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Moradabad News: केजीके कॉलेज के प्राचार्य निलंबित, प्रो. विनोद को सौंपी जिम्मेदारी
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मुरादाबाद। केजीके कॉलेज के प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी को प्रबंधक विवेक खन्ना ने निलंबित कर दिया है। इसके बाद प्रो. विनोद पांडेय को प्राचार्य पद की जिम्मेदारी सौंपी है। प्रबंधक का कहना है कि प्राचार्य को चार्जशीट दी गई है। इसका उन्हें सात दिन में जवाब देना है। वहीं, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी ने बताया कि प्राचार्य के निलंबित होने के बाद अब जिनको भी जिम्मेदारी मिली है, यदि उनके हस्ताक्षर से वेतन बिल आएगा तो वह जारी कर दिया जाएगा।
प्रबंधक विवेक खन्ना द्वारा जारी निलंबन आदेश के अनुसार प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी की ओर से प्रशासनिक कदाचार, वित्तीय अनियमितताओं, कर्तव्य की उपेक्षा और वैध निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना करने के कृत्यों के संबंध में गंभीर शिकायतें और महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है। प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि 22 अप्रैल को देय वेतन बिल एक मई तक न तो तैयार किए गए हैं न ही जमा किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को वेतन का वितरण नहीं हो पाया है, जिससे उन्हें गंभीर कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है और संस्थान के कामकाज में बाधा उत्पन्न हुई है। इसके बाद लगा कि प्राचार्य के विरुद्ध एक विभागीय जांच आवश्यक है। इसलिए प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी को विभागीय जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। इस संबंध में प्रो. विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि प्रबंधक ने प्रो. सुनील चौधरी को निलंबित कर मुझे प्राचार्य पद का प्रभारी बनाया है। मैंने अप्रैल माह के वेतन बिलों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, ताकि सभी का समय से वेतन जारी हो सके। हालांकि प्रो. सुनील चौधरी बिना मुझे दायित्व सौंपे कॉलेज से चले गए।
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बिना लिखित अनुमति के नहीं छोड़ेंगे मुख्यालय
निलंबन की अवधि के दौरान प्रो. सुनील चौधरी का मुख्यालय मुरादाबाद ही रहेगा और वह प्रबंधन समिति द्वारा विधिवत नियुक्त प्रबंधक विवेक खन्ना की पूर्व लिखित अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। इसके अलावा पूर्व लिखित अनुमति के बिना कॉलेज परिसर में प्रवेश नहीं करेंगे। संस्था के किसी भी प्रशासनिक या शैक्षणिक कार्य में भाग नहीं लेंगे। स्वयं को प्राचार्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करेंगे और न ही इस पद से जुड़ी किसी भी शक्ति का प्रयोग करेंगे।
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प्रो. विनोद पांडेय को सौंपने होंगे अभिलेख
विवेक खन्ना के अनुसार प्रो. सुनील चौधरी अपने कब्जे में मौजूद सभी आधिकारिक अभिलेखों, फाइलों, दस्तावेजों, परिसंपत्तियों, चाबियों, पासवर्डों और अन्य संस्थागत संपत्तियों का प्रभार प्रबंधन समिति द्वारा अधिकृत अधिकारी प्रोफेसर विनोद पांडे को सौंप दें।
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नई नियुक्ति वाले शिक्षक नहीं हो सके स्थायी
