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बेटी को शादी के दिन ब्यूटी पार्लर नहीं शिव मंदिर भेजें
मुरादाबाद/अमर उजाला ब्यूरो
Updated Fri, 29 Dec 2017 01:18 AM IST
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शादी
- फोटो : अमर उजाला
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जिन मां बाप की बेटी की शादी हो उन मां बाप को चाहिए कि वह शादी वाले दिन बेटी को ब्यूटी पार्लर के बजाए शिव मंदिर में गौरी पूजन के लिए भेजें। ब्यूटी पार्लर जाने के लिए पूरी जिंदगी पड़ी है। शादी से पहले कन्या के लिए गौरी पूजन शुभ होता है। सीता माता व रुक्मिणी जी ने विवाह से पूर्व गौरी पूजन ही किया था।
यह बातें राधेश्याम व्यास ने होटल ड्राइव इन 24 में श्री शिव महापुराण कथा का रसपान कराते हुए भक्तों से कही।राधेश्याम व्यास ने कहा कि बिना शिवलिंग की पूजा के शिव कृपा के पात्र नहीं बन सकते हैं। कलियुग में शिवलिंग से बड़ी किसी की पूजा नहीं है। इस पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
बिना शिव की पूजा के सभी देवताओं की पूजा करना व्यर्थ है। उन्होंने आगे कहा कि शिवलिंग पांच प्रकार के होते हैं। जिसमें स्वयंभू शिवलिंग, बिंदु, प्रतिष्ठित, चर और गुरु शिवलिंग हैं। पांचों शिवलिंग का विस्तृत वर्णन करते हुए महाराजश्री ने सुनाया कि हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषियों मुनियों ने इस जमीन खोदकर शिवलिंग की स्थापना की फिर शिवलिंग की पूजा करते हुए सैकड़ों वर्ष तक तपस्या की थी।
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अनेकों वर्षो बाद खुदाई के दौरान जो शिवलिंग भूमि से प्राप्त हो रहे हैं वह स्वयंभू शिवलिंग होते हैं। जो शिवलिंग चौकी पर, कलेंडर पर चित्र के रूप में दिखाई दें वह बिंदु शिवलिंग होता है। मंदिर के कारीगर द्वारा तैयार किए गए शिवलिंग की ब्राह्मणों के माध्यम से महापुरूषों के सानिध्य में मंदिर में जब विधिवत् स्थापना की जाती है तो वह प्रतिष्ठित शिविलिंग कहलाता है।
जिस शिवलिंग एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखकर पूजा की जाएं या फिर पूजा के बाद बैग में रख लिया जाए वह चर शिवलिंग होता है। गुरु शिवलिंग के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आपने जिस गुरु या संत से दीक्षा ली है उन गुरु महाराज के सीधे पांव के अंगूठे का निचला हिस्सा गुरु शिवलिंग कहलाता है। राधेश्याम व्यास ने अंत में कहा कि महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती है।
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यह बातें राधेश्याम व्यास ने होटल ड्राइव इन 24 में श्री शिव महापुराण कथा का रसपान कराते हुए भक्तों से कही।राधेश्याम व्यास ने कहा कि बिना शिवलिंग की पूजा के शिव कृपा के पात्र नहीं बन सकते हैं। कलियुग में शिवलिंग से बड़ी किसी की पूजा नहीं है। इस पूजा से भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी हो जाती हैं।
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बिना शिव की पूजा के सभी देवताओं की पूजा करना व्यर्थ है। उन्होंने आगे कहा कि शिवलिंग पांच प्रकार के होते हैं। जिसमें स्वयंभू शिवलिंग, बिंदु, प्रतिष्ठित, चर और गुरु शिवलिंग हैं। पांचों शिवलिंग का विस्तृत वर्णन करते हुए महाराजश्री ने सुनाया कि हजारों वर्ष पूर्व हमारे ऋषियों मुनियों ने इस जमीन खोदकर शिवलिंग की स्थापना की फिर शिवलिंग की पूजा करते हुए सैकड़ों वर्ष तक तपस्या की थी।
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अनेकों वर्षो बाद खुदाई के दौरान जो शिवलिंग भूमि से प्राप्त हो रहे हैं वह स्वयंभू शिवलिंग होते हैं। जो शिवलिंग चौकी पर, कलेंडर पर चित्र के रूप में दिखाई दें वह बिंदु शिवलिंग होता है। मंदिर के कारीगर द्वारा तैयार किए गए शिवलिंग की ब्राह्मणों के माध्यम से महापुरूषों के सानिध्य में मंदिर में जब विधिवत् स्थापना की जाती है तो वह प्रतिष्ठित शिविलिंग कहलाता है।
जिस शिवलिंग एक स्थान से दूसरे स्थान पर रखकर पूजा की जाएं या फिर पूजा के बाद बैग में रख लिया जाए वह चर शिवलिंग होता है। गुरु शिवलिंग के बारे में बताते हुए उन्होंने कहा कि आपने जिस गुरु या संत से दीक्षा ली है उन गुरु महाराज के सीधे पांव के अंगूठे का निचला हिस्सा गुरु शिवलिंग कहलाता है। राधेश्याम व्यास ने अंत में कहा कि महिलाएं शिवलिंग की पूजा कर सकती है।