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स्टेशनों के साथ नामचीन ब्रांड्स का नाम जोड़कर मुनाफा कमाएगा रेलवे
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लाखों लोगों के रोजाना आवागमन को अब रेलवे किराये के अलावा एक अन्य माध्यम से भी अपनी आय का साधन बनाएगा। देश-विदेश की नामचीन कंपनियों के साथ इसके लिए करार किया जाएगा। जिस तरह पिछले कई वर्षों से एक मोबाइल कंपनी का नाम आईपीएल (इंडियन प्रीमियर लीग) के साथ जोड़ा जा रहा है। उसी प्रकार कंपनियां रेलवे स्टेशनों के नाम के साथ अपना नाम या लोगो प्रयोग कर सकेंगी। इस ब्रांडिंग के बदले रेलवे कंपनियों से अच्छा मुनाफा कमाएगा।
वहीं इस को-ब्रांडिंग पालिसी के बीच रेलवे के मूल नियमों का पालन करना जरूरी होगा। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि टिकटों, पीआरएस (पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम), नेशनल रेलवे इंक्वायरी सिस्टम (एनटीईएस) और अनाउंसमेंट में कहीं भी रेलवे स्टेशन के साथ ब्रांड का नाम नहीं लिया जाएगा। साथ ही किसी तंबाकू उत्पाद, अल्कोहल या असामाजिक उत्पाद का विज्ञापन नहीं हो सकेगा। कंपनी का नाम दो शब्दों से अधिक में नहीं लिखा जा सकेगा। ज्यादा शब्द होने पर सिर्फ कंपनी का लोगो ही प्रयोग किया जाएगा। कंपनियां कम से कम एक साल और अधिक से अधिक तीन साल के लिए रेलवे के साथ करार कर सकेंगी। रेलवे बोर्ड ने तीन मार्च को ही इस संबंध में पत्र जारी कर सभी जोनल मुख्यालयों और मंडल मुख्यालयों को सूचित किया है। अब रेल मंडलों की व्यापार विकास इकाइयों ने इस पर कार्य शुरू कर दिया है और ब्रांड्स से विज्ञापन तलाश किए जा रहे हैं। सीनियर डीसीएम सुधीर सिंह ने बताया कि इस पॉलिसी के तहत रेलवे को राजस्व में अच्छा लाभ होगा, जिसे यात्री सुविधाओं को विकसित करने में लगाया जा सकता है।
बड़े स्टेशनों या मंडल मुख्यालयों के साथ नाम जोड़ने पर कंपनी को अधिक रकम चुकानी पड़ेगी। जबकि छोटे स्टेशनों या हॉल्ट के साथ नाम जोड़ने पर कम रुपये देने होंगे। रेलवे यात्रियों के आवागमन के हिसाब से सभी स्टेशनों के साथ ब्रांडिंग के लिए दरों का निर्धारण कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक स्टेशनों के साथ कंपनियों की ब्रांडिंग से मुनाफा कमाने की यह सोच रेलवे के वाणिज्य विभाग के एक आला अधिकारी की है, हालांकि उनका नाम स्पष्ट नहीं किया गया है। संवाद
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वहीं इस को-ब्रांडिंग पालिसी के बीच रेलवे के मूल नियमों का पालन करना जरूरी होगा। रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि टिकटों, पीआरएस (पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम), नेशनल रेलवे इंक्वायरी सिस्टम (एनटीईएस) और अनाउंसमेंट में कहीं भी रेलवे स्टेशन के साथ ब्रांड का नाम नहीं लिया जाएगा। साथ ही किसी तंबाकू उत्पाद, अल्कोहल या असामाजिक उत्पाद का विज्ञापन नहीं हो सकेगा। कंपनी का नाम दो शब्दों से अधिक में नहीं लिखा जा सकेगा। ज्यादा शब्द होने पर सिर्फ कंपनी का लोगो ही प्रयोग किया जाएगा। कंपनियां कम से कम एक साल और अधिक से अधिक तीन साल के लिए रेलवे के साथ करार कर सकेंगी। रेलवे बोर्ड ने तीन मार्च को ही इस संबंध में पत्र जारी कर सभी जोनल मुख्यालयों और मंडल मुख्यालयों को सूचित किया है। अब रेल मंडलों की व्यापार विकास इकाइयों ने इस पर कार्य शुरू कर दिया है और ब्रांड्स से विज्ञापन तलाश किए जा रहे हैं। सीनियर डीसीएम सुधीर सिंह ने बताया कि इस पॉलिसी के तहत रेलवे को राजस्व में अच्छा लाभ होगा, जिसे यात्री सुविधाओं को विकसित करने में लगाया जा सकता है।
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बड़े स्टेशनों या मंडल मुख्यालयों के साथ नाम जोड़ने पर कंपनी को अधिक रकम चुकानी पड़ेगी। जबकि छोटे स्टेशनों या हॉल्ट के साथ नाम जोड़ने पर कम रुपये देने होंगे। रेलवे यात्रियों के आवागमन के हिसाब से सभी स्टेशनों के साथ ब्रांडिंग के लिए दरों का निर्धारण कर रहा है। सूत्रों के मुताबिक स्टेशनों के साथ कंपनियों की ब्रांडिंग से मुनाफा कमाने की यह सोच रेलवे के वाणिज्य विभाग के एक आला अधिकारी की है, हालांकि उनका नाम स्पष्ट नहीं किया गया है। संवाद
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