रामपुर नवाब की नवासी ने उठाया सवाल, कहा- देखरेख के अभाव में हुई बर्बाद हो गई 706 करोड़ की संपत्ति
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आपत्ति में उन्होंने कहा है कि नवाब रजा अली खां की 706 करोड़ रुपये की संपत्ति देखरेख के अभाव में बर्बाद हो गई है, जिसके वो लोग जिम्मेदार हैं जो संपत्ति पर काबिज हैं, लिहाजा उनके हिस्से से इस राशि की कटौती की जाए।
रामपुर के आखिरी नवाब रजा अली खां की संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर चल रही है। सुप्रीम कोर्ट ने इस प्रक्रिया को कराने की जिम्मेदारी जिला जज की कोर्ट को सौंपी है। कोर्ट के आदेश पर संपत्ति के मूल्यांकन के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त किए गए थे। इसके बाद नवाब की चल और अचल संपत्ति का मूल्यांकन किया गया, जिसकी कुल कीमत लगभग 26.50 अरब रुपये लगाई गई है।
नवाब की संपत्ति के मूल्यांकन की रिपोर्ट कोर्ट में दाखिल होने के बाद सोमवार को इस मामले में जिला जज के कोर्ट में सुनवाई थी। सोमवार को नवाब की संपत्ति की एक पक्षकार तलत फातिमा हसन और अन्य की ओर से अधिवक्ता हर्ष गुप्ता ने आपत्ति लगाई।
आपत्ति में उन्होंने कहा है कि नवाब की अचल संपत्ति में शामिल कोठी खासबाग की बिल्डिंग की कीमत 17.91 करोड़ लगाई गई है। यह बिल्डिंग देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो गई है, अगर इसकी देखभाल की गई होती तो बिल्डिंग की कीमत 100 करोड़ रुपये होती।
इसी तरह से ऐवान-ए-रफत की 5.95 करोड़ कीमत लगाई गई है। इसकी भी देखभाल की गई होती इसकी कीमत 100 करोड़ रुपये होती। साथ ही कहा गया है कि 49.335 एकड़ जमीन गायब है। इसी तरह से शाहबाद कोठी की 1.342 एकड़ जमीन भी कम मिली है।
आपत्ति रिपोर्ट में नवाब की पांचों अचल संपत्तियों और चल संपत्ति का जिक्र किया गया है। साथ नवाब की जमीन पर खेती और फलदार वृक्षों से होने वाली आमदनी का भी उल्लेख किया गया है।
चल संपत्ति की बर्बादी के लिए भी काबिज लोगों को जिम्मेदार ठहराया
नवाब की संपत्ति में हिस्सेदार तलत फातिमा हसन की ओर से चल संपत्ति की बर्बादी के लिए उन पर काबिज को जिम्मेदार बताया गया है। उनके अधिवक्ता की ओर से जिला न्यायालय में लगाई गई आपत्ति में कहा गया है कि चल संपत्ति की कीमत 64.21 करोड़ लगाई गई है। चल संपत्ति पूरी तरह से स्क्रैप में तब्दील हो चुकी है। इसकी कीमत में जो अंतर है उसकी वसूली उन लोगों से की जाए, जिनके कब्जे में है संपत्ति है।
नवाब की संपत्ति की मूल्यांकन रिपोर्ट पर तलत फातिमा हसन और अन्य की ओर से आपत्ति लगा दी गई है। सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि संपत्ति के खुर्दबुर्द होने या गायब होने की स्थिति वो लोग ही जिम्मेदार होंगे जो इस पर काबिज थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुसार ही जिला न्यायालय में आपत्ति दाखिल की गई है।
-हर्ष गुप्ता, अधिवक्ता
मूल्यांकन रिपोर्ट में जमीन शामिल करने पर जताई आपत्ति
नवाब की संपत्ति की मूल्यांकन रिपोर्ट पर हिस्सेदारों के अलावा एक आपत्ति जमीलुद्दीन की ओर से भी लगाई गई है। जिला न्यायालय में दायर आपत्ति में उन्होंने कहा है कि खासबाग में सम्मलित 0.0248 हेक्टेयर जमीन नवाब रजा अली खां ने उनके पिता शमशुद्दीन को पंजीकृत हस्तांतरण विलेख के माध्यम से हस्तांतरित कर दी थी।
15 फरवरी 1949 को यह विलेख उप निबंधक सदर कार्यालय में पंजीकृत है। उन्होंने इस जमीन पर तभी से अपना अधिकार बताते हुए मूल्यांकन रिपोर्ट में इसे खासबाग की संपत्ति में शामिल किए जाने पर आपत्ति जताई है। उन्होंने मांग की है कि पक्षकारों में बंटवारे हेतु बनाए जाने वाली विभाजन योजना से इस जमीन को बाहर रखा जाए।