कॉलेज में वर्ष 2020 में करीब 14 शिक्षकों को नियुक्ति मिली थी। प्रबंधक ने दो साल बाद इनको स्थायी कर दिया था, लेकिन पद स्थायी नहीं होने की वजह से इनका स्थायीकरण रद्द करना पड़ा था। शासन द्वारा पद स्थायी करने के बाद वर्ष 2024 में इन शिक्षकों को स्थायी किया जाना था, लेकिन अभी तक यह कार्य नहीं हो पाया है। प्रबंधक विवेक खन्ना का कहना है कि नियुक्त शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जाना है। इसके लिए प्राचार्य को निर्देश दिए गए थे। इस पर प्राचार्य ने सिर्फ एक बार संबंधित संस्थाओं को सत्यापन के संबंध में पत्र लिखा। इसके बाद आगे प्रयास नहीं किए गए। इस वजह से ही यह शिक्षक स्थायी नहीं हो सके हैं। उन्होंने कहा कि प्रो. सुनील चौधरी को दी गई चार्जशीट में इस आरोप को भी शामिल किया गया है।
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26 अप्रैल को की थी अधिकारों में कटौती
कॉलेज में 26 अप्रैल को प्रबंधक विवेक खन्ना ने आयोग से चयनित प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी के अधिकारों में कटौती की थी। इसमें प्रशासनिक फैसले लेने की जिम्मेदारी प्रो. विनोद कुमार पांडेय को दी गई थी, जबकि वित्तीय निर्णय लेने की जिम्मेदारी प्रो. विनोद पांडेय और प्रो. उपदेश चौहान को संयुक्त रूप से दी गई थी। इसके अलावा जिस भी समिति मेें प्रो. सुनील चौधरी थे, उन सब के चार्ज तत्काल प्रभाव से प्रो. विनोद पांडेय को देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन प्रो. सुनील चौधरी ने चार्ज सौंपने से इन्कार कर दिया था। इसके कारण लगभग 78 कर्मचारियों का अप्रैल माह का वेतन फंस गया था। वेतन जारी होने में देरी होने की वजह से शनिवार को प्रबंधक विवेक खन्ना ने प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी को निलंबित कर दिया।
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प्राचार्य पद से दो बार निलंबित हुए थे डॉ. श्यामलाल यादव
केजीके कॉलेज में प्राचार्य को निलंबित करने की प्रक्रिया पहली बार नहीं हुई है। शिक्षकों ने दावा किया कि इससे पहले भी आयोग से चयनित होकर आए प्राचार्य डॉ. श्यामलाल यादव को वर्ष 2005 और वर्ष 2006 में निलंबित किया था। पहले उनको वर्ष 2004 में फोर्स लीव पर भेजा गया था। इसके बाद उनको निलंबित किया गया था।
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प्रो. सुनील चौधरी को निलंबित कर प्राचार्य पद की जिम्मेदारी प्रो. विनोद पांडेय को दी गई है। प्रो. सुनील चौधरी को चार्ज शीट दे दी गई है। उनके कामकाज की जांच होगी। इसमें उनको जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
विवेक खन्ना, प्रबंधक, केजीके कॉलेज
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प्रबंधक द्वारा प्राचार्य के निलंबन के बाद जिस प्रोफेसर को प्राचार्य पद की जिम्मेदारी मिलेगी, यदि उनके हस्ताक्षर से अप्रैल माह के वेतन बिल आएंगे तो सभी का वेतन जारी कर दिया जाएगा।
डॉ. सुधीर कुमार, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी
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प्राचार्य का पक्ष
महाविद्यालय की कालातीत प्रबंध समिति द्वारा शनिवार दोपहर बाद बिना प्रबंध समिति की बैठक, एजेंडा व प्रस्ताव के मेरे निलंबन का आदेश दिया गया है जो पूर्णत: अवैधानिक है। इसी प्रकार की कार्रवाई आयोग द्वारा चयनित पूर्व प्राचार्य डॉ. श्यामलाल यादव के खिलाफ पांच फरवरी 2005 को हुई थी। उन्हें जून 2006 में पुन: निलंबित किया गया था। 