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बड़ी ठसक से अमर सिंह ताउम्र निभाते रहे आजम से सियासी दुश्मनी

Sun, 02 Aug 2020 02:59 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर Published by: मुरादाबाद ब्यूरो Updated Sun, 02 Aug 2020 02:59 AM IST
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Amar Singh and Azam political enmity
आजम खां व अमर सिंह - फोटो : amar ujala

नवाबों की नगरी रामपुर दो सियासी दिग्गजों अमर सिंह और आजम खां की अदावत का अखाड़ा बनी थी। ये दुश्मनी अमर सिंह बड़ी ठसक के साथ ताउम्र निभाते रहे। उनकी सियासी दुश्मनी की दिलचस्प बात यह थी कि दोनों एक ही पार्टी के शीर्षस्थ नेताओं में शुमार होते थे । दोनों की गिनती सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह के खास सिपहसालारों में होती थी। दोनों एक दूसरे के खिलाफ तंज और तल्ख लफ्जों के तीर चलाने से बाज नहीं आते थे। दोनों एक-दूसरे को शिकस्त देने का मौका हाथ से नहीं जाने देते थे। जब पार्टी में अमर सिंह की चली तो आजम खां को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। जब आजम की वापसी हुई तो अमर को जयाप्रदा के साथ बाहर का रास्ता दिखाया गया।

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अमर सिंह की रामपुर की राजनीति में एंट्री उस वक्त हुई थी जब 2004 के लोकसभा चुनाव में जयाप्रदा को सपा ने रामपुर से टिकट दिया था। बताया गया कि खुद अमर सिंह ने मुलायम के साथ मिलकर जयाप्रदा को रामपुर से टिकट दिलवाया था। रामपुर की सियासत में आजम की तूती बोलती थी। जया प्रदा यह चुनाव आसानी से जीत गई थीं। लेकिन, कुछ दिनों के बाद जया प्रदा की आजम खां के साथ खटक गई थी। तब अमर सिंह ने जयाप्रदा का खुलकर साथ दिया। इसके बाद आजम के साथ उनके रिश्ते तल्ख होते गए। एक-दूसरे के खिलाफ बयानबाजी शुरू हो गई। 2009 के लोकसभा चुनाव में आजम नहीं चाहते थे कि जयाप्रदा को सपा रामपुर से टिकट मिले।
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लेकिन, अमर सिंह ने अपनी रसूख का इस्तेमाल कर उनको पार्टी का उम्मीदवार घोषित कर दिया। तब आजम खां ने खुलकर जयाप्रदा का विरोध करना शुरू दिया। अमर सिंह ने भी अपना पूरा जोर लगा दिया और जयाप्रदा चुनाव जीत गईं। इस बीच सपा के शीर्ष नेतृत्व से भी आजम की खटक गई और उन्हें पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा दिया गया। लेकिन वनवास ज्यादा नहीं चला। कुछ ही महीने बाद आजम की पार्टी में वापसी हो गई। इसके बाद अमर सिंह और जयाप्रदा को बाहर का रास्ता दिखा गया। इसके बाद दोनों के बीच लगातार शब्दों के बाण चलते रहे। कुछ साल पहले जब अमर सिंह ने मुलायम सिंह यादव के साथ दोबारा से नजदीकियां बढ़ानी शुरू कर दी थी तो अंदरखाने आजम खां ने इसका विरोध भी किया था।
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आजम पर बेटियों को तेजाब से नहलाने की धमकी का भी आरोप लगाया था
दोनों के बीच तल्खियां उस वक्त और बढ़ गई जब 2018 में आजम खां के साक्षात्कार को लेकर अमर सिंह ने कहा कि आजम उनकी बेटियों को तेजाब से नहलाने की बात कह रहे हैं। हालांकि आजम खां ने सफाई भी दी थी कि उन्होंने ऐसी कोई बात नहीं कही है। इसके बाद अमर सिंह यह कहते हुए रामपुर आए थे कि वह रामपुर जा रहे हैं चाहे तो आजम खां उनकी बलि ले लें, लेकिन उनकी बेटियों को छोड़ दें।

अमर सिंह रामपुर आए थे। उनकी प्रेस कांफ्रेंस में हंगामा हो गया। अमर सिंह आखिर बार रामपुर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा की प्रत्याशी जयाप्रदा का चुनाव प्रचार करने आए थे। इस दौरान भी अमर सिंह के निशाने पर आजम खां रहे, क्योंकि उस वक्त आजम खां जयाप्रदा को लेकर एक विवादित बयान दिया था।


अमर सिंह ने आजम खां के खिलाफ मुकदमा भी दर्ज करवाया था
रामपुर। राज्यसभा सदस्य अमर सिंह ने आजम खां पर आरोप लगाया था कि उन्होंने उनकी बेटियों पर तेजाब फेंकने की धमकी दी है। इस आरोप में उन्होंने लखनऊ के गोमती नगर थाने में आजम खां के खिलाफ रिपोर्ट भी दर्ज कराई थी। हालांकि रिपोर्ट दर्ज होने के बाद भी लखनऊ पुलिस ने उसकी विवेचना नहीं की थी, बाद यह विवेचना रामपुर स्थानांतरित कर दी गई थी। रामपुर के अजीमनगर थाना की पुलिस इस मुकदमे की विवेचना कर रही है।

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