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Moradabad News: पीतल के कलश पर उकेरी पीएम की मां की तस्वीर... मिली शाबाशी
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मुरादाबाद। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित ग्रामीण भारत महोत्सव में पीतल के कलश पर उकेरी गई अपनी मां हीराबेन का चित्र देखकर आश्चर्यचकित हो गए। उन्होंने चित्र उकेरने वाले शिल्पगुरु इकराम हुसैन से पांच मिनट तक बातचीत की। उनके हुनर की सराहना करते हुए पीठ थपथपाई। प्रधानमंत्री से मिली शाबासी से शिल्पगुरु और उनके परिजन बेहद उत्साहित हैं।
पीरजादा रोजेवाली जियारत चौक के रहने वाले इकराम हुसैन ने बताया कि दो जनवरी को नई दिल्ली में ग्रामीण भारत महोत्सव में भाग लेने गए थे। वहां हस्तशिल्प की 180 दुकानें लगी थीं। चार जनवरी की सुबह 11 बजे वह अपने भाई मो. इस्लाम के साथ कलश पर कारीगरी का डेमो दे रहे थे। तभी प्रधानमंत्री मोदी उनके स्टाॅल पर आ गए। शिल्पगुरु द्वारा कलश पर राम दरबार, रामलला के चित्र के अलावा पीएम के साथ उनकी मां हीराबेन का चित्र उकेरा जा रहा था।
पीएम अपनी मां का चित्र देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने इकराम से पूछा कि कितने समय से इस पर नक्काशी कर रहे हैं तो शिल्पगुरु ने बताया कि तीन साल से बना रहे हैं और जल्द ही यह पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने मटकों की बिक्री को लेकर पूछा तो शिल्पगुरु ने कहा कि ऑर्डर पर सामान बनाते हैं। यह भी बताया कि वह आठ साल की उम्र से ही कारीगरी कर रहे हैं। अंत में प्रधानमंत्री उनकी पीठ थपथपाकर चले गए।
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पीरजादा रोजेवाली जियारत चौक के रहने वाले इकराम हुसैन ने बताया कि दो जनवरी को नई दिल्ली में ग्रामीण भारत महोत्सव में भाग लेने गए थे। वहां हस्तशिल्प की 180 दुकानें लगी थीं। चार जनवरी की सुबह 11 बजे वह अपने भाई मो. इस्लाम के साथ कलश पर कारीगरी का डेमो दे रहे थे। तभी प्रधानमंत्री मोदी उनके स्टाॅल पर आ गए। शिल्पगुरु द्वारा कलश पर राम दरबार, रामलला के चित्र के अलावा पीएम के साथ उनकी मां हीराबेन का चित्र उकेरा जा रहा था।
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पीएम अपनी मां का चित्र देखकर बहुत खुश हुए। उन्होंने इकराम से पूछा कि कितने समय से इस पर नक्काशी कर रहे हैं तो शिल्पगुरु ने बताया कि तीन साल से बना रहे हैं और जल्द ही यह पूरी तरह से तैयार हो जाएगा। प्रधानमंत्री ने मटकों की बिक्री को लेकर पूछा तो शिल्पगुरु ने कहा कि ऑर्डर पर सामान बनाते हैं। यह भी बताया कि वह आठ साल की उम्र से ही कारीगरी कर रहे हैं। अंत में प्रधानमंत्री उनकी पीठ थपथपाकर चले गए।
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