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Moradabad News: युवक की हत्या में दो सगे भाइयों समेत पांच को आजीवन कारावास
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मुरादाबाद। मझोला के 15 साल पुराने युवक की हत्या के मामले में अदालत ने दो सगे भाइयों समेत पांच मुलजिमों को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है जबकि प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। इस हत्याकांड को शक में अंजाम दिया गया था।
मझोला थाना क्षेत्र के सूर्य नगर निवासी जीवन सिंह ने 17 जनवरी 2009 को मझोला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने बताया कि उसके पड़ोसी कृपाल, उसका भाई ओमपाल से उनका विवाद चल रहा था। 16 जनवरी की शाम करीब सात बजे कृपाल और ओमपाल मेरे बेटे राजेंद्र उर्फ बब्बन को घर से बुला कर ले गए थे। उस समय घर में जीवन के अलावा उसके दो बेटे पप्पू और सुरेंद्र, पत्नी सावित्री देवी और बेटी ममता मौजूद थीं। उन्होंने कृपाल को टोका कि वह उसके बेटे को कहां चले जा रहा है। तब कृपाल ने कहा था कि उसे कुछ बात करनी है। थोड़ी देर में घर भेज देंगे। जब देर रात तक राजेंद्र उर्फ बब्बन घर वापस नहीं आया तो जीवन मोहल्ले के ही अवधेश कुमार मिश्र और ओमवीर शर्मा के साथ राजेंद्र को ढूंढने के लिए गए। तब रेलवे वर्कशाप के पास पीपल के पेड़ के नीचे उसके बेटे राजेंद्र को ओमपाल, कृपाल, रिक्की उर्फ शिवकुमार ओमप्रकाश, लाला उर्फ किशनपाल और उमेश सैनी ने पकड़ रखा था। इसी दौरान ओमपाल ने राजेंद्र को गोली मार दी थी और कृपाल ने किसी हथियार से राजेंद्र के सर पर हमला किया था। राजेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन विमल वर्मा की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार यादव और दिनेश कुमार कश्यप ने बताया कि अदालत में मुख्य गवाही के रूप में अवधेश कुमार मिश्र और ओम वीर शर्मा ने बयान दिए और घटना के बारे में अदालत को बताया। वादी के अतिरिक्त ये ही दोनों गवाह थे, जिनके सामने आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया था। अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर पांचों आरोपियों जिनमें उमेश सैनी, लाला उर्फ किशन पाल, रिक्की उर्फ शिवकुमार, कृपाल और ओमपाल को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा के साथ प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
शक में की गई थी राजेंद्र उर्फ बब्बन की हत्या
मुरादाबाद। सूर्य नगर निवासी राजेंद्र उर्फ बब्बन की हत्या शक में की गई थी। दोषियों में शामिल ओमपाल को शक था कि राजेंद्र उर्फ बब्बन उसकी बेटी को परेशान करता है। यह शक धीरे धीरे रंजिश में बदलता गया था। 16 जनवरी की देर रात दोषी करार दिए आरोपियों ने मिलकर राजेंद्र उर्फ बब्बन की हत्या को अंजाम दे डाला।
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अदालत ने 36 पेज में सुनाया फैसला
पंद्रह साल चले मुकदमे में बुधवार को अदालत ने अपना 36 पेज का विस्तृत आदेश सुनाया। जिसमें निष्कर्ष के रूप में कहा कि विधि का यह सिद्धांत है कि दंड अपराध के अनुपात में होना चाहिए तथा दंड की अवधि पर न्यायालय को विचार करना चाहिए। जिससे कि न्याय का उद्देश्य पूरा हो सके। किसी भी मामले के संपूर्ण तथ्यों और परिस्थिति पर समग्र रूप से विचार करने के बाद अपराध विरल से विरलतम अपराध की श्रेणी में न आने के कारण दोष सिद्ध आरोपियों को मृत्यु दंड से दंडित नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थित मे दोषियों की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए आजीवन कारावास की सजा उचित है।
