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Dushyant Kumar: जिगर का साथ मिला तो कवि दुष्यंत की गजलों पर आई थी रवानी, 1957 में मुरादाबाद से किया था बीएड

Fri, 01 Sep 2023 08:25 AM IST
आकाश दुबे शिवम वर्मा, अमर उजाला, मुरादाबाद
शिवम वर्मा, अमर उजाला, मुरादाबाद Published by: आकाश दुबे Updated Fri, 01 Sep 2023 08:25 AM IST
सार

महान कवि दुष्यंत कुमार की यादें मुरादाबाद के चौमुखा पुल इलाके में आज भी जीवंत हैं। दुष्यंत ने यहां रेती मोहल्ले में अपने मामा के यहां रहकर हिंदू कॉलेज से बीएड (उस समय बीटी) किया था।

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Poet Dushyant Kumar did B Ed from Moradabad in 1957 and here Jigar met Moradabadi
कवि दुष्यंत कुमार - फोटो : Social Media

विस्तार

हिंदी गजल को नए आयाम पर ले जाने वाले कवि दुष्यंत कुमार का मुरादाबाद से गहरा नाता रहा है। तू किसी रेल सी गुजरती है, मैं किसी पुल सा थरथराता हूं जैसी पंक्तियां कहने वाले इस महान कवि की यादें मुरादाबाद के चौमुखा पुल इलाके में आज भी जीवंत हैं। दुष्यंत ने यहां रेती मोहल्ले में अपने मामा के यहां रहकर हिंदू कॉलेज से बीएड (उस समय बीटी) किया था।

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इतना ही नहीं बल्कि गजल के महान हस्ताक्षर रहे जिगर मुरादाबादी से मिलने के बाद उनकी गजलों पर रवानी आई। दुष्यंत के बेटे आलोक त्यागी का कहना है कि 1957 तक उनके पिता स्थापित कवि के रूप में पहचाने जाने लगे थे। उन दिनों गजल पर उन्होंने बहुत काम नहीं किया था लेकिन मुरादाबाद में रहने और जिगर मुरादाबादी से मिलने के बाद उन्होंने गजलें ही लिखीं। यहीं से उनकी गजलों को पहचान मिली। इतना ही नहीं उनके द्वारा लिखित दो उपन्यास भी मुरादाबाद प्रवास के दौरान जन्में विचारों की देन है।

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हिंदू कॉलेज के जंतु विज्ञान विभाग के सेवानिवृत्त प्रोफेसर और दुष्यंत के ममेरे भाई डॉ. वीके त्यागी यह तथ्य बताते हैं। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से एमए करने के बाद 1957-58 में उन्हीं के घर रहकर दुष्यंत ने अपनी रचनाधर्मिता को रफ्तार दी थी। रेती मोहल्ले के प्राचीन मंदिर परिसर में वह पीपल का पेड़ आज भी है, जिससे उन्हें अपने उपन्यास का शीर्षक आंगन का एक वृक्ष मिला था।

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बीएड करने का बाद किरतपुर में पढ़ाया भी
आलोक त्यागी ने बताया कि एमए करने के बाद दुष्यंत को लगा कि वह अच्छे शिक्षक बन सकते हैं। इसके लिए उन्होंने मुरादाबाद के हिंदू कॉलेज से बीएड किया। इसके बाद किरतपुर के एक विद्यालय में बतौर शिक्षक काम किया। यहां से उन्हें एक दूसरे उपन्यास छोटे छोटे सवाल का विचार आया और उन्होंने इस मूर्त रूप दिया। चंदौसी के एसएम कॉलेज से इंटर की पढ़ाई के दौरान विख्यात कवि रामावतार त्यागी उनके सीनियर थे। जबकि डॉ. कुंवर बेचैन उनके जूनियर थे। इतना ही नहीं मुरादाबाद के बड़े मंचों पर दुष्यंत ने कई बार कविताएं और गजलें पढ़ी थीं।

भोपाल जाने के बाद नहीं लौटे दुष्यंत
डॉ. वीके त्यागी बताते हैं कि चाचा (दुष्यंत कुमार) को बीएड करने के कुछ समय बाद भोपाल में रेडियो स्टेशन पर डिप्टी डायरेक्टर के पद पर नौकरी मिल गई। वहां जाने के बाद वह फिर मुरादाबाद नहीं लौटे। एक बार चाची (दुष्यंत कुमार की पत्नी) राजेश्वरी देवी मुरादाबाद आई थीं। इसके वर्षों बाद उनका बेटा आलोक 27 जुलाई 2023 को एक साहित्यिक कार्यक्रम में मुरादाबाद आए थे। तब वह घर होकर गए थे और फिर आने का वादा कर गए हैं।

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