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पीवी संधू की जीत से स्थानीय खिलाड़ियों में जीत
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मुरादाबाद। जैसे ही पीवी सिंधू ने वर्ल्ड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतकर तिरंगा फहराया, स्थानीय खिलाड़ियों में खुशी की लहर दौड़ गई। एक-दूसरे को फोन कर बधाई संदेश देने शुरू हो गए। खिलाड़ियों ने कहा कि इस जीत के लिए सभी बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। हर भारतीय की तरह खिलाड़ियों के लिए यह गौरवान्वित करने वाला पल है। खिलाड़ियों ने कहा कि सिंधू से आक्रामकता बरकरार रखने की सीख मिली है।
क्या कहते हैं खिलाड़ी
अपने से ऊपर की रैंक की खिलाड़ी को हराना जीत की ललक पैदा करता है। आखिरी पांच मिनट का मैच देखा था। इंटरनेट की समस्या होने की वजह से पूरा मैच नहीं देख पाई थी। नोजोमी आकुहारा की वजह से ही वह इस खिताब से दूर हो जाती थीं, लेकिन आज बदला लेकर झूमने का मौका दिया है। उन्होंने दिखा दिया कि कठिन मेहनत के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा रहा है। मुझे भी अपने खेल को सुधारने की प्रेरणा मिली है।
सिमरन चौधरी, खिलाड़ी।
पूरा मैच देखा है। चैंपियनशिप का खिताब मिलना बहुत बड़ी बात है। ईमानदारी से मेहनत जब करते हैं तो एक समय पर आकर फल मिलने लगता हैं। संधू एकाग्रता के साथ खेल जीतने के लिए खेलती हैं। सभी उनसे सीखते हैं। आसाम में हुई सीनियर प्रतियोगिता के तीसरे चरण में हार गए थे। अब खेल को सुधारना ही लक्ष्य है।
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राधिका रस्तोगी, खिलाड़ी।
मैंने टीवी पर मैच देखा है। मैं भी इसी तरह देश के लिए खेलना चाहता हूं। इस वर्ष यूपी स्टेट स्कूल बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में हार गया था। अंडर 10 में जिला स्तर पर गत चार वर्ष तक जीता हूं। अब प्रदेश और राष्ट्र स्तर पर इसी जीत को बरकरार रखने का सपना है।
आर्यन भट्ट, खिलाड़ी।
पीवी सिंधू ने रिकॉर्ड बनाया है। विजेता खिलाड़ियों के शिड्यूल और मेहनत को स्थानीय खिलाड़ियों से फॉलो कराने का प्रयास किया जाता है। पदक जीतने का कोई अंत नहीं है। लक्ष्य हमेशा तैयार रहते हैं। मन में हमेशा सकारात्मक विचार रखना ही खिलाड़ी की पहचान है। उपलब्धि पर समाज और सरकार साथ है, लेकिन शुरुआत खिलाड़ियों को ही करनी है।
सतीश शर्मा, सचिव, जिला बैडमिंटन ऐसोसिएशन।
प्रदेश स्तर पर मुरादाबाद से बालिका वर्ग में एकल में सिमरन चौधरी और बालक वर्ग के युगल में सुमंत मारवाह और राहुल उपाध्याय ने जीत हासिल की थी। इसके बाद ही खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाते हैं। यही कदम हैं, जिन पर सफलता निर्भर है। उम्मीद है कि आगामी यह कदम भी आसानी से चलकर बैडमिंटन के फलक पर नाम रोशन करेंगे।
अनिमेष सक्सेना, क्रीड़ा अधिकारी।
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क्या कहते हैं खिलाड़ी
अपने से ऊपर की रैंक की खिलाड़ी को हराना जीत की ललक पैदा करता है। आखिरी पांच मिनट का मैच देखा था। इंटरनेट की समस्या होने की वजह से पूरा मैच नहीं देख पाई थी। नोजोमी आकुहारा की वजह से ही वह इस खिताब से दूर हो जाती थीं, लेकिन आज बदला लेकर झूमने का मौका दिया है। उन्होंने दिखा दिया कि कठिन मेहनत के बल पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा रहा है। मुझे भी अपने खेल को सुधारने की प्रेरणा मिली है।
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सिमरन चौधरी, खिलाड़ी।
पूरा मैच देखा है। चैंपियनशिप का खिताब मिलना बहुत बड़ी बात है। ईमानदारी से मेहनत जब करते हैं तो एक समय पर आकर फल मिलने लगता हैं। संधू एकाग्रता के साथ खेल जीतने के लिए खेलती हैं। सभी उनसे सीखते हैं। आसाम में हुई सीनियर प्रतियोगिता के तीसरे चरण में हार गए थे। अब खेल को सुधारना ही लक्ष्य है।
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राधिका रस्तोगी, खिलाड़ी।
मैंने टीवी पर मैच देखा है। मैं भी इसी तरह देश के लिए खेलना चाहता हूं। इस वर्ष यूपी स्टेट स्कूल बैडमिंटन टूर्नामेंट के फाइनल में हार गया था। अंडर 10 में जिला स्तर पर गत चार वर्ष तक जीता हूं। अब प्रदेश और राष्ट्र स्तर पर इसी जीत को बरकरार रखने का सपना है।
आर्यन भट्ट, खिलाड़ी।
पीवी सिंधू ने रिकॉर्ड बनाया है। विजेता खिलाड़ियों के शिड्यूल और मेहनत को स्थानीय खिलाड़ियों से फॉलो कराने का प्रयास किया जाता है। पदक जीतने का कोई अंत नहीं है। लक्ष्य हमेशा तैयार रहते हैं। मन में हमेशा सकारात्मक विचार रखना ही खिलाड़ी की पहचान है। उपलब्धि पर समाज और सरकार साथ है, लेकिन शुरुआत खिलाड़ियों को ही करनी है।
सतीश शर्मा, सचिव, जिला बैडमिंटन ऐसोसिएशन।
प्रदेश स्तर पर मुरादाबाद से बालिका वर्ग में एकल में सिमरन चौधरी और बालक वर्ग के युगल में सुमंत मारवाह और राहुल उपाध्याय ने जीत हासिल की थी। इसके बाद ही खिलाड़ी राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जाते हैं। यही कदम हैं, जिन पर सफलता निर्भर है। उम्मीद है कि आगामी यह कदम भी आसानी से चलकर बैडमिंटन के फलक पर नाम रोशन करेंगे।
अनिमेष सक्सेना, क्रीड़ा अधिकारी।