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Moradabad News: पर्चा बनवाने के लिए घुमाया...दवाइयां भी पूरी नहीं मिलीं
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मुरादाबाद। जिला अस्पताल में मरीजों की संख्या कम होने के बाद भी परेशानियां बरकरार हैं। शनिवार दोपहर डेढ़ बजे के बाद मरीजों को पर्चा बनवाने के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। कई मरीजों को दवाइयां भी अधूरी मिलीं। अधिकारियों का कहना है कि दोपहर में आने वाले मरीजों का इमरजेंसी में उपचार किया जाता है।
शनिवार को दोपहर दो बजे तक ओपीडी थी। इसमें दिनभर में 1950 मरीजों ने उपचार लिया, जबकि आईपीडी में 106 मरीजों को भर्ती किया गया। अस्पताल में करीब 250 मरीज भर्ती हैं। धरमपुर कांठ निवासी फतेह सिंह सांस के मरीज हैं और पिछले कई दिन से बुखार की वजह से परेशान थे। सांस लेने में परेशानी बढ़ने पर शनिवार को उनका पोता सचिन उपचार के लिए करीब सवा बजे इमरजेंसी में पहुंचा। सचिन ने बताया कि इमरजेंसी में उपचार करने के बजाय चिकित्सकों ने उन्हें दस नंबर कमरा में जाने के लिए कह दिया। जब वह दस नंबर में पहुंचे तो उन्हें पहले पर्चा लेकर आने के लिए कहा। जब वह पर्चा खिड़की पर पहुंचे तब तक 1:45 मिनट का समय हो गया था। लगातार इधर-उधर भटकने के कारण फतेह सिंह की स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो गई कि वह चलना तो दूर खड़े तक नहीं हो पा रहे थे। सचिन ने कहा कि ओपीडी की तरफ व्हीलचेयर भी नहीं हैं और इमरजेंसी तक यह चल नहीं पाएंगे। अब मैं किसी बाइक वाले से मदद मागूंगा या फिर गोद में लेकर जाऊंगा।
आधी दवाई देकर कहा, अब सोमवार को आना
भट्टी स्ट्रीट निवासी वली उर रहमान ने बताया कि बेटी के दांत निकलवाया था और बेटे की भी तबियत खराब थी। सुबह नौ बजे उपचार करवाने के लिए अस्पताल में आए। डॉक्टर को दिखाने के बाद दस बजे खून की जांच के लिए लाइन में लगे। इसमें दोपहर 12 बज गए। जब दवा लेने लिए काउंटर पर गए तो वहां पर बेटी के पर्चे में से एक दवा नहीं दी और कहा कि अब सोमवार को आना। वहीं, बेटे के पर्चे की कोई दवा नहीं दी। कचहरी के नजदीक रहने वाले वेदप्रकाश को पेट दर्द की समस्या थी। उन्होंने बताया कि काउंटर से दवा मिलने के बाद जब मैं उन दवाइयों को डॉक्टर को दिखाने के लिए गया तो उन्होंने कहा कि यह अधूरी दवा है। दोबारा लाइन में लगने के बाद मैंने पूरी दवा देने के लिए कहा, तब जाकर दवा मिली। इसकी वजह से दो बार लाइन में लगना पड़ा और एक घंटे का अतिरिक्त समय लगा। मिलन विहार निवासी विपिन शर्मा ने बताया कि मुझे खुजली की समस्या थी। डॉक्टर को दिखाने के बाद जब दवा लेने के लिए आया तो आधी दवा दी। कहा कि अभी इतनी ही मिलेगी। बूजपुर निवासी पूजा ने बताया कि मुझे सांस की परेशानी है। ठंडा मौसम होते ही सांस नली में सूजन आ जाती है। एक महीने से उपचार करवा रही हूं। हर बार मुझे सिर्फ पांच दिन की दवा देते हैं। पांच दिन बाद जब आती हूं तो वही दवा फिर दे देते हैं। ऐसा भी नहीं है कि कोई दवा बदली जा रही हो। मैंने दस दिन की दवा देने को कहा तो मना कर दिया।
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डेंगू-मलेरिया और पुलिस भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए वार्ड आरक्षित
अस्पताल में डेंगू और मलेरिया के लिए वार्ड आरक्षित किया गया है। इसके अलावा पुलिस भर्ती के लिए आने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी दस बेड आरक्षित किए गए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि शनिवार को सात अभ्यर्थी भर्ती हुए हैं। वहीं एक अभ्यर्थी के फ्रैक्चर हुआ है।
वर्जन...
