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अब प्रवेश परीक्षा के बाद ही मिलेगा एलएलबी में दाखिला

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 28 Jun 2021 02:03 AM IST
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Now admission in LLB will be available only after entrance exam
मुरादाबाद। एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय ने एलएलबी में दाखिले की प्रक्रिया बदल दी है। एलएलबी में एडमिशन अब प्रवेश परीक्षा के आधार पर होंगे। विवि के अधिकारियों का कहना है कि कोरोना संक्रमण के बीच प्रोफेशनल विषयों में शीघ्र प्रवेश कराने के लिए यह निर्णय लिया गया है। 10 जुलाई से वेबसाइट पर पंजीकरण की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी।
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केजीके कालेज एलएलबी पाठ्यक्रम संचालित करने वाला मुरादाबाद जनपद का इकलौता अशासकीय कालेज है। यहां सीटों की अपेक्षा करीब छह गुना आवेदन आते हैं। कई बार प्रवेश प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए दो बार मेरिट जारी करनी पड़ती हैं। विश्वविद्यालय के मीडिया प्रभारी डॉ. अमित सिंह ने बताया कि नया शैक्षिक सत्र 15 सितंबर से शुरू करने की योजना है। आवेदनों की संख्या अधिक होने की वजह से मेरिट प्रक्रिया में देरी होती है और इसका असर प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ता है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2017 तक विश्वविद्यालय एलएलबी में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा आयोजित कराता था, लेकिन वर्ष 2018 से मेरिट के आधार पर प्रवेश होने लगे। कोरोना संक्रमण काल में दाखिले की प्रक्रिया शीघ्र पूर्ण करानी है, इसलिए एलएलबी, एलएलएम, एमएससी, एमएड और अन्य पाठ्यक्रमों में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा होगी। इसके लिए विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर पंजीकरण प्रक्रिया दस जुलाई से शुरू होगी। बुधवार को प्रवेश समिति की अंतिम बैठक होनी है। बैठक में इस निर्णय पर अंतिम मुहर लगते ही दिशा-निर्देश कालेजों को भेज दिए जाएंगे। इसके तहत नौ जनपदों के दो अशासकीय और करीब 40 निजी कालेजों में एलएलबी के प्रवेश होंगे। प्रवेश परीक्षा में सभी कालेज शामिल होंगे। बरेली कालेज बरेली और केजीके कालेज मुरादाबाद की काउंसिलिंग करने के बाद शेष विद्यार्थियों का निजी कालेजों में प्रवेश होगा। यदि कोई विद्यार्थी प्रवेश परीक्षा में नहीं बैठता है और उसका प्रवेश कालेज को करना है तो इसके लिए कुलपति से अनुमति ली जाएगी।
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निजी कालेजों के विरोध से बदला था नियम
एलएलबी में प्रवेश परीक्षा के बजाय मेरिट के आधार पर दाखिले की प्रक्रिया निजी कालेजों के विरोध के बाद शुरू हुई थी। निजी कालेजों के संचालकों का कहना था कि प्रवेश परीक्षा के पंजीकरण के दौरान विश्वविद्यालय की वेबसाइट पर सिर्फ अशासकीय कालेज के नाम दिखाई देते थे। इससे विद्यार्थियों को निजी कालेजों के बारे में जानकारी नहीं हो पाती थी। काउंसिलिंग भी अशासकीय कालेजों के लिए ही होती थी तो फिर निजी कालेजों को प्रवेश परीक्षा में शामिल क्यों किया जाता है। इसलिए निजी कॉलेजों की भी काउंसिलिंग कराई जाए, ताकि सभी कालेजों में एक साथ प्रवेश प्रक्रिया पूर्ण हो सके। वहीं, अशासकीय कालेज में प्रवेश में देरी का खामियाजा निजी कालेजों की प्रवेश प्रक्रिया पर पड़ता था। इसकी वजह से कई बार इन कालेजों की सीटें भी खाली रह जाती थीं, क्योंकि निजी कालेज प्रवेश परीक्षा में न बैठने वाले विद्यार्थियों का सीधे प्रवेश नहीं ले सकते थे। निजी कालेजों ने इसका विरोध तत्कालीन कुलपति के समक्ष दर्ज कराया था। इसके बाद दाखिले प्रवेश परीक्षा के बजाय मेरिट पर होने लगे। केजीके कालेज के विधि संकाय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. एके सिंह का कहना है कि प्रवेश परीक्षा से सिर्फ निजी कालेजों की सीटें ही खाली नहीं रहती थीं, बल्कि केजीके कालेज में भी 300 में से लगभग 280 सीटों पर ही प्रवेश हो पाते थे, जबकि मेरिट से सभी सीटें फुल हो जाती हैं।
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