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दलित विमर्श पर राम के आदर्शों का पाठ पढ़ा गए थे नरेंद्र कोहली
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2008 में एमएच कॉलेज की संगोष्ठी में आए थे नरेंद्र कोहली
मुरादाबाद। राम साहित्य के अद्वितीय लेखक और व्याख्याता नरेंद्र कोहली के निधन की खबर से मुरादाबाद के साहित्य जगत में भी गहरा शोक है। उनका तीन बार मुरादाबाद में आयोजित कार्यक्रमों में आना हुआ। फरवरी 2008 में महाराजा हरिश्चंद्र पीजी कॉलेज में दलित विमर्श पर आयोजित शोध संगोष्ठी में नरेंद्र कोहली शिरकत की थी।
संगोष्ठी के संयोजक रहे डा. मुकेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि मेरा सौभाग्य रहा कि मैंने अपना शोध कार्य नरेंद्र कोहली की रामकथा पर किया। उनका खूब आशीर्वाद मुझे मिला। मेरे निवेदन पर वह उस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में आए थे। भगवान राम के आदर्शों को दलित विमर्श पर जोड़कर बताया था। उनका विमर्श इतना तार्किक और व्यावहारिक होता था कि साधारण व्यक्ति से लेकर बुद्धिजीवी तक हर कोई समझ सकता था। भगवान राम, विवेकानंद, कृष्ण, महाभारत, वासुदेव जैसे विषयों पर जो कार्य आचार्य कोहली ने किया है वह शायद ही कोई कर सके। उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।
संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री संजीव आकांक्षी ने बताया कि 2016 में नरेंद्र कोहली संस्कार भारती के कार्यक्रम में आए थे। इससे पहले एक बार वह गोकुलदास गर्ल्स डिग्री कॉलेज में भी एक कार्यक्रम में पधार चुके हैं। नरेंद्र कोहली जैसे व्यक्तित्व का जाना हिंदी साहित्य ही नहीं, विश्व साहित्य के लिए बड़ा नुकसान है। इस अवकाश को भरा जाना असंभव है।
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साहित्यिक समूहों ने दी श्रद्धांजलि
मुरादाबाद। नरेंद्र कोहली के अवसान पर साहित्यिक समूह ने भी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुरादाबाद लिटरेरी क्लब के माध्यम से नवगीतकार माहेश्वर तिवारी, जिया जमीर, राजीव प्रखर, मयंक शर्मा, मनोज रस्तोगी, मोनिका ठाकुर, पूनम बसंल आदि ने अपनी श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा संस्कार भारती, अक्षरा आदि संस्थाओं ने भी शोक प्रकट किया।
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संगोष्ठी के संयोजक रहे डा. मुकेश चंद्र गुप्ता ने कहा कि मेरा सौभाग्य रहा कि मैंने अपना शोध कार्य नरेंद्र कोहली की रामकथा पर किया। उनका खूब आशीर्वाद मुझे मिला। मेरे निवेदन पर वह उस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में आए थे। भगवान राम के आदर्शों को दलित विमर्श पर जोड़कर बताया था। उनका विमर्श इतना तार्किक और व्यावहारिक होता था कि साधारण व्यक्ति से लेकर बुद्धिजीवी तक हर कोई समझ सकता था। भगवान राम, विवेकानंद, कृष्ण, महाभारत, वासुदेव जैसे विषयों पर जो कार्य आचार्य कोहली ने किया है वह शायद ही कोई कर सके। उनका जाना मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है।
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संस्कार भारती के प्रांतीय महामंत्री संजीव आकांक्षी ने बताया कि 2016 में नरेंद्र कोहली संस्कार भारती के कार्यक्रम में आए थे। इससे पहले एक बार वह गोकुलदास गर्ल्स डिग्री कॉलेज में भी एक कार्यक्रम में पधार चुके हैं। नरेंद्र कोहली जैसे व्यक्तित्व का जाना हिंदी साहित्य ही नहीं, विश्व साहित्य के लिए बड़ा नुकसान है। इस अवकाश को भरा जाना असंभव है।
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साहित्यिक समूहों ने दी श्रद्धांजलि
मुरादाबाद। नरेंद्र कोहली के अवसान पर साहित्यिक समूह ने भी उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। मुरादाबाद लिटरेरी क्लब के माध्यम से नवगीतकार माहेश्वर तिवारी, जिया जमीर, राजीव प्रखर, मयंक शर्मा, मनोज रस्तोगी, मोनिका ठाकुर, पूनम बसंल आदि ने अपनी श्रद्धांजलि दी। इसके अलावा संस्कार भारती, अक्षरा आदि संस्थाओं ने भी शोक प्रकट किया।