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मुरादाबाद हत्याकांड: करोड़ों की संपत्ति के लिए की थी तहेरे भाई-भाभी की हत्या, आठ माह बाद सामने आया चौंकाने वाला सच
Thu, 25 Feb 2021 10:12 AM IST
शाहरुख खान
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
अमर उजाला नेटवर्क, मुरादाबाद
Published by: शाहरुख खान
Updated Thu, 25 Feb 2021 10:12 AM IST
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केबल व्यवसायी अपनी पत्नी के साथ(फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
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करोड़ों की संपत्ति के लिए आरोपी ने अपने गोद लिए तहेरे भाई और उसकी पत्नी की हत्या कर दी थी। करीब सात माह से अनसुलझे इस दोहरे हत्याकांड की गुत्थी घर में ही मिले एक पुराने पत्र ने सुलझा दी। ठाकुरद्वारा में 29 जून 2020 को हुई केबल कारोबारी और उसकी पत्नी की हत्या का खुलासा बुधवार को पुलिस ने किया। पुलिस ने मृत कारोबारी के चचेरे भाई सुनील वर्मा को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि सुनील ने ही करोड़ों रुपये की कीमत वाली 29 बीघा जमीन के लिए साजिश रचकर दंपती को मौत के घाट उतारा था।
पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विद्या सागर मिश्र ने बताया कि ठाकुरद्वारा नगर के मोहल्ला पीपल टोला वार्ड नंबर 9 निवासी प्रशांत वर्मा उर्फ मोहित वर्मा और उनकी पत्नी मोना वर्मा 29 जून की रात अपने घर में मृत पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई थी कि प्रशांत को गला रेतकर मारा गया था। जबकि मोना की गला दबाकर हत्या की गई थी।
पुलिस और एसओजी टीम ने कई एंगल पर जांच पड़ताल की। फोरेंसिक टीम व खोजी कुत्तों की भी मदद ली गई थी। पुलिस को जब कोई लाइन नहीं मिली तो दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। जिसमें पुलिस को प्रशांत के घर में रखी अलमारी से एक पत्र मिला था। जिसमें उसने अपने चचेरे भाई सुनील वर्मा पर शक जताया था कि वह उसकी व उसकी पत्नी की हत्या करा सकता है।
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पुलिस ने सुनील वर्मा को हिरासत में लेकर कई बार पूछताछ की। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि 29 जून को पति-पत्नी घर में मौजूद थे। एसपी देहात ने बताया कि उसी दौरान उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर जनपद के जसपुर थानाक्षेत्र के कासमपुर निवासी सुनील वर्मा प्रशांत के घर बातचीत करने के बहाने आ पहुंचा था। उसने बातचीत करते हुए चाय पी।
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पुलिस अधीक्षक ग्रामीण विद्या सागर मिश्र ने बताया कि ठाकुरद्वारा नगर के मोहल्ला पीपल टोला वार्ड नंबर 9 निवासी प्रशांत वर्मा उर्फ मोहित वर्मा और उनकी पत्नी मोना वर्मा 29 जून की रात अपने घर में मृत पाए गए थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पुष्टि हुई थी कि प्रशांत को गला रेतकर मारा गया था। जबकि मोना की गला दबाकर हत्या की गई थी।
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पुलिस और एसओजी टीम ने कई एंगल पर जांच पड़ताल की। फोरेंसिक टीम व खोजी कुत्तों की भी मदद ली गई थी। पुलिस को जब कोई लाइन नहीं मिली तो दोबारा घटनास्थल का निरीक्षण किया गया। जिसमें पुलिस को प्रशांत के घर में रखी अलमारी से एक पत्र मिला था। जिसमें उसने अपने चचेरे भाई सुनील वर्मा पर शक जताया था कि वह उसकी व उसकी पत्नी की हत्या करा सकता है।