दोपहर 1:45 बजे पर्चा बनवाना बंद हो जाता है, ताकि डॉक्टर मरीजों को देख सकें। डॉक्टर दोपहर 2.15 बजे तक मरीजों को देखते हैं। सभी मरीजों को दवाइयां मिलती हैं। पर्चे में कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं जो एक साथ दो बीमारियों में काम करती हैं। जैसे बुखार, खांसी आदि में। इसलिए मरीजों को लगता है कि उनको कम दवा मिली है।
डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधिकारी जिला अस्पताल
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शनिवार को दोपहर दो बजे तक ओपीडी थी। इसमें दिनभर में 1950 मरीजों ने उपचार लिया, जबकि आईपीडी में 106 मरीजों को भर्ती किया गया। अस्पताल में करीब 250 मरीज भर्ती हैं। धरमपुर कांठ निवासी फतेह सिंह सांस के मरीज हैं और पिछले कई दिन से बुखार की वजह से परेशान थे। सांस लेने में परेशानी बढ़ने पर शनिवार को उनका पोता सचिन उपचार के लिए करीब सवा बजे इमरजेंसी में पहुंचा। सचिन ने बताया कि इमरजेंसी में उपचार करने के बजाय चिकित्सकों ने उन्हें दस नंबर कमरा में जाने के लिए कह दिया। जब वह दस नंबर में पहुंचे तो उन्हें पहले पर्चा लेकर आने के लिए कहा। जब वह पर्चा खिड़की पर पहुंचे तब तक 1:45 मिनट का समय हो गया था। लगातार इधर-उधर भटकने के कारण फतेह सिंह की स्थिति इतनी ज्यादा खराब हो गई कि वह चलना तो दूर खड़े तक नहीं हो पा रहे थे। सचिन ने कहा कि ओपीडी की तरफ व्हीलचेयर भी नहीं हैं और इमरजेंसी तक यह चल नहीं पाएंगे। अब मैं किसी बाइक वाले से मदद मागूंगा या फिर गोद में लेकर जाऊंगा।
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आधी दवाई देकर कहा, अब सोमवार को आना
भट्टी स्ट्रीट निवासी वली उर रहमान ने बताया कि बेटी के दांत निकलवाया था और बेटे की भी तबियत खराब थी। सुबह नौ बजे उपचार करवाने के लिए अस्पताल में आए। डॉक्टर को दिखाने के बाद दस बजे खून की जांच के लिए लाइन में लगे। इसमें दोपहर 12 बज गए। जब दवा लेने लिए काउंटर पर गए तो वहां पर बेटी के पर्चे में से एक दवा नहीं दी और कहा कि अब सोमवार को आना। वहीं, बेटे के पर्चे की कोई दवा नहीं दी। कचहरी के नजदीक रहने वाले वेदप्रकाश को पेट दर्द की समस्या थी। उन्होंने बताया कि काउंटर से दवा मिलने के बाद जब मैं उन दवाइयों को डॉक्टर को दिखाने के लिए गया तो उन्होंने कहा कि यह अधूरी दवा है। दोबारा लाइन में लगने के बाद मैंने पूरी दवा देने के लिए कहा, तब जाकर दवा मिली। इसकी वजह से दो बार लाइन में लगना पड़ा और एक घंटे का अतिरिक्त समय लगा। मिलन विहार निवासी विपिन शर्मा ने बताया कि मुझे खुजली की समस्या थी। डॉक्टर को दिखाने के बाद जब दवा लेने के लिए आया तो आधी दवा दी। कहा कि अभी इतनी ही मिलेगी। बूजपुर निवासी पूजा ने बताया कि मुझे सांस की परेशानी है। ठंडा मौसम होते ही सांस नली में सूजन आ जाती है। एक महीने से उपचार करवा रही हूं। हर बार मुझे सिर्फ पांच दिन की दवा देते हैं। पांच दिन बाद जब आती हूं तो वही दवा फिर दे देते हैं। ऐसा भी नहीं है कि कोई दवा बदली जा रही हो। मैंने दस दिन की दवा देने को कहा तो मना कर दिया।
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डेंगू-मलेरिया और पुलिस भर्ती के अभ्यर्थियों के लिए वार्ड आरक्षित
अस्पताल में डेंगू और मलेरिया के लिए वार्ड आरक्षित किया गया है। इसके अलावा पुलिस भर्ती के लिए आने वाले अभ्यर्थियों के लिए भी दस बेड आरक्षित किए गए हैं। चिकित्सकों का कहना है कि शनिवार को सात अभ्यर्थी भर्ती हुए हैं। वहीं एक अभ्यर्थी के फ्रैक्चर हुआ है।
वर्जन...
दोपहर 1:45 बजे पर्चा बनवाना बंद हो जाता है, ताकि डॉक्टर मरीजों को देख सकें। डॉक्टर दोपहर 2.15 बजे तक मरीजों को देखते हैं। सभी मरीजों को दवाइयां मिलती हैं। पर्चे में कुछ दवाइयां ऐसी होती हैं जो एक साथ दो बीमारियों में काम करती हैं। जैसे बुखार, खांसी आदि में। इसलिए मरीजों को लगता है कि उनको कम दवा मिली है।
डॉ. राजेंद्र कुमार, चिकित्सा अधिकारी जिला अस्पताल