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सिपाहियों की हत्या कर भागा धर्मपाल गुरुग्रा में गिरफ्तार
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संभल/ मुरादाबाद। 17 जुलाई को चंदौसी कोर्ट में पेशी के बाद मुरादाबाद जिला कारागार लौटते समय दो सिपाहियों की हत्या कर पुलिस की कैदी वैन से फरार हुआ ढाई लाख का ईनामी बंदी धर्मपाल गुड़गांव में पकड़ा गया। वह नाम बदलकर वहां छुपा था। संभल एसओजी ने उसे मंगलवार को गुड़गांव से गिरफ्तार कर लिया है। धर्मपाल के बाकी दो साथी शकील और कमल पुलिस मुठभेड़ में मारे जा चुके हैं। आईजी रमित शर्मा ने धर्मपाल की गिरफ्तारी की पुष्टि की है। एसपी संभल यमुना प्रसाद का कहना है कि बुधवार को धर्मपाल को कोर्ट में पेश किया जाएगा।
कुंदरकी के इंजीनियर अपहरण और हत्याकांड में मुरादाबाद जेल में बंद शकील पुत्र नूर मुहम्मद निवासी रम्पुरा बहजोई, इसी गांव का कमल पुत्र जंग बहादुर और बहजोई के गांव भरतपुर निवासी धर्मपाल पुत्र देशराज 17 जुलाई को एक मुकदमे की सुनवाई पर चंदौसी कोर्ट ले जाए गए थे। वहां से लौटते समय चंदौसी से करीब दो किमी निकलते ही तीनों बंदियों ने पुलिस वैन पर तैनात सिपाहियों पर अपने पास पहले से मौजूद पिस्टल से गोलियां बरसा दी थीं। सिपाही ब्रजपाल और हरेंद्र की हत्या करने के बाद तीनों बंदी एक सिपाही की रायफल लूटकर कस्टडी से भाग गए थे। तीनों बंदियों के खिलाफ बनियाठेर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। तीनों पर डीजीपी ने जिंदा या मुर्दा पकड़े जाने पर ढाई - ढाई लाख रुपये पुरस्कार घोषित किया था। 20 जुलाई को अमरोहा पुलिस ने बंदी कमल को आदमपुर थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद संभल पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में 11 अगस्त को शकील भी मारा जा चुका है। मंगलवार को तीसरा बंदी धर्मपाल भी गुड़गांव में पुलिस के हत्थे चढ़ गया। वह वहां फर्जी नाम पते से छ़ुपा था। सूत्रों का कहना है कि वहां अपने परिचित कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद वह पकड़ा गया। एसपी संभल यमुना प्रसाद ने बताया कि मंगलवार को एसओजी टीम ने फरार तीसरे बंदी धर्मपाल को भी गिरफ्तार कर लिया है। वह गुड़गांव में फरूखनगर में छुपा था। पुलिस उससे पूछताछ कर पूरा घटनाक्रम जानने की कोशिश करेगी।
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कुंदरकी के इंजीनियर अपहरण और हत्याकांड में मुरादाबाद जेल में बंद शकील पुत्र नूर मुहम्मद निवासी रम्पुरा बहजोई, इसी गांव का कमल पुत्र जंग बहादुर और बहजोई के गांव भरतपुर निवासी धर्मपाल पुत्र देशराज 17 जुलाई को एक मुकदमे की सुनवाई पर चंदौसी कोर्ट ले जाए गए थे। वहां से लौटते समय चंदौसी से करीब दो किमी निकलते ही तीनों बंदियों ने पुलिस वैन पर तैनात सिपाहियों पर अपने पास पहले से मौजूद पिस्टल से गोलियां बरसा दी थीं। सिपाही ब्रजपाल और हरेंद्र की हत्या करने के बाद तीनों बंदी एक सिपाही की रायफल लूटकर कस्टडी से भाग गए थे। तीनों बंदियों के खिलाफ बनियाठेर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ था। तीनों पर डीजीपी ने जिंदा या मुर्दा पकड़े जाने पर ढाई - ढाई लाख रुपये पुरस्कार घोषित किया था। 20 जुलाई को अमरोहा पुलिस ने बंदी कमल को आदमपुर थाना क्षेत्र में पुलिस मुठभेड़ में मार गिराया था। इसके बाद संभल पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में 11 अगस्त को शकील भी मारा जा चुका है। मंगलवार को तीसरा बंदी धर्मपाल भी गुड़गांव में पुलिस के हत्थे चढ़ गया। वह वहां फर्जी नाम पते से छ़ुपा था। सूत्रों का कहना है कि वहां अपने परिचित कुछ लोगों के संपर्क में आने के बाद वह पकड़ा गया। एसपी संभल यमुना प्रसाद ने बताया कि मंगलवार को एसओजी टीम ने फरार तीसरे बंदी धर्मपाल को भी गिरफ्तार कर लिया है। वह गुड़गांव में फरूखनगर में छुपा था। पुलिस उससे पूछताछ कर पूरा घटनाक्रम जानने की कोशिश करेगी।
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