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Moradabad News: रिश्तेदारों से रुपये उधार लेकर करवाई थी मोइन को तैयारी

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Thu, 25 May 2023 12:51 AM IST
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Moin was prepared by borrowing money from relatives
मुरादाबाद। परिवार में आर्थिक परेशानियां थीं। ऐसे में रिश्तेदारों से उधार लेकर मोइन को सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी करवाई थी। अब परिणाम के आने के बाद से अब तक मेरे घर पर शुभकामनाएं देने वालों का तांता लगा है। पिछले 24 घंटे में मेरी पूरी दुनिया ही बदल गई है। ये शब्द बेटे मोइन अहमद के चयन के बाद खुशी में डूबे बली अहमद के हैं।
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डिलारी के गांव जटपुरा निवासी मोइन अहमद ने सिविल सेवा परीक्षा में 296वीं रैंक प्राप्त की है। उनके पिता बली अहमद ने बताया कि हम छह भाई थे। दूसरे नंबर का मैं हूं। बड़े भाई का निधन हो चुका है। परिवार में आर्थिक समस्याएं पहले से ही थीं। बहुत ज्यादा जमीन भी नहीं थी। वर्ष 2006 में उनकी नौकरी संविदा पर चालक पद पर लगी थी। यह एक तरह से निजी नौकरी की तरह ही है। इसकी वजह से मेरी नौकरी लगने की जानकारी कई महीने तक किसी को नहीं हो सकी थी। उसके बाद भी हालात बहुत ज्यादा अच्छे नहीं रहे। परिवार और रिश्तेदारों ने मुझे सहयोग किया। इससे ही मैं अपने बच्चों की अच्छी परवरिश कर पाया।
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बचपन से ही जुनूनी है मोइन

बली अहमद ने बताया कि बेटा बचपन से बहुत जुनूनी है। वह हमेशा अपनी क्लास में टॉप आता है। जो भी लक्ष्य ठान लेता है, उसे पूरा किए बगैर उसे चैन नहीं मिलता है। वह कहता था कि मैं कोई छोटी नौकरी नहीं करूंगा। जब उसने सिविल सेवा की परीक्षा देने की बात बताई तो मैं बिल्कुल नहीं चौंका। बल्कि मैंने उसका हौसला बनने का संकल्प लिया। इसलिए जब उसने 40 हजार रुपये प्रति माह की साइबर कैफे की कमाई को छोड़कर दिल्ली जाकर तैयारी करने की योजना बनाई तो मैंने उसे हिम्मत दी।
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जितना मांगा, उधार लेकर उतना दिया रुपया
मोइन को दिल्ली में जब रुपयों की जरूरत हुई तो उसने मुझसे कहा। मेरे पास रुपयों की व्यवस्था नहीं थी लेकिन मैंने उसे ये बात नहीं बताई। न ही उसे किसी तरह की परेशानी महसूस होने दी। अपने एक रिश्तेदार से रुपये लेकर उसके पास भेजे।


मैंने भरोसा दिलाया कि एक दिन जरूर होगे कामयाब
बली अहमद का कहना है कि पहली बार परीक्षा मोइन ने तैयारी शुरू होने के तीन महीने बाद ही दी थी। दूसरी और तीसरी बार में बहुत कम नंबरों से पास होने से रह गए थे। इससे मोइन परेशान हो गए। मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि हिम्मत बनाए रखो। एक दिन अल्लाह जरूर कामयाब करेगा और अब वह पल आ गया है। गांव से ही नहीं, बल्कि क्षेत्र से और रिश्तेदार लगातार शुभकामनाएं देने के लिए घर आ रहे हैं। इस खुशी को मैं शब्दों में बयां नहीं कर सकता।
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