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Abdullah Azam: अब दोबारा जाएगी अब्दुल्ला आजम की विधायकी, स्वार विधानसभा सीट पर उपचुनाव की सुगबुगाहट शुरू
Tue, 14 Feb 2023 11:31 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर
Published by: शाहरुख खान
Updated Tue, 14 Feb 2023 11:31 AM IST
सार
सपा विधायक अब्दुल्ला आजम की विधायकी दूसरी जाएगी। पहली बार न्यूनतम आयु की शर्त के मामले में हाईकोर्ट ने उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया था। अब मुरादाबाद की कोर्ट जब उनको दो साल की सजा सुना दी है तो दोबारा से उनकी विधायकी चली जाएगी।
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अब्दुल्ला आजम (फाइल फोटो)
- फोटो : एएनआई
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विस्तार
रामपुर में एक बार फिर से स्वार विधानसभा सीट पर उप चुनाव की सुगबुगाहट शुरू हो गई है। कोर्ट से दो साल की सजा मिलने के बाद स्वार के विधायक अब्दुल्ला आजम की विधायकी जानी तय है। उनकी विधायकी रद्द होने की स्थिति में स्वार सीट को रिक्त घोषित कर दिया जाएगा। ऐस में यहां पर उप चुनाव कराया जाएगा।
2022 में रामपुर में दो उपचुनाव हो चुके हैं। वैसे रामपुर में उप चुनाव का सिलसिला 2019 से चल रहा है। 2019 में आजम खां ने विधायक रहते हुए रामपुर संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधानसभा की सीट छोड़ दी थी। 2019 में रामपुर विधानसभा सीट पर उप चुनाव हुआ था।
जिसमें आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा ने जीत हासिल की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में सांसद रहते हुए आजम खां ने विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने लोकसभा की सीट छोड़ दी। आजम खां के इस्तीफे के बाद लोकसभा का उपचुनाव मई 2022 में हुआ, जिसमें भाजपा ने जीत हासिल की।
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इसके बाद नफरती भाषण देने के मामले में आजम खां को कोर्ट से तीन साल की सजा हो गई थी। जिसके बाद उनकी विधायकी चली गई। इसके बाद रामपुर विधानसभा सीट पर दिसंबर माह में उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में भी बाजी भाजपा के हाथ रही। अब आजम खां के पुत्र और स्वार सीट से सपा विधायक की विधायकी भी जानी तय मानी जा रही है। इसके बाद स्वार सीट पर उपचुनाव का बिगुल बजेगा। इसको राजनीतिक सुगबुगाहट अभी से शुरू हो गई है।
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2022 में रामपुर में दो उपचुनाव हो चुके हैं। वैसे रामपुर में उप चुनाव का सिलसिला 2019 से चल रहा है। 2019 में आजम खां ने विधायक रहते हुए रामपुर संसदीय सीट से लोकसभा का चुनाव लड़ा था। लोकसभा का चुनाव जीतने के बाद उन्होंने विधानसभा की सीट छोड़ दी थी। 2019 में रामपुर विधानसभा सीट पर उप चुनाव हुआ था।
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जिसमें आजम खां की पत्नी डॉ. तजीन फात्मा ने जीत हासिल की थी। 2022 के विधानसभा चुनाव में सांसद रहते हुए आजम खां ने विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद उन्होंने लोकसभा की सीट छोड़ दी। आजम खां के इस्तीफे के बाद लोकसभा का उपचुनाव मई 2022 में हुआ, जिसमें भाजपा ने जीत हासिल की।
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इसके बाद नफरती भाषण देने के मामले में आजम खां को कोर्ट से तीन साल की सजा हो गई थी। जिसके बाद उनकी विधायकी चली गई। इसके बाद रामपुर विधानसभा सीट पर दिसंबर माह में उपचुनाव हुआ। इस उपचुनाव में भी बाजी भाजपा के हाथ रही। अब आजम खां के पुत्र और स्वार सीट से सपा विधायक की विधायकी भी जानी तय मानी जा रही है। इसके बाद स्वार सीट पर उपचुनाव का बिगुल बजेगा। इसको राजनीतिक सुगबुगाहट अभी से शुरू हो गई है।
आपको बता दें कि सपा विधायक अब्दुल्ला आजम की विधायकी दूसरी जाएगी। पहली बार न्यूनतम आयु की शर्त के मामले में हाईकोर्ट ने उनके निर्वाचन को रद्द कर दिया था। अब मुरादाबाद की कोर्ट जब उनको दो साल की सजा सुना दी है तो दोबारा से उनकी विधायकी चली जाएगी।
अब्दुल्ला आजम ने 2017 में रामपुर जिले की स्वार विधानसभा सीट से सपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था और निर्वाचित हुए थे। अब्दुल्ला के निर्वाचन को उनके मुकाबले चुनाव लड़े बसपा के प्रत्याशी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने चुनौती दी थी। नवेद मियां ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था वो न्यूनतम आयु की सीमा को पूरा नहीं करते थे।
अब्दुल्ला आजम ने 2017 में रामपुर जिले की स्वार विधानसभा सीट से सपा की टिकट पर चुनाव लड़ा था और निर्वाचित हुए थे। अब्दुल्ला के निर्वाचन को उनके मुकाबले चुनाव लड़े बसपा के प्रत्याशी नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने चुनौती दी थी। नवेद मियां ने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला आजम ने 2017 के विधानसभा चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल किया था वो न्यूनतम आयु की सीमा को पूरा नहीं करते थे।
हाईकोर्ट ने इस मामले की सुनवाई करते दिसंबर 2019 में अब्दुल्ला की विधायकी रद्द कर दी थी । अब्दुल्ला ने हाईकोर्ट के आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी लेकिन वहां उनकी याचिका खारिज हो गई थी। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के आदेश को बहाल रखा है। हालांकि अब्दुल्ला की विधायकी जाने के बाद भी मामला सुप्रीम कोर्ट में होने की वजह से इस सीट पर उप चुनाव नहीं हो पाया था।
अब्दुल्ला आजम ने 2022 के विधानसभा का चुनाव फिर से स्वार सीट से सपा की टिकट लड़ा और जीते। अभी उनको दोबारा से चुनाव जीते हुए एक साल भी नहीं हुए हैं। सोमवार को छजलैट प्रकरण के 15 साल पुराने मुकदमे में कोर्ट ने आजम खां के साथ-साथ अब्दुल्ला आजम को दो साल की सजा सुना दी थी। इससे अब्दुल्ला आजम की विधानसभा सदस्यता रद्द होगी। बीते 25 वर्षों में पहली बार होगा जब विधानसभा में मोहम्मद आजम खां या उनके परिवार का कोई सदस्य नहीं होगा।
सर्वोच्च न्यायालय के आदेश के तहत विधायक या सांसद को किसी मामले में दो वर्ष या इससे अधिक कारावास की सजा होने पर उनकी सदस्यता स्वत: रद्द मानी जाती है। रामपुर के जिलाधिकारी रवींद्र की ओर से अब्दुल्ला आजम को सजा की सूचना निर्वाचन आयोग को भेजी जाएगी।