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भाषा शिक्षा में परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता : प्रो. प्रमोद
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मुरादाबाद। टीएमयू के फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग में एआई ड्रिवन फ्यूचर : रिवोल्यूशनाइजिंग लैंग्वेज लर्निंग एंड टीचिंग विषय पर अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन हुआ। मानविकी विभाग की ओर से हुए कार्यक्रम में एआई-संवर्धित भाषा सीखने के प्लेटफॉर्म, प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण (एनएलपी) अनुप्रयोग, भाषा शिक्षण में आभासी और संवर्धित वास्तविकता और भाषा शिक्षण के लिए एआई के उपयोग में नैतिक विचार जैसे विषयों पर मंथन हुआ।
करीब 24 विशेषज्ञों ने कुल 20 थीमों पर अपने विचार साझा किए। इसके अलावा तीन चरण में कुल 86 शोध पत्र पढ़े गए। मुख्य अतिथि इग्नू नई दिल्ली के प्रो. प्रमोद कुमार ने कहा कि तेजी से बढ़ते वैश्वीकरण और तकनीकी प्रगति के दौर में भाषा शिक्षा में परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने सभी को प्रतिदिन कम से कम 100 शब्दों में कुछ न कुछ लिखते रहने की सलाह भी दी।
सिडनी ऑस्ट्रेलिया से अर्पिता अग्रवाल ने कहा कि एआई ने भाषा शिक्षा को नया स्वरूप दिया है। प्रारंभ में एआई-आधारित प्रणालियां व्याकरण सुधार और शब्दावली तक सीमित थीं, लेकिन अब मशीन लर्निंग और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण ने इन्हें अधिक बुद्धिमान, अनुकूली और इंटरेक्टिव बना दिया है।
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कैलिफोर्निया से गनेश कुमार ने कहा कि भाषा शिक्षा में एआई का भविष्य संतुलन और तालमेल में निहित है। सबसे प्रभावी मॉडल एक हाइब्रिड होगा, जहां एआई शिक्षण प्रक्रिया के प्रतिस्थापन के बजाय एक शक्तिशाली संवर्द्धक के रूप में कार्य करता है। इस दौरान फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी, डॉ. पीयूष मित्तल, डॉ. निशीथ मिश्रा, डॉ. पंकज कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।
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करीब 24 विशेषज्ञों ने कुल 20 थीमों पर अपने विचार साझा किए। इसके अलावा तीन चरण में कुल 86 शोध पत्र पढ़े गए। मुख्य अतिथि इग्नू नई दिल्ली के प्रो. प्रमोद कुमार ने कहा कि तेजी से बढ़ते वैश्वीकरण और तकनीकी प्रगति के दौर में भाषा शिक्षा में परिवर्तनकारी दृष्टिकोण की आवश्यकता है। उन्होंने सभी को प्रतिदिन कम से कम 100 शब्दों में कुछ न कुछ लिखते रहने की सलाह भी दी।
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सिडनी ऑस्ट्रेलिया से अर्पिता अग्रवाल ने कहा कि एआई ने भाषा शिक्षा को नया स्वरूप दिया है। प्रारंभ में एआई-आधारित प्रणालियां व्याकरण सुधार और शब्दावली तक सीमित थीं, लेकिन अब मशीन लर्निंग और प्राकृतिक भाषा प्रसंस्करण ने इन्हें अधिक बुद्धिमान, अनुकूली और इंटरेक्टिव बना दिया है।
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कैलिफोर्निया से गनेश कुमार ने कहा कि भाषा शिक्षा में एआई का भविष्य संतुलन और तालमेल में निहित है। सबसे प्रभावी मॉडल एक हाइब्रिड होगा, जहां एआई शिक्षण प्रक्रिया के प्रतिस्थापन के बजाय एक शक्तिशाली संवर्द्धक के रूप में कार्य करता है। इस दौरान फैकल्टी ऑफ इंजीनियरिंग के डीन प्रो. राकेश कुमार द्विवेदी, डॉ. पीयूष मित्तल, डॉ. निशीथ मिश्रा, डॉ. पंकज कुमार सिंह आदि मौजूद रहे।