2020 में विज्ञापन 47 के 14 शिक्षकों की नियुक्ति की थी। प्रबंध समिति ने इन शिक्षकाें में शामिल दो शिक्षकों का पुराने नियम से बिना प्रमाण पत्र सत्यापन के स्थायीकरण करके स्थानांतरण कर दिया है। शिक्षक संघ ने शिक्षकों के स्थायीकरण के लिए दस सितंबर 2025 को धरना देने के लिए ज्ञापन दिया था। प्रबंधक ने नौ सितंबर 2025 को सभी संबंधित शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद ही उनकी पत्रावली प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा जब मैंने पत्रावली पुन: 20 अप्रैल 2026 को प्रेषित की तो प्रबंधक ने लिखा कि यह पत्रावली प्रो. विनोद कुमार पांडेय के हस्ताक्षर से क्यों नहीं भेजी। जबकि अधिकारों का हस्तांतरण करने के निर्देश 26 अप्रैल को जारी हुए हैं। उससे पहले ही प्रो. विनोद कुमार पांडेय के हस्ताक्षर करवाने को लिख दिया। यहां तक कि मेरा भी स्थायीकरण प्रबंध समिति द्वारा नहीं किया गया है।
प्रो. सुनील चौधरी, प्राचार्य, केजीके कॉलेज
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प्रबंधक विवेक खन्ना द्वारा जारी निलंबन आदेश के अनुसार प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी की ओर से प्रशासनिक कदाचार, वित्तीय अनियमितताओं, कर्तव्य की उपेक्षा और वैध निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना करने के कृत्यों के संबंध में गंभीर शिकायतें और महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त हुई है। प्रथम दृष्टया यह पाया गया है कि 22 अप्रैल को देय वेतन बिल एक मई तक न तो तैयार किए गए हैं न ही जमा किए गए हैं। इसके परिणामस्वरूप शिक्षण और गैर-शिक्षण कर्मचारियों को वेतन का वितरण नहीं हो पाया है, जिससे उन्हें गंभीर कठिनाई का सामना करना पड़ रहा है और संस्थान के कामकाज में बाधा उत्पन्न हुई है। इसके बाद लगा कि प्राचार्य के विरुद्ध एक विभागीय जांच आवश्यक है। इसलिए प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी को विभागीय जांच पूरी होने तक तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाता है। इस संबंध में प्रो. विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि प्रबंधक ने प्रो. सुनील चौधरी को निलंबित कर मुझे प्राचार्य पद का प्रभारी बनाया है। मैंने अप्रैल माह के वेतन बिलों पर हस्ताक्षर कर दिए हैं, ताकि सभी का समय से वेतन जारी हो सके। हालांकि प्रो. सुनील चौधरी बिना मुझे दायित्व सौंपे कॉलेज से चले गए।
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बिना लिखित अनुमति के नहीं छोड़ेंगे मुख्यालय
निलंबन की अवधि के दौरान प्रो. सुनील चौधरी का मुख्यालय मुरादाबाद ही रहेगा और वह प्रबंधन समिति द्वारा विधिवत नियुक्त प्रबंधक विवेक खन्ना की पूर्व लिखित अनुमति के बिना मुख्यालय नहीं छोड़ेंगे। इसके अलावा पूर्व लिखित अनुमति के बिना कॉलेज परिसर में प्रवेश नहीं करेंगे। संस्था के किसी भी प्रशासनिक या शैक्षणिक कार्य में भाग नहीं लेंगे। स्वयं को प्राचार्य के रूप में प्रस्तुत नहीं करेंगे और न ही इस पद से जुड़ी किसी भी शक्ति का प्रयोग करेंगे।
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प्रो. विनोद पांडेय को सौंपने होंगे अभिलेख
विवेक खन्ना के अनुसार प्रो. सुनील चौधरी अपने कब्जे में मौजूद सभी आधिकारिक अभिलेखों, फाइलों, दस्तावेजों, परिसंपत्तियों, चाबियों, पासवर्डों और अन्य संस्थागत संपत्तियों का प्रभार प्रबंधन समिति द्वारा अधिकृत अधिकारी प्रोफेसर विनोद पांडे को सौंप दें।
नई नियुक्ति वाले शिक्षक नहीं हो सके स्थायी
कॉलेज में वर्ष 2020 में करीब 14 शिक्षकों को नियुक्ति मिली थी। प्रबंधक ने दो साल बाद इनको स्थायी कर दिया था, लेकिन पद स्थायी नहीं होने की वजह से इनका स्थायीकरण रद्द करना पड़ा था। शासन द्वारा पद स्थायी करने के बाद वर्ष 2024 में इन शिक्षकों को स्थायी किया जाना था, लेकिन अभी तक यह कार्य नहीं हो पाया है। प्रबंधक विवेक खन्ना का कहना है कि नियुक्त शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों का सत्यापन किया जाना है। इसके लिए प्राचार्य को निर्देश दिए गए थे। इस पर प्राचार्य ने सिर्फ एक बार संबंधित संस्थाओं को सत्यापन के संबंध में पत्र लिखा। इसके बाद आगे प्रयास नहीं किए गए। इस वजह से ही यह शिक्षक स्थायी नहीं हो सके हैं। उन्होंने कहा कि प्रो. सुनील चौधरी को दी गई चार्जशीट में इस आरोप को भी शामिल किया गया है।
