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मां के दूध का नहीं कोई विकल्प, शिशु के लिए लेना होगा संकल्प

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Mon, 03 Aug 2020 02:36 AM IST
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no choice other than breast milk for your baby
मुरादाबाद। शिशु के लिए मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है। जन्म के एक घंटे के अंतराल का दूध शिशु को निमोनिया और दस्त से बचाता है। छह माह तक स्तनपान कराने से शिशु का शारीरिक के साथ मानसिक विकास होता है। बावजूद इसके मुरादाबाद में 75 फीसदी शिशुओं को चौथे महीने से ही मां के दूध के साथ ऊपरी दूध पिलाया जाता है। इससे शिशु और मां दोनों के सेहत पर बुरा असर पड़ता है।
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शिशुओं को स्तनपान कराने को लेकर महिलाओं में गलत भ्रांतियां हैं। महिलाओं को लगता है कि स्तनपान कराने से वो कमजोर हो जाएंगी, लेकिन ऐसा नहीं होता है। स्तनपान कराने से शिशु और मां स्वस्थ रहतीं हैं। कामकाजी महिलाएं स्तनपान कराने में पीछे हैं। स्तनपान के प्रति जागरूकता के लिए हर साल अगस्त पहले सप्ताह विश्व स्तनपान सप्ताह मनाया जाता है। बाल रोग विशेषज्ञ एवं कोविड एल वन के अधीक्षक डा. संजीव बेलवाल बताते हैं, जन्म के पहले घंटे में स्तनपान कराना जरूरी है। वही बच्चे का पहला टीका होता है और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाता है। छह माह तक केवल मां का दूध जरूरी होता है।
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जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ एवं चिकित्सा अधीक्षक डा. राजेंद्र कुमार बताते हैं, मां का दूध नहीं मिलने से बच्चे एनिमिया के शिकार हो जाते हैं। जिला अस्पताल स्थित पुनर्वास केंद्र में ऐसे शिशुओं का इलाज होता है। औसतन हर महीने 15 से 20 बच्चे भर्ती होते हैं। बच्चों को उनकी जरूरत के हिसाब से मल्टी विटामिन दिया जाता है। मुरादाबाद में सालाना करीब 85 से 90 हजार जन्म लेते हैं।
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घरों में प्रसव के बाद पहले घंटे में स्तनपान की दर कम
सरकारी अस्पतालों में संस्थागत प्रसव की दर 42.5 फीसदी है। प्रसव के बाद पहले घंटे में स्तनपान कराने की दर 26.9 फीसदी है। निजी अस्पतालों में प्रसव की दर 21.5 फीसदी है और पहले घंटे में स्तनपान की दर 19 फीसदी है। 35.2 फीसदी प्रसव आज भी घरों में होते हैं और इनमें स्तनपान की दर मात्र 19 फीसदी है।

दो माह से 23 माह तक स्तनपान की दर एवं ऊपरी दूध देने की दर
दो माह से कम उम्र के बच्चों को 63.4 फीसदी मां ही स्तनपान कराती हैं। दो से तीन माह में 40.8, चार से पांच माह में 29.4 फीसदी, छह माह की उम्र तक 15.6 फीसदी, 11 महीने में सात फीसदी, एक 12 महीने से 17 महीने में 4.1 फीसदी, 19 से 23 माह की उम्र तक मात्र 1.8 फीसदी बच्चों को मां का दूध मिलता है। बच्चे का पेट भरने के लिए ऊपरी दूध पिलाया जाता है।
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