Moradabad: खेत में मिला मादा तेंदुए का शव, पोस्टमार्टम में खुला जंगल की खूनी जंग का राज, ठाकुरद्वारा में दहशत
ठाकुरद्वारा में डेढ़ वर्षीय मादा तेंदुए का शव मिला है। वन विभाग की जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट में तेंदुए की मौत का कारण आपसी संघर्ष बताया गया है। दूसरे तेंदुए की तलाश की जा रही है।
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कमालपुरी-बैजनाथपुर मार्ग पर खाली पड़े खेत में मादा तेंदुए का शव मिलने से हड़कंच मच गया। तेंदुए की उम्र डेढ़ वर्ष बताई जा रही है। वन विभाग ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर बताया है कि तेंदुए के शरीर पर जो जख्म हैं वह आपसी संघर्ष के हैं। दूसरे तेंदुए की भी तलाश की जा रही है।
हो सकता है कि वह भी जख्मी हुआ हो। गांव बैजनाथपुर के पास किसान देवराज सिंह के खेत में तेंदुए का शव पड़ा मिलने की सूचना पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर जांच शुरू की। पोस्टमार्टम के बाद जलालपुर खालसा स्थित वन विभाग की पौधशाला में राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप शव को जला दिया गया।
वन विभाग के रेंजर रवि कुमार गंगवार के अनुसार पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सकों ने प्राथमिक तौर पर आपसी संघर्ष को मौत की वजह माना है। तेंदुए के शरीर पर चोट के निशान मिले हैं। वहीं दूसरे तेंदुए को भी घायल मानकर तलाशा जा रहा है, ताकि उसे उपचार दिया जा सके।
वन्यजीव विशेषज्ञ बताते हैं कि तेंदुए अपने क्षेत्र और भोजन पर अधिकार को लेकर अक्सर भिड़ जाते हैं। कई मामलों में यह संघर्ष जानलेवा भी साबित होता है।
तेंदुओं का ठिकाना बन गए गन्ने के खेत
ठाकुरद्वारा क्षेत्र में गन्ने की घनी फसल तेंदुओं के लिए सुरक्षित ठिकाना बन चुकी है। वन विभाग के अनुसार यहां कई तेंदुए सक्रिय हैं और शावकों का जन्म भी दिया है। बढ़ती संख्या के साथ क्षेत्रीय वर्चस्व को लेकर संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं।
क्षेत्र में पिछले कुछ वर्षों में कुंआखेड़ा खालसा, लालापुर पीपलसाना और मधुपुरी के आसपास भी तेंदुओं के शव मिल चुके हैं। दुर्घटनाओं में भी कई तेंदुओं की जान जा चुकी है। ताजा घटना ने एक बार फिर यह संकेत दिया है कि ठाकुरद्वारा की गन्ना बेल्ट अब तेंदुओं का स्थायी आवास बनती जा रही है।