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नोटबंदी ः उड़ गई ‘मिठास’ गुड़ की

Fri, 25 Nov 2016 01:50 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, मुरादाबाद Updated Fri, 25 Nov 2016 01:50 AM IST
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notebandi- ud gyi mithas gud ki
गुड़
नोटबंदी के बाद गुड़ मंडियों में कारोबार पचास तक रह गया। व्यापारियों की माने तो जहां इन दिनों रोजाना एक करोड़ का कारोबार होता था वहीं तीस लाख तक ही सिमट रहा है। कुल तीस प्रतिशत ही किसान गुड़ ला रहे हैं। मुरादाबाद में अमरोहा से ही गुड़ लाया जाता है। वहां कारोबार फीका होने के कारण यहां भी पर्याप्त आपूर्ति नहीं है इस कारण गुड़ के दाम भी पिछले साल की तुलना में बढ़ गए हैं। 
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बता दें कि अमरोहा के गुलड़िया रोड स्थित मंडी समिति के एक हिस्से में बड़ी गुड़ मंडी है।


जहां 42 लाइसेंसी आढ़ती हैं। इसके अलावा इतने ही कच्चे आढ़ती भी हैं। जो किसानों से माल लेकर लाइसेंसी व्यापारियों की आढ़त पर बेचते हैं। इस बार महाराष्ट्र में सूखा पड़ने से चीनी और गुड़ के दाम शुरू से ही उछाल पर हैं। मंडी में 2600 से 2525 रुपये प्रति क्विंटल गुड़ खरीदा जा रहा है। बावजूद इसके बड़े किसान मंडी नहीं पहुंच रहे। बाजार में फुट की खरीदारी भी कम है। करेंसी के अभाव में लोग गुड़ का जायका भूल गए हैं। इसका सीधा असर व्यापारी और आढ़तियों पर करेंसी का अभाव है।
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जनपद अमरोहा की गुड़ मंडी में मुरादाबाद मंडल के जनपद संभल, मुरादाबाद, बिजनौर के किसान भी माल लेकर आते हैं, जहां इन दिनों मंडी में किसानों की गुड़ से भरी गाड़ियां रात दिन उतरती थीं, वहीं आज करेंसी के चक्कर में किसान मंडी नहीं पहुंच रहे। दोपहर तक बाद तक ही गुड़ मंडी में सन्नाटा पसर जाता है।
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दढ़ियाल में कोल्हू उद्योग से जुड़े हजारों मजदूर बेरोजगार 
ब्रजेश चौहान, दढियाल (रामपुर)। हजार-पांच सौ के नोटों की बंदी से दढ़ियाल के मशहूर गुड़ की मिठास फीकी कर दी है। तैयार गुड़ कोल्हुओं में डंप पड़ा है। नोटों की किल्लत के चलते खरीददार नहीं मिल रहे हैं। अधिकांश कोल्हू  स्वामी पुराने नोटों में ही सस्ता गुड़ बेचने को मजबूर हैं। नहीं तो उनका गुड़ स्टाक में पड़ा डंप हो रहा है। कोल्हुओं के बंद होने की नौबत आ गई है। वहीं कोल्हूओं में काम कर रहे सैकड़ों लोग बेरोजगार होने की कगार पर हैं।



दढ़ियाल कस्बे में हर वर्ष लगभग 30 करोड़ रुपये का गुड  कारोबार होता है। वर्तमान समय में  कस्बे में 50 से अधिक कोल्हू चल रहे हैं। जिनमें हर रोज 65 से 70 टन गुड़  तैयार किया जा रहा है। प्रत्येक कोल्हू में 10 से अधिक मजदूर काम कर अपना परिवार चलाते हैं। कस्बे के सैकड़ों लोग गुड़ तैयार होने से लेकर मंडी पहुंचाने तक कहीं न कहीं रोजगार से जुड़े हैं। लेकिन पिछले दिनो नोट बंदी के चलते कोल्हू स्वामियों को भारी दिक्क्त का सामना करना पड़ रहा है। यहां का गुड़ हल्द्धानी, रामनगर, काशीपुर, मुरादाबाद, रामपुर, अमरोहा, मेरठ की मंडियों में जाता है।
के अलावा हरियाणा, पंजाब और दिल्ली की आजादपुर मंडी में भी जाता है।

 
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