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Moradabad News: सात घंटे में 2. 33 लाख से अधिक मामलों का निस्तारण
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मुरादाबाद। इस साल की तीसरी राष्ट्रीय लोक अदालत में शनिवार को सात घंटे में रिकॉर्ड दो लाख 33 हजार 695 मामलों का निस्तारण किया गया। इस दाैरान मोटर दुर्घटना प्रतिकर के 143 मामलों में पीड़ितों और उनके परिजनों को 13 करोड़ पांच लाख 64 हजार 400 रुपये की प्रतिकर राशि दिए जाने के आदेश हुए हैं। अदालत का आयोजन जनपद न्यायालय और तहसील मुख्यालयों किया गया।
जनपद न्यायाधीश सै. माऊज बिन आसिम ने शनिवार की सुबह राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत को आमजन तक न्याय पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि इससे आपसी सुलह-समझौते से मामलों का त्वरित निस्तारण होता है। इससे वादकारियों का समय, धन और श्रम बचता है। लोक अदालत में दो लाख 33 हजार 695 मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें न्यायालयों द्वारा 23 हजार 743 और विभिन्न प्रशासनिक विभागों द्वारा एक लाख 95 हजार 751 मामले निपटाए गए। बैंक और बीएसएनएल ने 966 मामलों का निस्तारण किया। जिला विधिक प्राधिकरण की सचिव तपस्या त्रिपाठी ने बताया कि 21 हजार 975 शमन योग्य वादों का निस्तारण हुआ। आरोपियों पर 803820 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुनित चंद्रा, पीठासीन अधिकारी संजय कुमार, पीठासीन अधिकारी लारा जैगम उद्दीन, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत घनेन्द्र कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी, दि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता,सचिव गुप्ता, जिला बार के अध्यक्ष अनिल पाल सिंह, जूनियर बार के अध्यक्ष प्रमोद प्रत्येकी, सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, बैंक अधिकारी और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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विभिन्न मामलों का निस्तारण
वैवाहिक और भरण-पोषण से संबंधित 95 मामलों का निस्तारण परिवार न्यायालय और अपर परिवार न्यायालय द्वारा आपसी सुलह-समझौते से कराया गया। उत्तराधिकार के दो मामलों में 12 लाख 82 हजार 899 रुपये के उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी किए गए। मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर से संबंधित 143 मामलों का भी निस्तारण हुआ।
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जेल के बंदियों के उत्पादों की लगी प्रदर्शनी
लोक अदालत के दौरान जिला कारागार में बंद बंदियों द्वारा तैयार हस्तशिल्प वस्तुओं की प्रदर्शनी और बिक्री भी की गई। इसके साथ ही एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) और एक जनपद एक पकवान के तहत स्थानीय उत्पादों और प्रसिद्ध व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई।
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जनपद न्यायाधीश सै. माऊज बिन आसिम ने शनिवार की सुबह राष्ट्रीय लोक अदालत का शुभारंभ किया। इस दौरान उन्होंने राष्ट्रीय लोक अदालत को आमजन तक न्याय पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बताया। उन्होंने कहा कि इससे आपसी सुलह-समझौते से मामलों का त्वरित निस्तारण होता है। इससे वादकारियों का समय, धन और श्रम बचता है। लोक अदालत में दो लाख 33 हजार 695 मामलों का निस्तारण किया गया। इनमें न्यायालयों द्वारा 23 हजार 743 और विभिन्न प्रशासनिक विभागों द्वारा एक लाख 95 हजार 751 मामले निपटाए गए। बैंक और बीएसएनएल ने 966 मामलों का निस्तारण किया। जिला विधिक प्राधिकरण की सचिव तपस्या त्रिपाठी ने बताया कि 21 हजार 975 शमन योग्य वादों का निस्तारण हुआ। आरोपियों पर 803820 रुपये का अर्थदंड लगाया गया। राष्ट्रीय लोक अदालत में प्रधान न्यायाधीश परिवार न्यायालय सुनित चंद्रा, पीठासीन अधिकारी संजय कुमार, पीठासीन अधिकारी लारा जैगम उद्दीन, नोडल अधिकारी राष्ट्रीय लोक अदालत घनेन्द्र कुमार, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्वेता चौधरी, दि बार एसोसिएशन के अध्यक्ष आनंद मोहन गुप्ता,सचिव गुप्ता, जिला बार के अध्यक्ष अनिल पाल सिंह, जूनियर बार के अध्यक्ष प्रमोद प्रत्येकी, सहित अन्य न्यायिक अधिकारी, बैंक अधिकारी और अन्य विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।
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विभिन्न मामलों का निस्तारण
वैवाहिक और भरण-पोषण से संबंधित 95 मामलों का निस्तारण परिवार न्यायालय और अपर परिवार न्यायालय द्वारा आपसी सुलह-समझौते से कराया गया। उत्तराधिकार के दो मामलों में 12 लाख 82 हजार 899 रुपये के उत्तराधिकार प्रमाण-पत्र जारी किए गए। मोटर वाहन दुर्घटना प्रतिकर से संबंधित 143 मामलों का भी निस्तारण हुआ।
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जेल के बंदियों के उत्पादों की लगी प्रदर्शनी
लोक अदालत के दौरान जिला कारागार में बंद बंदियों द्वारा तैयार हस्तशिल्प वस्तुओं की प्रदर्शनी और बिक्री भी की गई। इसके साथ ही एक जनपद एक उत्पाद (ओडीओपी) और एक जनपद एक पकवान के तहत स्थानीय उत्पादों और प्रसिद्ध व्यंजनों की प्रदर्शनी लगाई गई।