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एक्सक्लूसिव : स्वर्ग में भी पहुंच रही पीएम किसान सम्मान निधि
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मुरादाबाद। जिले में स्वर्गवासी हो चुके 1444 किसानों को सम्मान निधि भेजी जा रही थी। यह खुलासा शासन के निर्देश पर कृषि विभाग की टीमों द्वारा दो साल के कुल 35060 लाभार्थियों की पात्रता के सत्यापन में हुआ है। अब कृषि विभाग ने इन किसानों की सम्मान निधि पर रोक लगा दी है। किसानों को भेजी गई धनराशि की रिकवरी के लिए कृषि विभाग ने प्रयास भी शुरू कर दिए गए हैं। बैंक खातों में पड़ी ऐसे किसानों की धनराशि को भी वापस मंगाया जाएगा। चालू सत्र के 132 किसानों की जांच अभी पूरी होना बाकी है।
सरकार ने वर्ष 2020-21 में प्रधानमंत्री सम्मान निधि का लाभ लेने वाले 5 प्रतिशत किसानों का मौके पर जाकर उनकी पात्रता का सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के 10 प्रतिशत लाभार्थियों का सत्यापन कराने को कहा गया था। इसके लिए शासन से ही रेंडम आधार पर किसानों की सूची भी भेजी गई थी। 2020-21 के लिए 12048 और चालू वित्तीय सत्र के लिए 23012 किसानों के नाम आए थे।
कृषि विभाग की टीमों नेगांवों में जाकर सत्यापन किया तो चौंकाने वाली जानकारी मिली। दोनों वित्तीय सत्र में कुल मिलाकर 1444 किसान ऐसे मिले जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। कुछ अन्य वजहों से अपात्र हैं। इनमें 2020-21 के 541 और 2021-22 के 903 किसान दिवंगत हो चुके हैं। जांच टीमों ने इन किसानों को अपात्र की श्रेणी में डालते हुए रिपोर्ट भेज दी है।
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बताया गया कि इनमें से किसी को साल दो तो किसी को तीन से चार किस्तें तक जा चुकी हैं। हालांकि कृषि विभाग का पूरा रिकॉर्ड तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल विभाग ने जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर इन किसानों की किसान सम्मान निधि पर रोक लगा दी है। आगे से उन्हें सम्मान निधि नहीं भेजी जाएगी।
इस चूक की वजह से भी गड़बड़ी संभव
दरअसल पीएम किसान सम्मान निधि में एक बार सम्मान निधि शुरू होने के बाद आगे खुद ही किस्तें उनके खातों में आती रहती हैं। शासन द्वारा रेंडम सत्यापन में ही लाभार्थियों की जांच होती है। इसी जांच में मृतक और अपात्रों का पता चलता है। ऐसे में जिनका सत्यापन हो गया वे तो पकड़ में आ गए। लेकिन जो लोग सत्यापन की जद में नहीं आए और यदि उनमें से किसी की मृत्यु हो गई और उसके परिजनों द्वारा भी सूचना नहीं दी गई तो ऐसे लोगों की सम्मान निधि जारी रहती है। इसलिए सरकारी तंत्र को इस व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
ये हो सकता है
बैंक, कोषागार से पेंशन लेने वाले पेंशनर्स को हर साल बैंक जाकर अपने जीवित होने का प्रमाण देना होता है। इसके लिए लाभार्थी खुद बैंक जाते हैं और अपना जीवन प्रमाणपत्र प्रस्तुत करते हैं। इसी तरह पीएम सम्मान निधि में भी ये व्यवस्था लागू हो सकती है। ऐसे में गड़बड़ी की संभावना भी कम होगी।
वर्ष 2020-21 के लाभार्थियों की सत्यापन रिपोर्ट
कुल लाभार्थी जिनकी जांच हुई - 12048
मृतक (अपात्र) 541
सही मिले 11507
--
वर्ष 2021-22 के लाभार्थियों की सत्यापन रिपोर्ट
कुल लाभार्थी जिनका सत्यापन हुआ -23012
मृतक (अपात्र) - 903
सही मिले 22880
जांच चल रही 132
