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Moradabad News: थिनर डालकर महिला को जिंदा जलाकर मारने वाली सौतन को उम्रकैद
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मुरादाबाद। छजलैट क्षेत्र में संपत्ति विवाद में थिनर डालकर महिला को जिंदा जलाकर मारने वाली सौतन को अदालत ने दोषी करार दिया है। अदालत ने दोषी को उम्रकैद की सजा के साथ उस पर एक लाख पचास हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
छजलैट के सराय खजूर निवासी इस्लाम ने 17 मई 2021 को मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें इस्लाम ने बताया था कि उसकी बहन हाशमी की शादी गांव के ही रहने वाले तजम्मुल के साथ हुई थी। शादी के करीब 16 साल बाद तजम्मुल ने बहारो उर्फ बहारूनिशा से भी निकाह कर लिया था। जिसके बाद से बहारो मेरी बहन हाशमी से रंजिश रखती थी। आए दिन दोनों बीच विवाद होता था। बहारो तजम्मुल की सारी संपत्ति अपने नाम कराना चाहती थी। 16 मई 2021 की रात हाशमी अपनी 14 साल की बेटी अल्फिजा के साथ कमरे के बाहर सो रही थी। बहारो ने मां-बेटी पर ऊपर थिनर डाल कर आग लगा दी थी। जिससे मां-बेटी गंभीर रूप से झुलस गई थीं। इस घटना को हाशमी के बेटे दानिश ने खुद देखा था और अन्य लोगों की मदद से आग बुझाई थी। जिसके बाद मां-बेटी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। 19 मई 2021 को मजिस्ट्रेट ने अस्पताल में आकर हाशमी के बयान दर्ज किए थे। बाद में इलाज के दौरान हाशमी की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले को हत्या के रूप में दर्ज करते हुए आरोपी बहारो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या छह संदीप गुप्ता की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीलम वर्मा ने बताया कि इस मामले में घटना का चश्मदीद गवाह मृतका के पुत्र दानिश ने अदालत में पेश होकर अपने बयान दिए। जिसमें बताया कि बहारो ने थिनर डाल कर आग लगा दी थी। जिसे मैंने पकड़ा भी था लेकिन मां और बहन को बचाने की वजह से बहारो हाथ छुड़ा कर भाग गई। जिसके बाद आसपास के लोगों की मदद से मैंने आग बुझाई। साथ ही मृत्यु पूर्व मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान को आधार बनाकर अदालत ने अपना अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी बहारो को घटना का दोषी पाया। जिसे उम्रकैद की सजा के साथ उस पर एक लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। संवाद
बेटे की गवाही बनी सजा का आधार
मुरादाबाद। हाशमी तजम्मुल की पहली पत्नी थी। जिसके एक बेटा दानिश और एक बेटी अल्फिजा है। घटना वाली रात का दानिश घर में मौजूद था। जिसने अपने बयानों में बताया कि उस रात मेरी मां और छोटी बहन एक साथ सो रहीं थीं। जिन्हें मारने के लिए उनके ऊपर मेरी सौतेली मां बहारो ने थिनर डाल कर आग लगा दी थी, तब मैं भी पास ही सो रहा था। शोर सुनकर मैंने मैंने बहारो को पकड़ा भी लिया था, लेकिन अपनी मां और बहन को बचाने के लिए मैंने बहारो को छोड़ दिया था। आसपास के लोगों की मदद से आग बुझाई थी। अदालत ने दानिश के इन बयानों को भी सजा का आधार बनाया।
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मरने से पहले मजिस्ट्रेट को दिए गए थे बयान
मुरादाबाद। हाशमी करीब 66 प्रतिशत जल चुकी थी। जिसका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था। जहां मजिस्ट्रेट ने हाशमी के बयान लिए थे। जिसमें हाशमी ने बताया था कि बहारो संपत्ति को लेकर आए दिन उससे झगड़ा करती थी। वह नहीं चाहती थी कि तजम्मुल की जमीन जायदाद मुझे या मेरे बच्चों को मिले। इसी रंजिश के चलते उसने आग लगाकर मारने का प्रयास किया था।
