Moradabad: चांदी पर छाई महंगाई ने निर्यात की चमक घटाई, 85% निर्यातकों ने छोड़ा काम, दूसरे उत्पाद किए शुरू
चांदी की बढ़ती कीमतों ने मुरादाबाद के सिल्वर कोटेड उत्पादों के निर्यात को भारी नुकसान पहुंचाया है। 2010 में करीब एक हजार करोड़ रुपये का यह कारोबार अब सिमटकर 50 करोड़ रुपये रह गया है। महंगाई और चीन की सस्ती तकनीक के चलते 85 प्रतिशत निर्यातकों ने यह काम छोड़ दिया है।
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दिनों दिन चांदी की कीमतें आसमान पर पहुंचने से मुरादाबाद के सिल्वर कोटेड (चांदी की मोटी परत वाले पीतल) उत्पादों का निर्यात जमीन पर आ गया है। 15 साल पहले की तुलना में अब चांदी की कोटिंग वाले आइटम से बड़ी संख्या में निर्यातकों ने दूरी बना ली है। जानकार बताते हैं कि सौ में से 85 निर्यातकों ने यह काम छोड़कर दूसरे उत्पाद पकड़ लिए हैं।
मुरादाबाद से वर्ष 2010 में सिल्वर कोटेड उत्पादों का सालाना निर्यात एक हजार करोड़ रुपये के आसपास था। पहले पीतल की महंगाई और फिर चांदी की बढ़ती कीमतों ने निर्यात कारोबार की चमक घटा दी। चांदी के दामों में लगातार उछाल से निर्यातकों के विदेशी सौदे के समय तय हुईं कीमतें अब कई गुना बढ़ गई हैं।
लिहाजा विदेशी बाजार में इन उत्पादों की डिलीवरी रोकना मजबूरी बन गई। ऐसे में मुरादाबाद से चांदी कोटिंग वाले प्रोडेक्ट का सालाना निर्यात 50 करोड़ पर सिमट गया। करीब 15 निर्यातक ही इस काम में रुचि ले रहे हैं। अन्य ने दूसरे प्रोडेक्ट का काम बढ़ा दिया है। निर्यातक बताते हैं कि चांदी की महंगाई से डील के समय तय कीमत पर उत्पाद नहीं बेचे जा सकते।
चीन का तकनीकी विकास भी इस मामले में बड़ी चुनौती है। मशीनों और टेक्नोलॉजी के दम पर चीन के सिल्वर कोटेड उत्पाद भारतीय कीमतों से 25 प्रतिशत कम कीमत में विदेशी ग्राहकों को मिल जाते हैं। यही वजह है कि अब मुरादाबाद के कारोबारियों को सिल्वर कोटेड उत्पादों का काम मुनाफे का सौदा नहीं बचा।
मुरादाबाद के लोकप्रिय सिल्वर कोटेड उत्पाद
मुरादाबाद से करीब 20 प्रकार के सिल्वर कोटेड प्रोडेक्ट का निर्यात होता है। इनमें टी-सेट्स, कटलरी, ट्रे, फ्रूट बाउल, बियर-वाइन मग, कैंडल स्टैंड ज्यादा लोकप्रिय हैं।
इन देशों में चांदी उत्पादों का निर्यात
मुरादाबाद से सिल्वर कोटेड उत्पादों का निर्यात अमेरिका, इटली, फ्रांस, इंग्लैंड में शुरू हुआ था। इन देशों के साथ मांग देख सऊदी अरब, दुबई समेत कुछ अन्य देशों में भी इसका निर्यात है।
चार हजार रुपये किलो पहुंची सिल्वर कोटेड प्रोडेक्ट की कीमत
निर्यातकों ने बताया कि 15 साल पहले सिल्वर कोटेड प्रोडेक्ट की कीमत एक हजार रुपये किलो थी। अब इसकी कीमत चार हजार रुपये प्रति किलो हो गई है। निर्यातक नवीन मेहरोत्रा ने बताया कि चांदी की बढ़ती कीमतों की वजह से करोड़ों के आर्डर होल्ड पर हैं।
साल-दर-साल चांदी के दाम
| वर्ष | चांदी का भाव (रुपये प्रति किलो) |
|---|---|
| 2010 | 27,000 |
| 2015 | 37,000 |
| 2020 | 40,000 |
| 2021 | 65,000 |
| 2022 | 86,000 |
| 2023 | 64,000 |
| 2024 | 94,000 |
| दिसंबर 2025 | 2,25,000 |
एक साल के भीतर चांदी का दाम दो लाख रुपये प्रति किलो के पार हो गया। इसकी वजह से सिल्वर कोटेड उत्पादों के दाम बढ़ते गए और निर्यात कम हो गया। - सुभाष भाटिया, सदस्य, आईआईए हैंडीक्रॉफ्ट डेवलेपमेंट कमेटी
सिल्वर कोटेड प्रोडेक्ट का निर्यात पहले की अपेक्षा न के बराबर बचा है। शहर में सिल्वर कोटेड आइटम बनाने वाले कई लोगों ने काम बंद कर दिया। इससे कुछ लोग चांदी बर्तन और उत्पादों का निर्यात छोड़कर दूसरे हस्तशिल्प का निर्यात बढ़ा रहे हैं। - सतीश धीर, संचालक, हाइलैंड एक्सपोर्ट
पिछले एक साल में चांदी के दाम में 150 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हो गई। इससे चांदी कोटेड आइटम की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ। कीमतें स्थिर न रहने से छह महीने में दो से तीन प्रतिशत ही चांदी प्रोडेक्ट का निर्यात हुआ है। - नवीन मेहरोत्रा, संचालक, किशोरी जी एक्सपोर्ट
कई साल पहले सिल्वर कोटेड बर्तन का निर्यात करते थे। पीतल और चांदी की बढ़ती कीमतों की वजह से उत्पाद महंगा करना पड़ा। बहुत कम आर्डर मिलने की वजह से सिल्वर कोटेड बर्तन का काम बंद कर दिया। इसके बाद एल्युमिनियम से हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का काम शुरू किया। अब केवल एल्युमिनियम के बने हस्तशिल्प उत्पाद का ही निर्यात कर रहे हैं। -विजय कुमार बजाज, संचालक, दीपक कॉर्पोरेशन