कोई दीवाना कहता है, कोई पागल समझता है। मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है। प्रख्यात कवि डॉ. कुमार विश्वास ने रेलवे स्टेडियम में सजे मंच से जब अपनी ये सर्वाधिक चर्चित पंक्तियां पढ़ीं तो लोगों ने संग संग गुनगुनाया। कविता की खुमारी इस तरह थी कुमार शांत हो गए और अगली पंक्ति... मैं तुझसे दूर कैसा हूं, तू मुझसे दूर कैसी है। ये तेरा दिल समझता है या मेरा दिल समझता है लोगों ने गाई।
मुरादाबाद में कुमार विश्वास: कोई दीवाना कहता है.. कोई पागल समझता है, समय बीतने के साथ बढ़ती गई तालियां
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डॉ. कुमार विश्वास के अलावा दिनेश बावरा, सोनी मिश्रा, अज्म शाकिरी व रमेश मुस्कान ने कविताएं सुनाईं। मौका था स्कॉलर्स डेन की ओर से आयोजित ऊर्जा सत्र व कवि सम्मेलन का। डॉ. कुमार विश्वास के जन्मदिन का उत्सव भी मंच पर मनाया गया। इसके बाद कवि ने आईआईटी, नीट के लिए तैयारी कर रहे विद्यार्थियों में ऊर्जा सत्र में जोश भरा। कविता की शुरुआत पहले कवि के रूप में मंच पर दिनेश बावरा ने की।
उन्होंने मोबाइल पर कटाक्ष किया। कहा कि सूरज तेजी से ढल रहा है, जमाना रोज बदल रहा है। एक संत ने टीवी पर प्रवचन देते हुए कहा, यदि मोह माया से दूर रहना चाहते हो तो मुझे लाइक करो। साथ में मेरा यूट्यूब चैनल सब्सक्राइब करो। उन्होंने मोबाइल का सीमित प्रयोग करने व अपनों को समय देने की अपील की।
लखनऊ से आईं कवयित्री सोनी मिश्रा ने प्रेम की गजल सुनाई। कहा कि हो सके तो परदेसी लौट कर के घर आना। वास्ता मेरा तुझको भूल तू नहीं जाना। शाम ले के आएगी फिर तुम्हारी यादों को, मैं तुम्हारी शम्मा हूं, तू है मेरा परवाना। मशहूर शायर अज्म शाकिरी ने पढ़ा कि अब न रोएंगे हम खुशी के लिए, गम ही काफी है जिंदगी के लिए। इसके बाद कहा कि लाखों सदमें, ढेरों गम फिर भी नहीं हैं आंखें नम। एक मुद्दत से रोए नहीं, क्या पत्थर के हो गए हम।
हास्य कवि रमेश मुस्कान ने अपनी कविता से सबको खूब गुदगुदाया। उन्होंने सुनाया कि ओ कंप्यूटर युग की छोरी, मन की काली तन की गोरी। किंचित अपनी बाहों का गलहार नहीं दे पाऊंगा। तुम मुझको करना माफ मैं तुमको प्यार नहीं दे पाऊंगा। अंत में डॉ. कुमार विश्वास ने अपनी कविताओं से श्रोताओं को देर तक तालियां बजाने को मजबूर कर दिया।