव छोड़ने का फैसला लिया और बाद में सब बेनीपुर चक में आकर बस गए। तब से यादव परिवारों ने फैसला किया की अब राखी नहीं बंधवाएंगे। पता नहीं फिर कोई बहन जमींदारी मांग ले, तबसे ये परंपरा निरंतर चली आ रही है। 


बेनीपुर चक स्थित श्री वंश गोपाल कल्किधाम मंदिर के महंत स्वामी भगवत प्रिय बताते हैं कि हर त्योहार और परंपरा हमारी संस्कृति का ही हिस्सा है। सदियों से हम इसका निर्वहन करते आ रहे हैं। लेकिन कभी कभार कुछ त्योहार में हुई बातें या घटनाएं ऐसी हो जाती हैं कि जो समय के साथ मान्यता में तब्दील हो जाती हैं।  

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