World Diabetes Day : कोरोना की दवा दे गई मरीजों को शुगर की सजा, 20 फीसदी बने नियमित मरीज
Moradabad : कोरोना के वार और दवाओं से संक्रमितों का शुगर लेवल पांच सौ के पार पहुंच गया था। स्वस्थ होने के बाद करीब बीस फीसदी संक्रमित अब शुगर के नियमित मरीज बन गए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यह खून पतला करने की दवा का असर है। जिन्हें कभी शुगर नहीं हुई थी, वह भी डायबिटिक हो गए।
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संक्रमण की जद में आए मरीजों को कोरोना की दवाएं शुगर की सजा दे गईं। कोरोना के वार और दवाओं से संक्रमितों का शुगर लेवल पांच सौ के पार पहुंच गया था। स्वस्थ होने के बाद करीब बीस फीसदी संक्रमित अब शुगर के नियमित मरीज बन गए हैं। डॉक्टरों के मुताबिक यह खून पतला करने की दवा का असर है। जिन्हें कभी शुगर नहीं हुई थी, वह भी डायबिटिक हो गए।
कोरोना संक्रमित होने पर मरीजों को सांस लेने में दिक्कत होती है। खून जमने की भी शिकायत होती है। ऐसे में डाक्टर संक्रमित मरीजों को खून पतला करने की दवा देते हैं। डाक्टरों का दावा है कि ये दवा इंसुलिन की कार्य क्षमता कम कर देता है। इससे शुगर लेवल बढ़ने लगता है। शुगर लेवल 500 से 600 तक पहुंच जाता है। ऐसा वेंटिलेटर तक पहुंचे मरीजों के साथ हुआ। इन मरीजों की केस हिस्ट्री में शुगर की शिकायत नहीं थी। कोरोना पर विजय पाने के बाद कुछ मरीजों का शुगर लेवल ठीक हो गया, लेकिन करीब 20 फीसदी शुगर के रोगी बन गए। अब ये मरीज शुगर जैसी बीमारी से लड़ रहे हैं।
कोरोना और दवाओं का असर
मुरादाबाद। मधुमेह रोग विशेषज्ञ डॉ. डा. सैयद मोहम्मद रजी का कहना है कि कोरोना संक्रमित कई मरीज ऐेसे सामने आए, जिन्हें कभी शुगर की शिकायत नहीं थी। लेकिन संक्रमण के बाद वह शुगर के रोगी बन गए। ऐसे करीब बीस से तीस फीसदी मरीज होंगे। इसकी वजह कोरोना और दवाएं है। यही वजह है कि अचानक से शुगर के मरीजों की संख्या बढ़ गई है।
कोविड के बाद बन गए शुगर रोगी
जिला अस्पताल के चेस्ट फिजीशियन डॉ. प्रवीण शाह का कहना है कि कोरोना होने पर मरीजों की केस हिस्ट्री जरूरी ली जाती है। हिस्ट्री जानने पर कई संक्रमित मरीज ऐसे भी थे, जिन्हें शुगर की बीमारी नहीं थी। लेकिन इलाज के दौरान स्टेराइड लेने पर उनका शुगर लेवल बढ़ गया। पांच सौ से छह सौ तक पहुंच गया था। कोविड के बाद इसमें से कुछ शुगर के मरीज बन गए। हालांकि इनकी संख्या कम रही।
एक नजर कोविड के आंकड़ों पर
- 46893 लोग जिले में कोरोना पॉजिटिव हुए
- 21,85,381 सैंपल जिले में हुए
शरीर में छिपे दुश्मन से खुली लड़ाई में व्यायाम बना ब्रह्मास्त्र
लोगों में डायबिटीज यानी शुगर की बीमारी तेजी से फैल रही है। लोगों ने इसे शरीर में छिपे एक शत्रु की तरह मान लिया है। कई जागरूक लोग इससे बचने के लिए अपनी दिनचर्या को संतुलित करने में लगे हैं। साथ ही उन्होंने इस शत्रु से खुली लड़ाई में व्यायाम को ब्रह्मास्त्र बना लिया है। नियमित व्यायाम से लोगों को न सिर्फ डायबिटीज में अच्छे परिणाम मिले हैं, बल्कि मानसिक तनाव में भी कमी आई है।
डायबिटीज नियंत्रित कर घटाया 20 किलो वजन
वर्ष 2019 में मेरा वजन 107 किलोग्राम था। खानपान में लापरवाही और व्यायाम न करने के कारण मेरा वजन दिन प्रतिदिन बढ़ता जा रहा था। शुगर भी बढ़ गई थी। इसके बाद मैंने रोजाना सुबह की सैर, व्यायाम और योग शुरू किया। प्रतिदिन दो घंटे सैर, योग और व्यायाम करता हूं। अब मेरा वजन 87 किलोग्राम है। शुगर, ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल में है।
