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खुद की कुर्सी संग जिले की लाज बचाने का रितेश को मिल सकता है इनाम

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 12 Mar 2022 01:08 AM IST
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Ritesh can get reward for saving the honor of the district with his own chair
भाजपा प्रत्याशी रितेश गुप्ता की जीत के बाद बधाई देतीं महिला समर्थक। - फोटो : CITY
मुरादाबाद। भाजपा प्रत्याशी रितेश गुप्ता ने मुरादाबाद शहर सीट पर जीत दर्ज कर न सिर्फ अपनी कुर्सी बचा ली बल्कि जिले में कमल को मुर्झाने से भी बचा लिया है। वह लगातार दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। पूर्व कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह उनके राजनीतिक गुरु भी हैं। जिनका पार्टी संगठन में खासा दखल है। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि इसके लिए पार्टी उन्हें मंत्री पद के ओहदे से नवाज सकती है।
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मुरादाबाद शहर विधानसभा सीट पर वर्ष 1951 से लेकर 2022 तक हुए 18 विधानसभा चुनाव में इस सीट पर चार बार कांग्रेस, दो बार निर्दलीय, एक बार आरपीआई, दो बार जनतादल, दो बार समाजवादी पार्टी और पांच बार भाजपा का कब्जा हुआ है। इस लिहाज से आजादी के बाद से अब तक हुए विधानसभा चुनाव में सबसे अधिक भाजपा के ही विधायक यहां से चुने गए हैं।
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वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में जिले की छह सीटों में से भाजपा को सिर्फ दो सीट कांठ और मुरादाबाद पर ही सफलता मिल सकी थी। लेकिन इस चुनाव में भाजपा से कांठ की सीट सपा ने छीन ली। शहर सीट पर कांटे की टक्कर के बाद भाजपा के रितेश 782 मतों के अंतर से सपा के हाजी यूसुफ अंसारी को शिकस्त देकर देने में कामयाब हुए हैं। इससे रितेश न सिर्फ अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे बल्कि जिले में भाजपा की लाज को भी बचा लिया है। जिले की महत्वपूर्ण इस सीट पर रितेश ने लगातार दूसरी जीत भी दर्ज की है। जिले में सर्वाधिक 148384 मत प्राप्त करने का रिकार्ड भी रितेश ने ही बनाया है।
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मुरादाबाद जिला सपा का किला कहा जाता है। जिसे भेदने के प्रयास मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पिछले पांच साल से कर रहे हैं। कैबिनेट मंत्री चौधरी भूपेंद्र सिंह की गिनती रितेश गुप्ता के राजनीतिक गुरुओं में की जाती है। उन्होंने जिले की किसी भी सीट से चुनाव नहीं लड़ा है। लिहाजा माना जा रहा है कि भाजपा उन्हें संगठन में कोई खास जिम्मेदारी दे सकती है। यह सभी ऐसे समीकरण हैं, जिससे राजनीतिक पंडित रितेश गुप्ता को मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने को लेकर मजबूत दावेदार मान रहे हैं। रितेश गुप्ता के करीबियों का भी यही मानना है।
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