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पर्यटन स्थल के रूप से विकसित होगी मोढ़ा तैय्या झील
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मुरादाबाद। मोढ़ा तैय्या झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की योजना तैयार की गई है। आने वाले वर्ष 2022 में यह झील पर्यटन स्थल के रूप में नजर आएगी। पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने के बाद उसके रखरखाव के लिए ग्राम पंचायतों को सौंपे जाने की योजना है। इस झील पर विदेशी मेहमान पक्षी भी आते हैं।
छजलैट विकास खंड क्षेत्र के करीब 1.60 बीघे में फैली यह झील पहले पानी से लबालब रहती थी। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि एक दशक पहले तक इस झील में कमल के खिले फूल और ठंड शुरू होने के साथ विदेशी पक्षियों की आमद उधर से गुजरने वालों का ध्यान खींच लेती थी। मछली पालन का कार्य भी होता था, लेकिन धीरे-धीरे इस झील का पानी सूख गया और घास फूस उग आई। करीब दो साल पहले कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन के चलते जिले में आए प्रवासी श्रमिकों व अन्य श्रमिकों को काम देने के उद्देश्य से मनरेगा के तहत इसके जीर्णोद्धार का खाका तैयार किया गया।
एसडीएम की अगुवाई में इस झील की पैमाइश कराई गई। करीब 10 लाख से अधिक धनराशि खर्च कर झील की साफ-सफाई और मेड़ बंदी का भी कार्य किया गया। वर्ष 2021 में इस झील के किनारे पेड़ लगाने का भी कार्य किया गया। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह और मुख्य विकास अधिकारी आनंदवर्धन की पहल पर कुछ माह पहले अब इस झील का पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। मनरेगा के तहत कार्य होने से क्षेत्र के सैकड़ों श्रमिकों को रोजगार भी मिल सकेगा।
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सीडीओ ने बताया कि मनरेगा के तहत इस झील की खोदाई का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन इस झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी में जुटा है। क्षेत्र के लोग भी ऐसा चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में इस झील की खुदाई व सफाई का कार्य पूरा करने के साथ इसके सुंदरीकरण का भी कार्य कराया जाएगा। इसमें कुछ नावों की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे लोग नौैका विहार का आनंद उठा सकें। झील का रखरखाव होता रहे इसकी भी व्यवस्था की जाएगी।
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छजलैट विकास खंड क्षेत्र के करीब 1.60 बीघे में फैली यह झील पहले पानी से लबालब रहती थी। क्षेत्र के लोग बताते हैं कि एक दशक पहले तक इस झील में कमल के खिले फूल और ठंड शुरू होने के साथ विदेशी पक्षियों की आमद उधर से गुजरने वालों का ध्यान खींच लेती थी। मछली पालन का कार्य भी होता था, लेकिन धीरे-धीरे इस झील का पानी सूख गया और घास फूस उग आई। करीब दो साल पहले कोरोना संक्रमण के दौरान लॉकडाउन के चलते जिले में आए प्रवासी श्रमिकों व अन्य श्रमिकों को काम देने के उद्देश्य से मनरेगा के तहत इसके जीर्णोद्धार का खाका तैयार किया गया।
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एसडीएम की अगुवाई में इस झील की पैमाइश कराई गई। करीब 10 लाख से अधिक धनराशि खर्च कर झील की साफ-सफाई और मेड़ बंदी का भी कार्य किया गया। वर्ष 2021 में इस झील के किनारे पेड़ लगाने का भी कार्य किया गया। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह और मुख्य विकास अधिकारी आनंदवर्धन की पहल पर कुछ माह पहले अब इस झील का पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का निर्णय लिया गया है। मनरेगा के तहत कार्य होने से क्षेत्र के सैकड़ों श्रमिकों को रोजगार भी मिल सकेगा।
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सीडीओ ने बताया कि मनरेगा के तहत इस झील की खोदाई का कार्य किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि प्रशासन इस झील को पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की तैयारी में जुटा है। क्षेत्र के लोग भी ऐसा चाहते हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2022 में इस झील की खुदाई व सफाई का कार्य पूरा करने के साथ इसके सुंदरीकरण का भी कार्य कराया जाएगा। इसमें कुछ नावों की भी व्यवस्था की जाएगी, जिससे लोग नौैका विहार का आनंद उठा सकें। झील का रखरखाव होता रहे इसकी भी व्यवस्था की जाएगी।