26 अप्रैल को की थी अधिकारों में कटौती
कॉलेज में 26 अप्रैल को प्रबंधक विवेक खन्ना ने आयोग से चयनित प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी के अधिकारों में कटौती की थी। इसमें प्रशासनिक फैसले लेने की जिम्मेदारी प्रो. विनोद कुमार पांडेय को दी गई थी, जबकि वित्तीय निर्णय लेने की जिम्मेदारी प्रो. विनोद पांडेय और प्रो. उपदेश चौहान को संयुक्त रूप से दी गई थी। इसके अलावा जिस भी समिति मेें प्रो. सुनील चौधरी थे, उन सब के चार्ज तत्काल प्रभाव से प्रो. विनोद पांडेय को देने के निर्देश दिए गए थे। लेकिन प्रो. सुनील चौधरी ने चार्ज सौंपने से इन्कार कर दिया था। इसके कारण लगभग 78 कर्मचारियों का अप्रैल माह का वेतन फंस गया था। वेतन जारी होने में देरी होने की वजह से शनिवार को प्रबंधक विवेक खन्ना ने प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी को निलंबित कर दिया।
प्राचार्य पद से दो बार निलंबित हुए थे डॉ. श्यामलाल यादव
केजीके कॉलेज में प्राचार्य को निलंबित करने की प्रक्रिया पहली बार नहीं हुई है। शिक्षकों ने दावा किया कि इससे पहले भी आयोग से चयनित होकर आए प्राचार्य डॉ. श्यामलाल यादव को वर्ष 2005 और वर्ष 2006 में निलंबित किया था। पहले उनको वर्ष 2004 में फोर्स लीव पर भेजा गया था। इसके बाद उनको निलंबित किया गया था।
प्रो. सुनील चौधरी को निलंबित कर प्राचार्य पद की जिम्मेदारी प्रो. विनोद पांडेय को दी गई है। प्रो. सुनील चौधरी को चार्ज शीट दे दी गई है। उनके कामकाज की जांच होगी। इसमें उनको जवाब देने के लिए सात दिन का समय दिया गया है।
विवेक खन्ना, प्रबंधक, केजीके कॉलेज
प्रबंधक द्वारा प्राचार्य के निलंबन के बाद जिस प्रोफेसर को प्राचार्य पद की जिम्मेदारी मिलेगी, यदि उनके हस्ताक्षर से अप्रैल माह के वेतन बिल आएंगे तो सभी का वेतन जारी कर दिया जाएगा।
डॉ. सुधीर कुमार, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी
प्राचार्य का पक्ष
महाविद्यालय की कालातीत प्रबंध समिति द्वारा शनिवार दोपहर बाद बिना प्रबंध समिति की बैठक, एजेंडा व प्रस्ताव के मेरे निलंबन का आदेश दिया गया है जो पूर्णत: अवैधानिक है। इसी प्रकार की कार्रवाई आयोग द्वारा चयनित पूर्व प्राचार्य डॉ. श्यामलाल यादव के खिलाफ पांच फरवरी 2005 को हुई थी। उन्हें जून 2006 में पुन: निलंबित किया गया था। 2020 में विज्ञापन 47 के 14 शिक्षकों की नियुक्ति की थी। प्रबंध समिति ने इन शिक्षकाें में शामिल दो शिक्षकों का पुराने नियम से बिना प्रमाण पत्र सत्यापन के स्थायीकरण करके स्थानांतरण कर दिया है। शिक्षक संघ ने शिक्षकों के स्थायीकरण के लिए दस सितंबर 2025 को धरना देने के लिए ज्ञापन दिया था। प्रबंधक ने नौ सितंबर 2025 को सभी संबंधित शिक्षकों के शैक्षिक प्रमाण पत्रों के सत्यापन के बाद ही उनकी पत्रावली प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था। इसके अलावा जब मैंने पत्रावली पुन: 20 अप्रैल 2026 को प्रेषित की तो प्रबंधक ने लिखा कि यह पत्रावली प्रो. विनोद कुमार पांडेय के हस्ताक्षर से क्यों नहीं भेजी। जबकि अधिकारों का हस्तांतरण करने के निर्देश 26 अप्रैल को जारी हुए हैं। उससे पहले ही प्रो. विनोद कुमार पांडेय के हस्ताक्षर करवाने को लिख दिया। यहां तक कि मेरा भी स्थायीकरण प्रबंध समिति द्वारा नहीं किया गया है।
प्रो. सुनील चौधरी, प्राचार्य, केजीके कॉलेज