जांच में मृतक या अपात्र मिले किसानों की सम्मान निधि को तत्काल रोक दिया गया है। मृतक और अपात्र मिले किसानों को उनकी मृत्यु के बाद जितनी भी किस्त गई हैं, उसका पता लगाकर रिकवरी की जाएगी। वैैसे मृतक किसान के परिजन किसान की मृत्यु के बाद बैंक को सूचना दे देते हैं और बैंक उनके खाते में लेन-देन बंद कर देते हैं। उसमें आई धनराशि को विभाग को वापस लौटा दिया जाता है। तहसील रिकॉर्ड में भी वारिसान दाखिल खारिज के दौरान इसका पता चल जाता है और उसकी सम्मान निधि की किस्तें रोक दी जाती हैं ।
- सीएल यादव, उप कृषि निदेशक
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सरकार ने वर्ष 2020-21 में प्रधानमंत्री सम्मान निधि का लाभ लेने वाले 5 प्रतिशत किसानों का मौके पर जाकर उनकी पात्रता का सत्यापन कराने के निर्देश दिए थे। वहीं, चालू वित्तीय वर्ष 2021-22 के 10 प्रतिशत लाभार्थियों का सत्यापन कराने को कहा गया था। इसके लिए शासन से ही रेंडम आधार पर किसानों की सूची भी भेजी गई थी। 2020-21 के लिए 12048 और चालू वित्तीय सत्र के लिए 23012 किसानों के नाम आए थे।
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कृषि विभाग की टीमों नेगांवों में जाकर सत्यापन किया तो चौंकाने वाली जानकारी मिली। दोनों वित्तीय सत्र में कुल मिलाकर 1444 किसान ऐसे मिले जिनकी मृत्यु हो चुकी थी। कुछ अन्य वजहों से अपात्र हैं। इनमें 2020-21 के 541 और 2021-22 के 903 किसान दिवंगत हो चुके हैं। जांच टीमों ने इन किसानों को अपात्र की श्रेणी में डालते हुए रिपोर्ट भेज दी है।
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बताया गया कि इनमें से किसी को साल दो तो किसी को तीन से चार किस्तें तक जा चुकी हैं। हालांकि कृषि विभाग का पूरा रिकॉर्ड तैयार होने के बाद ही स्पष्ट होगा। फिलहाल विभाग ने जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर इन किसानों की किसान सम्मान निधि पर रोक लगा दी है। आगे से उन्हें सम्मान निधि नहीं भेजी जाएगी।
इस चूक की वजह से भी गड़बड़ी संभव
दरअसल पीएम किसान सम्मान निधि में एक बार सम्मान निधि शुरू होने के बाद आगे खुद ही किस्तें उनके खातों में आती रहती हैं। शासन द्वारा रेंडम सत्यापन में ही लाभार्थियों की जांच होती है। इसी जांच में मृतक और अपात्रों का पता चलता है। ऐसे में जिनका सत्यापन हो गया वे तो पकड़ में आ गए। लेकिन जो लोग सत्यापन की जद में नहीं आए और यदि उनमें से किसी की मृत्यु हो गई और उसके परिजनों द्वारा भी सूचना नहीं दी गई तो ऐसे लोगों की सम्मान निधि जारी रहती है। इसलिए सरकारी तंत्र को इस व्यवस्था में सुधार की जरूरत है।
ये हो सकता है
बैंक, कोषागार से पेंशन लेने वाले पेंशनर्स को हर साल बैंक जाकर अपने जीवित होने का प्रमाण देना होता है। इसके लिए लाभार्थी खुद बैंक जाते हैं और अपना जीवन प्रमाणपत्र प्रस्तुत करते हैं। इसी तरह पीएम सम्मान निधि में भी ये व्यवस्था लागू हो सकती है। ऐसे में गड़बड़ी की संभावना भी कम होगी।
वर्ष 2020-21 के लाभार्थियों की सत्यापन रिपोर्ट
कुल लाभार्थी जिनकी जांच हुई - 12048
मृतक (अपात्र) 541
सही मिले 11507
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वर्ष 2021-22 के लाभार्थियों की सत्यापन रिपोर्ट
कुल लाभार्थी जिनका सत्यापन हुआ -23012
मृतक (अपात्र) - 903
सही मिले 22880
जांच चल रही 132
जांच में मृतक या अपात्र मिले किसानों की सम्मान निधि को तत्काल रोक दिया गया है। मृतक और अपात्र मिले किसानों को उनकी मृत्यु के बाद जितनी भी किस्त गई हैं, उसका पता लगाकर रिकवरी की जाएगी। वैैसे मृतक किसान के परिजन किसान की मृत्यु के बाद बैंक को सूचना दे देते हैं और बैंक उनके खाते में लेन-देन बंद कर देते हैं। उसमें आई धनराशि को विभाग को वापस लौटा दिया जाता है। तहसील रिकॉर्ड में भी वारिसान दाखिल खारिज के दौरान इसका पता चल जाता है और उसकी सम्मान निधि की किस्तें रोक दी जाती हैं ।
- सीएल यादव, उप कृषि निदेशक