- प्रोमद विश्नोई (55), प्रगति विहार
रोजाना 45 मिनट की सैर, डायबिटीज की नहीं खैर
मुझे डायबिटीज है, आठ वर्ष हो गए हैं। मैं नियमित सुबह की सैर और योग करता हूं। 45 मिनट सैर के बाद इतना ही समय योग को देता हूं। महीने में सिर्फ दो बार दवा खाता हूं। जबकि पहले प्रतिदिन खानी पड़ती थी। सैर और योग से बेहद फायदा मिला है। अपने बच्चों को भी रोजाना व्यायाम की सलाह देता हूं।
- सुरेश चंद्र (66), कृष्णापुरी लाइनपार
लगातार योग ने दूर भगाए रोग
मेरी उम्र 74 वर्ष है। पिछले 15 वर्ष से लगातार योग कर रहा हूं। अब डायबिटीज या अन्य बीमारियों से मुक्त हूं। दूसरे लोगों को भी अपने साथ जोड़कर रोजाना रामलीला मैदान में योग कराता हूं। डायबिटीज नियंत्रित रहे इसके लिए हर्बल उत्पाद लेता हूं। खाने में चीनी, चावल का परहेज करता हूं।
- सर्वश्वर नाथ विश्नोई, लाइनपार
छह साल में एक दिन भी नहीं छोड़ा वॉलीबॉल
मुझे डायबिटीज है, छह वर्ष पहले तबीयत खराब होने पर जांच में पता चला था। इसके बाद से मैंने नियमित व्यायाम शुरू किया। साथ ही रोजाना वॉलीबॉल खेलता हूं। खराब मौसम की वजह से बेशक कभी चूक गया हूं लेकिन अपनी तरफ से एक दिन भी वॉलीबॉल खेलना नहीं छोड़ा। इसी के बल पर सात किलोग्राम वजन घटा चुका हूं। अब शुगर भी कंट्रोल रहती है।
- महेश सैनी(42), एकता विहार
मुझे ब्लड प्रेशर की समस्या पांच वर्ष पहले हुई थी। उस समय शुगर का स्तर भी गड़बड़ा गया था। इसके बाद से मैंने अपनी दिनचर्या में योग को शामिल कर लिया। अब रामलीला मैदान आकर लोगों के साथ रोजाना लगभग एक घंटा योग करता हूं। अब दवा की जरूरत कभी-कभी पड़ती है। मानसिक रूप से भी बेहद शांति मिलती है। शरीर दिनभर तरोताजा रहता है।
- कपिल गुप्ता(51), एकता कॉलोनी लाइनपार
डायबिटीज से बचाव के लिए क्या करते हैं डॉक्टर
मेरे पिता जी और भाइयों को शुगर की दिक्कत है। मैं मानकर चलता हूं कि मुझे भी यह समस्या एक दिन जरूर हो जाएगी। इससे बचाव के लिए मैं रोज 40 मिनट सैर करता हूं। वजन को बढ़ने नहीं देता, रोजाना योग करता हूं। मल्टी ग्रेन आटे का इस्तेमाल करता हूं। इसमें 60 फीसदी गेहूं, 20 फीसदी चना, 10-10 फीसदी जौ और सोयाबीन मिला होता है।
- डॉ. नितिन बत्रा, फिजीशियन
डायबिटीज को नियंत्रित रखने या इससे बचने के लिए दो मूल मंत्रों का पालन करता हूं। खाने में कार्बोहाइड्रेट्स, फेट्स और प्रोटीन की मात्रा संतुलित रखता हूं। रोजाना व्यायाम करता हूं, इससे मानसिक तनाव नहीं होता। जोकि डायबिटीज से बचने के लिए बेहद जरूरी है।
- डॉ. राकेश कुमार, फिजीशियन
सुबह एक घंटे करता हूं वॉक
शुगर जैसी बीमारी से बचने के लिए रोजाना वार्किंग और योग करता हूं। सुबह कम से कम एक घंटे वॉक करता हूं। मीठा चीज खान से परहेज करता हूं। मीठी चीजें न के बराबर खाता हूं। खानपान नियंत्रित रखता हूं।
- डॉ. मुकेश रायजादा, मधुमेह रोग विशेषज्ञ
फास्ट फूड से करता हूं परहेज
अपनी जीवन शैली को संतुलित करने की पूरी कोशिश करता हूं। अधिक से अधिक पैदल चलता हूं। रोजाना व्यायाम करता हूं। फास्ट फूड से परहेज करता हूं। तेल मसाला वाले खाने से बचता हूं। शारीरिक गतिविधियां पर जोर देता हूं।
- डॉ. सैयद मोहम्मद रजी, मधुमेह रोग विशेषज्ञ