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मुरादाबादः 33 साल बाद सरकारी व्यवस्था में 'डेडमैन' की एंट्री, अब मची है अफरातफरी
Sat, 09 Jan 2021 03:23 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, बिलारी (मुरादाबाद)
अमर उजाला नेटवर्क, बिलारी (मुरादाबाद)
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sat, 09 Jan 2021 03:23 AM IST
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- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सात जनवरी को रिलीज हुई सतीश कौशिक द्वारा निर्देशित फिल्म कागज के जैसी कहानी पर आधारित एक मामला ब्लॉक कुंदरकी के गांव अहमदनगर जैतबाड़ा से सामने आया है। राजस्व कर्मियों ने लापरवाही के चलते जीवित किसान को अभिलेखों में मृत दिखा दिया। साथ ही, किसान की विरासत भी दर्ज कर दी। इसके बाद किसान शुक्रवार को तहसीलदार प्रभा सिंह से मिला। किसान की शिकायत पर तहसीलदार ने मामले में जांच के आदेश दिए हैं। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट आने पर तत्कालीन राजस्व कर्मियों पर कार्रवाई होगी। 14 दिसंबर को 33 साल बाद अपने घर लौटे अहमदनगर जैतबाड़ा गांव निवासी किसान यूसुफ अपनी बेटी नसीम जहां पत्नी तालिब हुसैन के साथ अब इसी गांव में रह रहे हैं।
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इस मामले में अहमदनगर जैतबाड़ा गांव निवासी किसान यूसुफ ने शुक्रवार को तहसीलदार प्रभाव सिंह को शिकायती पत्र दिया। उन्होंने बताया कि बिलारी तहसील के अहमदनगर जैतबाड़ा गांव में गाटा संख्या 984, 986, 1054, 1066 और 1070 आदि उनकी पैतृक कृषि भूमि है। करीब 33 वर्ष पहले पारिवारिक परिस्थितियों के चलते वह अपना पैतृक गांव अहमदनगर जैतबाड़ा छोड़कर कांठ तहसील के कस्बा ऊमरी कलां में जाकर रहने लगे थे।
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यूसुफ का आरोप है कि कुछ दिन पहले वह अपने गांव अहमदनगर जैतबाड़ा में वापस आ गए। यहां जानकारी करने पर पता चला कि उसके नाम और हिस्से वाली कृषि भूमि पर अन्य लोगों ने कब्जा कर लिया है। तहसील से जब अपने नाम वाली भूमि के राजस्व अभिलेखों की नकल ली गई तो पता चला कि 23 जुलाई 2011 को तत्कालीन राजस्व निरीक्षक और राजस्व लेखपाल द्वारा उन्हें मृतक दर्शाकर उसकी विरासत दर्ज कर दी गई। विरासत के इस आदेश का सहारा लेकर उनके हिस्से की भूमि का बैनामा कर दिया गया। अब शुक्रवार को किसान ने तहसीलदार प्रभा सिंह को शिकायत के समर्थन में शपथ पत्र भी दिया है।
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शिकायतकर्ता किसान के बयान दर्ज किए गए हैं। उसकी भूमि में किसान का नाम जांच के बाद दर्ज करने के लिए वाद दायर करा दिया गया है। किसान से अन्य जरूरी साक्ष्य मांगे गए हैं। इस मामले में विभागीय जांच कराई जा रही है। जांच रिपोर्ट आने के बाद जो भी दोषी होगा उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
-प्रभा सिंह, तहसीलदार, बिलारी
क्या है फिल्म कागज की कहानी
मशहूर अभिनेता सलमान खान द्वारा प्रोड्यूस की गई फिल्म ‘कागज’ की गांव छितौनी थाना चौबेपुर वाराणसी निवासी संतोष मूरत सिंह की जिंदगी पर आधारित है। जब वह 18 साल के थे तब वर्ष 1995 में उनके गांव में फिल्म आंच की शूटिंग के लिए अभिनेता नाना पाटेकर आए थे। वह उन्हें अपने साथ मुंबई ले गए और अपना कुक बना लिया। लगभग तीन साल बाद संतोष गांव वापस आए तो यहां राजस्व अभिलेखों में उन्हें मृतक दिखाकर उनकी 12 एक ड़ से ज्यादा जमीन को गांव के ही लोगों ने अपने नाम करा लिया था।
संतोष के मां बाप नहीं रहे और वह तभी से ‘मैं जिंदा हूं’ बताकर संघर्ष कर रहे हैं। लोग उन्हें डेडमैन के नाम से जानते हैं। वहीं, यह फिल्म उत्तरप्रदेश के आजमगढ़ जिले के खलीलाबाद में रहने वाले लाल बिहारी पर बनाई गई है। दरअसल, लाल बिहारी 1975 में जब एक बैंक लोन का आवेदन देने राजस्व विभाग पहुंचे, तो पता चला कि दफ्तर के कागजों वह मर चुके हैं। उनकी सारी प्रॉपर्टी घूस लेकर उनके रिश्तेदारों के नाम कर दी गई थी। यहीं से लाल बिहारी की लड़ाई शुरू हुई और उन्होंने 20 साल बाद उन्हें इंसाफ मिला।