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Moradabad News: मुरादाबाद क्लबः चुनाव पर ताले, सालाना एजीएम के भी लाले

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 02 Apr 2026 02:05 AM IST
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Moradabad Club: Elections on hold, annual AGM in trouble
मुरादाबाद। शहर के धनाड्य और अभिजात्य वर्ग के मनोरंजन और वैचारिक आदान-प्रदान का बड़ा केंद्र मुरादाबाद क्लब अब खामोश सियासत का अखाड़ा बनकर रह गया है। 13 साल से एक ही कमेटी के हाथ में क्लब का नियंत्रण होने से जहां अब इसका लोकतांत्रिक स्वरूप लगभग खत्म है, वहीं सदस्यों को दी जाने वाली सुविधाएं और भीतरी व्यवस्थाएं भी चंद लोगों की पसंद-नापसंद पर निर्भर हैं। यहां तक कि क्लब सदस्यों की सालाना साधारण सभा (एजीएम) तक नहीं कराई जा रही। न ही क्लब के सालाना आय-व्यय का ब्योरा उस तरह सदस्यों से साझा किया जा रहा, जैसी की पहले होता था।
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अंग्रेजों के जमाने से चली आ रही जिला मुख्यालयों पर प्राचीन क्लब की व्यवस्थाओं के तहत ही मुरादाबाद क्लब की भी स्थापना और संचालन शुरू कराया गया था। क्लब सदस्यों के हितों को ध्यान में रखकर पारदर्शी तरीके से चले, इसके लिए संविधान और लिखित नियमावली तैयार हुई थी। नियम-उपनियम बताने वाले यह लिखित प्रावधान पिछले कुछ वर्षों में सामान्य सी किताब बनकर रह गए हैं। इसमें लिखे उपबंधों पर अमल अब जरूरी नहीं समझा जाता। चंद लोगों की टीम अपने तरीके से चीजें तय कर लेती है। उन्हें लागू भी कर देती है। एनुअल जनरल मीटिंग (एजीएम) न कराए जाने से क्लब सदस्यों और जिम्मेदारों के बीच सीधे संवाद के लिए आमना-सामना ही नहीं हो पाता।
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क्लब के सदस्य बताते हैं कि नियमतः एजीएम हर साल होनी चाहिए। इसमें प्रस्ताव रखकर क्लब की आगामी योजनाओं और पूर्व में किए गए कामों पर खुलकर चर्चा कराई जाती है। बड़े सदन की तरह सदस्य किसी भी फैसले या प्रस्ताव के पक्ष अथवा विपक्ष में अपनी राय खुलकर रखते हैं। इसके आधार पर ही प्रस्तावों को अंतिम रूप दिया जाता है। इसी तरह क्लब के आय-व्यय के ब्योरे पर चर्चा के साथ इन आंकड़ों को परिसर में तय स्थान पर लगे नोटिस बोर्ड पर चस्पा करने का प्रावधान भी पूर्व में रहा है। क्लब की मौजूदा टीम ने इन सारे प्रावधानों को किनारे कर दिया है। सालाना चुनाव समेत इन सभी प्रावधानों की अनदेखी पर सदस्यों के बीच से उठने वाले सवालों पर प्रबंधन का एक ही जवाब होता है...मामला कोर्ट में है। सदस्यों को इस बात की भी शिकायत है कि इन मुकदमों और इनसे जुड़े न्यायिक निर्देशों को भी सदस्यों के बीच उजागर नहीं किया जा रहा है।
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साल 2013-14 के बाद से नहीं चुनाव



क्लब की मौजूदा कमेटी के पदाधिकारी ही बताते हैं कि वर्ष 2013-14 में आखिरी चुनाव हुआ था। इस चुनाव में डॉ. एसके राज सचिव, अमरनाथ कपूर उपाध्यक्ष, आरएन अग्रवाल कोषाध्यक्ष बने थे। इन तीन समेत सात पदाधिकारी चुने गए थे। क्लब के अध्यक्ष पदेन जिलाधिकारी होते हैं। अब हालात यह हैं कि क्लब के अपने कार्यक्रमों के निमंत्रण पत्रों तथा अन्य पत्राचार में जरूरत के हिसाब से डीएम को कभी अध्यक्ष तो कभी संरक्षक (पैट्रन) लिख दिया जाता है। डीएम जैसे महत्वपूर्ण पद के साथ भी क्लब के कर्ताधर्ता क्लब की भूमिका में एक जैसा पदनाम प्रयोग नहीं करते।




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मुरादाबाद क्लब से जुड़े कुछ लीगल मैटर हैं। इनकी वजह से कई विषय अटके हैं। क्लब प्रबंधन लीगल मैटर जल्द से जल्द तय कराने की कोशिश में है। प्रक्रिया चल रही है। नियमानुसार एजीएम भी होती रहती है। - आरएन अग्रवाल, कोषाध्यक्ष
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