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पुलिस ने सुनील वर्मा को हिरासत में लेकर कई बार पूछताछ की। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने अपना गुनाह कबूल कर लिया। आरोपी ने पुलिस पूछताछ में बताया कि 29 जून को पति-पत्नी घर में मौजूद थे। एसपी देहात ने बताया कि उसी दौरान उत्तराखंड के जिला ऊधमसिंह नगर जनपद के जसपुर थानाक्षेत्र के कासमपुर निवासी सुनील वर्मा प्रशांत के घर बातचीत करने के बहाने आ पहुंचा था। उसने बातचीत करते हुए चाय पी।
इसी दौरान प्रशांत वर्मा टॉयलेट के लिए चले गए थे। मौका पाकर सुनील वर्मा ने मोना का गला दबाकर हत्या कर दी थी। मोना वर्मा की आवाज सुनकर प्रशांत कमरे में आया तो सुनील वर्मा ने दरवाजे के पास ही पकड़ कर छुरी से गर्दन काटकर उसकी भी हत्या कर दी थी।
संपत्ति जाने के डर से गोद लिए भाई से रखता था रंजिश
जगदीश शरण वर्मा के नाम पर जसपुर क्षेत्र में 29 बीघा जमीन थी। जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है। जगदीश के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने अपनी देखभाल व वंश चलाने के लिए प्रशांत वर्मा को गोद लिया था। जिसके कारण उसका चचेरा भाई सुनील वर्मा उससे रंजिश रखता था। सुनील वर्मा को लगता था कि यदि प्रशांत वर्मा दत्तक पुत्र न होता तो ताऊ की सारी संपत्ति उसको मिल जाती।
जगदीश शरण की मृत्यु हो चुकी है। मृत्यु के बाद सुनील वर्मा ने न्यायालय में आपत्ति दर्ज करा दी थी। ताकि जमीन प्रशांत वर्मा के नाम न हो। इसी बात पर दोनों के बीच संपत्ति का विवाद चल रहा था। पुलिस का दावा है कि वर्ष 2018 में सुनील वर्मा ने प्रशांत वर्मा से मेलजोल बढ़ा लिया था। इसके बाद सुनील वर्मा ने फरवरी 2020 में जमीन का सौदा ठाकुरद्वारा कोतवाली क्षेत्र के सुरजन नगर निवासी एक व्यक्ति से दो करोड़ 11 लाख रुपये में कर लिया था।
प्रशांत वर्मा को जमीन का सौदा 84 लाख रुपये में बताया गया था। जिसमें से सुनील वर्मा ने 77 लाख रुपये के चेक स्वयं ले लिए थे और सात लाख रुपये प्रशांत वर्मा को दे दिए। बाकी पैसे वह प्रशांत को नहीं देना चाहता था। इसी वजह से 29 जून 2020 को सुनील वर्मा एक छुरी लेकर प्रशांत वर्मा के घर बातचीत करने के बहाने से गया था। जहां उसने प्रशांत और उसकी पत्नी की हत्या कर दी।
संपत्ति जाने के डर से गोद लिए भाई से रखता था रंजिश
जगदीश शरण वर्मा के नाम पर जसपुर क्षेत्र में 29 बीघा जमीन थी। जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये बताई जा रही है। जगदीश के कोई संतान नहीं थी। उन्होंने अपनी देखभाल व वंश चलाने के लिए प्रशांत वर्मा को गोद लिया था। जिसके कारण उसका चचेरा भाई सुनील वर्मा उससे रंजिश रखता था। सुनील वर्मा को लगता था कि यदि प्रशांत वर्मा दत्तक पुत्र न होता तो ताऊ की सारी संपत्ति उसको मिल जाती।
जगदीश शरण की मृत्यु हो चुकी है। मृत्यु के बाद सुनील वर्मा ने न्यायालय में आपत्ति दर्ज करा दी थी। ताकि जमीन प्रशांत वर्मा के नाम न हो। इसी बात पर दोनों के बीच संपत्ति का विवाद चल रहा था। पुलिस का दावा है कि वर्ष 2018 में सुनील वर्मा ने प्रशांत वर्मा से मेलजोल बढ़ा लिया था। इसके बाद सुनील वर्मा ने फरवरी 2020 में जमीन का सौदा ठाकुरद्वारा कोतवाली क्षेत्र के सुरजन नगर निवासी एक व्यक्ति से दो करोड़ 11 लाख रुपये में कर लिया था।
प्रशांत वर्मा को जमीन का सौदा 84 लाख रुपये में बताया गया था। जिसमें से सुनील वर्मा ने 77 लाख रुपये के चेक स्वयं ले लिए थे और सात लाख रुपये प्रशांत वर्मा को दे दिए। बाकी पैसे वह प्रशांत को नहीं देना चाहता था। इसी वजह से 29 जून 2020 को सुनील वर्मा एक छुरी लेकर प्रशांत वर्मा के घर बातचीत करने के बहाने से गया था। जहां उसने प्रशांत और उसकी पत्नी की हत्या कर दी।