Meena Kumari: ट्रेजडी क्वीन को भाया अमरोहा का अपनापन, निकाह के छह साल बाद आई शहर.. दूर से किया ससुराल का दीदार
अदाकारा मीना कुमारी को कमाल अमरोही से बेपनाह मोहब्बत थी। इसलिए उन्होंने उनसे दूसरी शादी की थी। मीना कुमारी को अमरोहा से अपनापन था। वह निकाह के छह साल बाद अमरोहा आई थी और उन्होंने दूर से ही ससुराल का दीदार किया था।
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महजबीं नाम की तरह ही चांद सी खूबसूरत दिखने वाली अदाकारा मीना कुमारी को न सिर्फ कमाल अमरोही से बेपनाह मोहब्बत थी, बल्कि अमरोहा और कमाल अमरोही के परिवार से भी अपनापन था इसीलिए वह अमरोहा आईं थीं।
कमाल अमरोही की बेटी सैयदा रुखसार जहरा कमाल बतातीं हैं अपनेपन की वजह से ही उनकी छोटी मां (मीना कुमारी) नहीं चाहती थीं कि उनके घर जाने पर उनकी बड़ी मां सैयदा आले जहरा (कमाल अमरोही की पहली पत्नी) को किसी तरह का दुख पहुंचे, इसलिए वह दूर से ही घर का दीदारकर चलीं गईं थीं।
रुखसार बतातीं हैं कि छोटी मां उनसे खासा अपनापन रखतीं थीं। बाॅलीवुड में यह अदाकारा न केवल मीना कुमारी के नाम से पहचानी गईं, बल्कि कमाल अमरोही से शादी के बाद अमरोहा की बहू के रूप में भी जानी गईं।
निकाह के छह साल बाद मीना कुमारी अमरोहा आई थीं लेकिन ससुराल का दूर से दीदार कर कमाल अमरोही के साथ वापस लौट गईं थीं। एक अगस्त 1932 को मुंबई में जन्मीं हिंदी सिनेमा की ट्रेजडी क्वीन मीना कुमारी का बृहस्पतिवार एक अगस्त को जन्मदिन है।
चंदन व मंजू के बीच अनबन को लेकर लेट हुई थी पाकीजा
मीना कुमारी अपने शौहर कमाल अमरोही को प्यार से चंदन कहकर पुकारतीं थीं। वहीं कमाल भी अपनी बेगम मीना कुमारी को मंजू के नाम से बुलाया करते थे। कमाल अमरोही की बेटी सैयदा रुखसार जहरा कमाल बताती हैं कि उनके बाबा (पिता) कमाल अमरोही व छोटी मां मीना कुमारी एक दूसरे को बेहद प्यार करते थे।
दोनों में हुई किसी तकरार को लेकर पाकीजा फिल्म को पूरा करने में खासा लंबा समय लग गया था। बीमार रहने के बाद भी मीना कुमारी ने उस फिल्म को पूरा करने का फैसला लिया। बाद में यह फिल्म बॉलीवुड के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई। वहीं, बैजू बावरा फिल्म में बेहतरीन अदाकारी के लिए उन्हें फिल्म फेयर अवार्ड से भी नवाजा गया था।
तलाक की खबरों से दुखी होता है मन
कमाल अमरोही की बेटी बताती हैं कि उनके बाबा व छोटी मां एक दूसरे को बेइंतहा मोहब्बत करते थे। दोनों के बीच अनबन जरूर हुई लेकिन तलाक कभी नहीं हुआ। लेकिन कुछ लोग अपनी टीआरपी बढ़ाने के लिए उनके तलाक की अफवाहों को बल देते हैं। जोकि कतई ठीक नही है।
वहीं, कुछ लोग मीना कुमारी द्वारा अमरोहा में एक पंडित से हम भाई बहनों को उर्दू पढ़ाने की बात भी कहते हैं, जिसका सत्यता से दूर तक का कोई वास्ता नहीं है।
दरगाह शाह विलायत पर की थी चादरपोशी
मीना कुमारी निकाह के छह साल बाद 1958 में अमरोहा आईं थीं। वह कमाल अमरोही के साथ अमरोहा पहुंचीं थीं। अमरोहा के वरिष्ठ इतिहास संकलनकर्ता भुवन अमरोही ने अपनी किताब में भी इसका जिक्र किया है। कमाल अमरोही के साथ कार में बैठकर मीना कुमारी अमरोहा पहुंचीं थीं।
यहां दरगाह शाह विलायत पर उन्होंने चादरपोशी भी की। यहीं से कमाल अमरोही ने उन्हें अपने घर का दीदार कराया लेकिन घर नहीं ले गए। कमाल अमरोही की बेटी सैयदा रुखसार जहरा बताती हैं उनके बाबा कमाल अमरोही व छोटी मां नहीं चाहते थे कि घर जाने पर उनकी बड़ी मां सैयदा आले जहरा को किसी तरह का दुख पहुंचे।
इसी के चलते दोनों चादरपोशी के बाद लौट गए थे। हालांकि उनकी बड़ी मां की बच्चों को सख्त हिदायत थी कि अपनी छोटी मां को भी वह उतना ही सम्मान दें, जितना उन्हें देते हैं। बच्चों ने उनकी इस हिदायत को आखिर तक निभाया भी।
पाकीजा, एक ही रास्ता, साहिब बीबी और गुलाम, दिल अपना प्रीत पराई, दिल एक मंदिर, फूल और पत्थर, मेरे अपने, काजल, बैजू बावरा।