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मझोला थाना क्षेत्र के सूर्य नगर निवासी जीवन सिंह ने 17 जनवरी 2009 को मझोला थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। जिसमें उसने बताया कि उसके पड़ोसी कृपाल, उसका भाई ओमपाल से उनका विवाद चल रहा था। 16 जनवरी की शाम करीब सात बजे कृपाल और ओमपाल मेरे बेटे राजेंद्र उर्फ बब्बन को घर से बुला कर ले गए थे। उस समय घर में जीवन के अलावा उसके दो बेटे पप्पू और सुरेंद्र, पत्नी सावित्री देवी और बेटी ममता मौजूद थीं। उन्होंने कृपाल को टोका कि वह उसके बेटे को कहां चले जा रहा है। तब कृपाल ने कहा था कि उसे कुछ बात करनी है। थोड़ी देर में घर भेज देंगे। जब देर रात तक राजेंद्र उर्फ बब्बन घर वापस नहीं आया तो जीवन मोहल्ले के ही अवधेश कुमार मिश्र और ओमवीर शर्मा के साथ राजेंद्र को ढूंढने के लिए गए। तब रेलवे वर्कशाप के पास पीपल के पेड़ के नीचे उसके बेटे राजेंद्र को ओमपाल, कृपाल, रिक्की उर्फ शिवकुमार ओमप्रकाश, लाला उर्फ किशनपाल और उमेश सैनी ने पकड़ रखा था। इसी दौरान ओमपाल ने राजेंद्र को गोली मार दी थी और कृपाल ने किसी हथियार से राजेंद्र के सर पर हमला किया था। राजेंद्र की मौके पर ही मौत हो गई थी। पुलिस ने आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट संख्या तीन विमल वर्मा की अदालत में की गई। सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अशोक कुमार यादव और दिनेश कुमार कश्यप ने बताया कि अदालत में मुख्य गवाही के रूप में अवधेश कुमार मिश्र और ओम वीर शर्मा ने बयान दिए और घटना के बारे में अदालत को बताया। वादी के अतिरिक्त ये ही दोनों गवाह थे, जिनके सामने आरोपियों ने वारदात को अंजाम दिया था। अदालत ने पत्रावली पर मौजूद साक्ष्यों के आधार पर पांचों आरोपियों जिनमें उमेश सैनी, लाला उर्फ किशन पाल, रिक्की उर्फ शिवकुमार, कृपाल और ओमपाल को हत्या का दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा के साथ प्रत्येक पर 25-25 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है।
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शक में की गई थी राजेंद्र उर्फ बब्बन की हत्या
मुरादाबाद। सूर्य नगर निवासी राजेंद्र उर्फ बब्बन की हत्या शक में की गई थी। दोषियों में शामिल ओमपाल को शक था कि राजेंद्र उर्फ बब्बन उसकी बेटी को परेशान करता है। यह शक धीरे धीरे रंजिश में बदलता गया था। 16 जनवरी की देर रात दोषी करार दिए आरोपियों ने मिलकर राजेंद्र उर्फ बब्बन की हत्या को अंजाम दे डाला।
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अदालत ने 36 पेज में सुनाया फैसला
पंद्रह साल चले मुकदमे में बुधवार को अदालत ने अपना 36 पेज का विस्तृत आदेश सुनाया। जिसमें निष्कर्ष के रूप में कहा कि विधि का यह सिद्धांत है कि दंड अपराध के अनुपात में होना चाहिए तथा दंड की अवधि पर न्यायालय को विचार करना चाहिए। जिससे कि न्याय का उद्देश्य पूरा हो सके। किसी भी मामले के संपूर्ण तथ्यों और परिस्थिति पर समग्र रूप से विचार करने के बाद अपराध विरल से विरलतम अपराध की श्रेणी में न आने के कारण दोष सिद्ध आरोपियों को मृत्यु दंड से दंडित नहीं किया जा सकता। ऐसी स्थित मे दोषियों की पारिवारिक और आर्थिक स्थिति को देखते हुए आजीवन कारावास की सजा उचित है।