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छजलैट के सराय खजूर निवासी इस्लाम ने 17 मई 2021 को मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें इस्लाम ने बताया था कि उसकी बहन हाशमी की शादी गांव के ही रहने वाले तजम्मुल के साथ हुई थी। शादी के करीब 16 साल बाद तजम्मुल ने बहारो उर्फ बहारूनिशा से भी निकाह कर लिया था। जिसके बाद से बहारो मेरी बहन हाशमी से रंजिश रखती थी। आए दिन दोनों बीच विवाद होता था। बहारो तजम्मुल की सारी संपत्ति अपने नाम कराना चाहती थी। 16 मई 2021 की रात हाशमी अपनी 14 साल की बेटी अल्फिजा के साथ कमरे के बाहर सो रही थी। बहारो ने मां-बेटी पर ऊपर थिनर डाल कर आग लगा दी थी। जिससे मां-बेटी गंभीर रूप से झुलस गई थीं। इस घटना को हाशमी के बेटे दानिश ने खुद देखा था और अन्य लोगों की मदद से आग बुझाई थी। जिसके बाद मां-बेटी को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया था। 19 मई 2021 को मजिस्ट्रेट ने अस्पताल में आकर हाशमी के बयान दर्ज किए थे। बाद में इलाज के दौरान हाशमी की मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले को हत्या के रूप में दर्ज करते हुए आरोपी बहारो को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मामले की सुनवाई अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश संख्या छह संदीप गुप्ता की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता नीलम वर्मा ने बताया कि इस मामले में घटना का चश्मदीद गवाह मृतका के पुत्र दानिश ने अदालत में पेश होकर अपने बयान दिए। जिसमें बताया कि बहारो ने थिनर डाल कर आग लगा दी थी। जिसे मैंने पकड़ा भी था लेकिन मां और बहन को बचाने की वजह से बहारो हाथ छुड़ा कर भाग गई। जिसके बाद आसपास के लोगों की मदद से मैंने आग बुझाई। साथ ही मृत्यु पूर्व मजिस्ट्रेट को दिए गए बयान को आधार बनाकर अदालत ने अपना अहम फैसला सुनाते हुए आरोपी बहारो को घटना का दोषी पाया। जिसे उम्रकैद की सजा के साथ उस पर एक लाख 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। संवाद
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बेटे की गवाही बनी सजा का आधार
मुरादाबाद। हाशमी तजम्मुल की पहली पत्नी थी। जिसके एक बेटा दानिश और एक बेटी अल्फिजा है। घटना वाली रात का दानिश घर में मौजूद था। जिसने अपने बयानों में बताया कि उस रात मेरी मां और छोटी बहन एक साथ सो रहीं थीं। जिन्हें मारने के लिए उनके ऊपर मेरी सौतेली मां बहारो ने थिनर डाल कर आग लगा दी थी, तब मैं भी पास ही सो रहा था। शोर सुनकर मैंने मैंने बहारो को पकड़ा भी लिया था, लेकिन अपनी मां और बहन को बचाने के लिए मैंने बहारो को छोड़ दिया था। आसपास के लोगों की मदद से आग बुझाई थी। अदालत ने दानिश के इन बयानों को भी सजा का आधार बनाया।
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मरने से पहले मजिस्ट्रेट को दिए गए थे बयान
मुरादाबाद। हाशमी करीब 66 प्रतिशत जल चुकी थी। जिसका इलाज एक निजी अस्पताल में चल रहा था। जहां मजिस्ट्रेट ने हाशमी के बयान लिए थे। जिसमें हाशमी ने बताया था कि बहारो संपत्ति को लेकर आए दिन उससे झगड़ा करती थी। वह नहीं चाहती थी कि तजम्मुल की जमीन जायदाद मुझे या मेरे बच्चों को मिले। इसी रंजिश के चलते उसने आग लगाकर मारने का प्रयास किया था।