{"_id":"66f35e67a8179b9e0b0a0d44","slug":"real-life-husband-wife-and-sisters-playing-the-characters-of-ramleela-moradabad-news-c-15-1-mbd1005-486778-2024-09-25","type":"story","status":"publish","title_hn":"Moradabad News: रामलीला के किरदार निभा रहे असल जिंदगी के पति-पत्नी और बहनें","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Moradabad News: रामलीला के किरदार निभा रहे असल जिंदगी के पति-पत्नी और बहनें
विज्ञापन
मुरादाबाद। शहर में रामलीलाओं का मंचन 27 सितंबर से शुरू हो जाएगा, लेकिन यहां की समितियों द्वारा अन्य जनपदों व प्रदेशों में दो अक्तूबर से इसका आगाज किया जाएगा। इसमें ऐसी समितियां भी हैं, जहां विभिन्न किरदार असल जिंदगी में पति-पत्नी और बहनें निभाती हैं। बाली-तारा का किरदार हो या फिर कैकेयी और मंथरा की भूमिका, असल जिंदगी में आपसी रिश्ते के कलाकार ही इन्हें निभा रहे हैं।
मुरादाबाद की श्रीराम मानस मंच समिति से जुड़े नजीमाबाद निवासी वीरेंद्र कुमार शर्मा (बंटी) और बबली शर्मा रामलीला में बाली-तारा का किरदार निभाते हैं। वीरेंद्र ने बताया कि मैं 30 वर्षों से रामलीला से जुड़ा हूं। पहले मेरे पिताजी स्व. हरीनिवास शर्मा रामलीला का मंचन करते थे। तब से ही मेरी आस्था जुड़ी है। जब मेरी शादी हो गई तो पत्नी बबली शर्मा भी मंचन से जुड़ गईं। बाद में मेरी बेटी पूजा ने भी माता सीता का छह वर्ष तक किरदार निभाया। उन्होंने कहा कि मैं अब तक रामलीला में ब्रह्मा, जावंत, भरत और शत्रुघ्न का किरदार निभा चुका हूं, जबकि बबली ने माता सीता, कौशल्या का किरदार निभाया है। अब वह तारा के अलावा सुलोचना का किरदार भी निभाती हैं। उन्होंने कहा कि मंचन के एक महीने पहले से ही प्रतिदिन दो घंटे रिहर्सल करते हैं। रामायण से हमें आपसी प्रेम और मर्यादा में रहने की सीख मिलती है।
तीनों बहनें रामलीला से हैं जुड़ी
आदर्श कला संगम संस्थ से जुड़ीं और गांव मछरिया निवासी दामिनी ठाकुर ने बताया कि वह करीब आठ वर्ष से रामलीला मंचन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि मैं कैकेयी, मंदोदरी और सूर्पणखा का किरदार निभाती हूं, जबकि मेरी बहन आंचल माता सीता का किरदार निभाएगी। वहीं दूसरी बहन पारुल मंथरा का किरदार निभाएगी। उन्हाेंने बताया कि मैं कंप्यूटर सीख रही हूं, इसके अलावा बच्चों को भी पढ़ाती हूं। हम तीनों रामलीला मंचन के लिए रविवार को सात घंटे और प्रतिदिन घर पर दो घंटे अभ्यास करते हैं। दामिनी ने बताया कि सबसे पहले मैं जिगर मंच पर डांस के लिए ऑडीशन देने गई थी। यहीं पर संस्था के सचिव प्रदीप शर्मा से परिचय हुआ। उन्होंने ही रामलीला से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। माता-पिता को पहली बार हमें मंचन के लिए भेजते हुए डर लग रहा था, लेकिन जब हमारा अनुभव अच्छा रहा तो उन्होंने हमें बहुत प्रोत्साहित किया। गांव से पहले शहर जाकर पढ़ना और अब दिल्ली में अभिनय करना एक सपने के सच होने जैसा है। रामलीला के माध्यम से हमें अपने धर्म और संस्कारों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
विज्ञापन
विज्ञापन
मुरादाबाद की श्रीराम मानस मंच समिति से जुड़े नजीमाबाद निवासी वीरेंद्र कुमार शर्मा (बंटी) और बबली शर्मा रामलीला में बाली-तारा का किरदार निभाते हैं। वीरेंद्र ने बताया कि मैं 30 वर्षों से रामलीला से जुड़ा हूं। पहले मेरे पिताजी स्व. हरीनिवास शर्मा रामलीला का मंचन करते थे। तब से ही मेरी आस्था जुड़ी है। जब मेरी शादी हो गई तो पत्नी बबली शर्मा भी मंचन से जुड़ गईं। बाद में मेरी बेटी पूजा ने भी माता सीता का छह वर्ष तक किरदार निभाया। उन्होंने कहा कि मैं अब तक रामलीला में ब्रह्मा, जावंत, भरत और शत्रुघ्न का किरदार निभा चुका हूं, जबकि बबली ने माता सीता, कौशल्या का किरदार निभाया है। अब वह तारा के अलावा सुलोचना का किरदार भी निभाती हैं। उन्होंने कहा कि मंचन के एक महीने पहले से ही प्रतिदिन दो घंटे रिहर्सल करते हैं। रामायण से हमें आपसी प्रेम और मर्यादा में रहने की सीख मिलती है।
विज्ञापन
तीनों बहनें रामलीला से हैं जुड़ी
आदर्श कला संगम संस्थ से जुड़ीं और गांव मछरिया निवासी दामिनी ठाकुर ने बताया कि वह करीब आठ वर्ष से रामलीला मंचन से जुड़ी हुई हैं। उन्होंने बताया कि मैं कैकेयी, मंदोदरी और सूर्पणखा का किरदार निभाती हूं, जबकि मेरी बहन आंचल माता सीता का किरदार निभाएगी। वहीं दूसरी बहन पारुल मंथरा का किरदार निभाएगी। उन्हाेंने बताया कि मैं कंप्यूटर सीख रही हूं, इसके अलावा बच्चों को भी पढ़ाती हूं। हम तीनों रामलीला मंचन के लिए रविवार को सात घंटे और प्रतिदिन घर पर दो घंटे अभ्यास करते हैं। दामिनी ने बताया कि सबसे पहले मैं जिगर मंच पर डांस के लिए ऑडीशन देने गई थी। यहीं पर संस्था के सचिव प्रदीप शर्मा से परिचय हुआ। उन्होंने ही रामलीला से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। माता-पिता को पहली बार हमें मंचन के लिए भेजते हुए डर लग रहा था, लेकिन जब हमारा अनुभव अच्छा रहा तो उन्होंने हमें बहुत प्रोत्साहित किया। गांव से पहले शहर जाकर पढ़ना और अब दिल्ली में अभिनय करना एक सपने के सच होने जैसा है। रामलीला के माध्यम से हमें अपने धर्म और संस्कारों से जुड़ने का अवसर मिलता है।
विज्ञापन