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Moradabad News: बत्ती न पानी, कुछ ऐसी ही है लाकड़ी फाजलपुर की नई बस्ती की कहानी
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मुरादाबाद। विकास के तमाम दावों के बीच वार्ड संख्या-4 लाकड़ी फाजलपुर की नई बस्ती आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित है। करीब 400 घरों वाली इस बस्ती में आधे से ज्यादा इलाके में न बिजली है, न पानी की आपूर्ति और न ही नालियों की व्यवस्था। हालात ऐसे हैं कि लोग नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। पिछले आठ से दस वर्षों से यहां रह रहे सैकड़ों परिवार आज भी नगर निगम की सुविधाओं का इंतजार कर रहे हैं।
बस्ती की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां के अधिकतर घरों में बिजली कनेक्शन तक नहीं है। हालात से तंग आकर लोगों ने अपनी छतों पर सोलर पैनल लगवा रखे हैं ताकि किसी तरह रोशनी और पंखे की व्यवस्था हो सके। पानी की सप्लाई न होने के कारण लोग निजी संसाधनों पर ही निर्भर हैं। नालियों के अभाव में गंदा पानी सड़कों और कच्चे रास्तों पर फैल जाता है जिससे बदबू और बीमारियों का खतरा बना रहता है।
नगर निगम की ओर से बस्ती के करीब 50 प्रतिशत हिस्से में सड़क और नालियों का निर्माण कराया गया है लेकिन बाकी आधा इलाका आज भी कच्चे रास्तों और जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। जहां सड़कें बनी हैं वहां भी डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सफाई की व्यवस्था नहीं है। कूड़े के ढेर जगह-जगह लगे रहते हैं जिससे दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप हमेशा बना रहता है। जिन इलाकों में सड़कें नहीं बनी हैं वहां हालात और भी बदतर हैं। बारिश के बाद रास्ते कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं और लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क और नालियों के लिए टेंडर तो हो चुके हैं लेकिन काम शुरू नहीं किया जा रहा। मुहल्ले के केदार सिंह का दावा है कि वह लगातार महापौर और निगम के अधिकारियों से पत्राचार कर रहे हैं। कुछ जगह स्थिति बेहतर हो गई है और कुछ जगह का काम बचा रह गया है जिसे पूरा कराने का प्रयास कर रहे हैं।
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बस्ती की सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां के अधिकतर घरों में बिजली कनेक्शन तक नहीं है। हालात से तंग आकर लोगों ने अपनी छतों पर सोलर पैनल लगवा रखे हैं ताकि किसी तरह रोशनी और पंखे की व्यवस्था हो सके। पानी की सप्लाई न होने के कारण लोग निजी संसाधनों पर ही निर्भर हैं। नालियों के अभाव में गंदा पानी सड़कों और कच्चे रास्तों पर फैल जाता है जिससे बदबू और बीमारियों का खतरा बना रहता है।
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नगर निगम की ओर से बस्ती के करीब 50 प्रतिशत हिस्से में सड़क और नालियों का निर्माण कराया गया है लेकिन बाकी आधा इलाका आज भी कच्चे रास्तों और जलभराव की समस्या से जूझ रहा है। जहां सड़कें बनी हैं वहां भी डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन और सफाई की व्यवस्था नहीं है। कूड़े के ढेर जगह-जगह लगे रहते हैं जिससे दुर्गंध और मच्छरों का प्रकोप हमेशा बना रहता है। जिन इलाकों में सड़कें नहीं बनी हैं वहां हालात और भी बदतर हैं। बारिश के बाद रास्ते कीचड़ में तब्दील हो जाते हैं और लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो जाता है।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क और नालियों के लिए टेंडर तो हो चुके हैं लेकिन काम शुरू नहीं किया जा रहा। मुहल्ले के केदार सिंह का दावा है कि वह लगातार महापौर और निगम के अधिकारियों से पत्राचार कर रहे हैं। कुछ जगह स्थिति बेहतर हो गई है और कुछ जगह का काम बचा रह गया है जिसे पूरा कराने का प्रयास कर रहे हैं।