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Moradabad News: कांठ विधायक कमाल बोले अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने वाला है बजट
Sat, 21 Feb 2026 01:11 AM IST
मुरादाबाद ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
संवाद न्यूज एजेंसी, मुरादाबाद
Updated Sat, 21 Feb 2026 01:11 AM IST
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कांठ। शुक्रवार को विधानसभा सत्र के दौरान सपा विधायक व पूर्व कैबिनेट मंत्री कमाल अख्तर ने प्रस्तुत बजट पर बोलते हुए इसे अपेक्षाओं पर खरा नहीं उतरने वाला बजट बताया। उन्होंने कहा कि यह केवल घोषणाओं और आंकड़ों तक सीमित रह जाएगा।
विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष बोलते हुए कहा कि प्रदेश की जनता बड़ी उम्मीदों के साथ इस बजट को देख रही थी। इसमें कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और महंगाई जैसी मूलभूत समस्याओं के समाधान की उम्मीद थी लेकिन बजट में इन मुद्दों पर ठोस और जमीनी प्रावधान दिखाई नहीं देते। कहा कि पिछले वर्ष लगभग आठ लाख करोड़ रुपये के बजट में से केवल लगभग तीन लाख करोड़ रुपये ही व्यय किए गए, शेष राशि खर्च न हो पाना दर्शाता है कि न तो स्पष्ट कार्ययोजनाएं है और न ही क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि स्वीकृत धनराशि जनता के कल्याण पर खर्च ही नहीं हो पा रही तो बजट का आकार बढ़ाने का औचित्य क्या है। उन्होंने लगातार बढ़ रही महंगाई के मुद्दे को गंभीर बताया। वहीं कहा कि पशुपालन और गोसंरक्षण के लिए भी बजट में पर्याप्त और स्पष्ट प्रावधान नहीं किए गए हैं। गोशालाओं के संचालन का भार स्थानीय निकायों पर डाल दिया गया है।
उन्होंने कहा कि बड़े जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज की कमी है और निजी संस्थानों के साथ समझौते के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का मॉडल आम जनता के लिए महंगा साबित हो रहा है। वहीं कहा कि लोक निर्माण विभाग और अन्य विकास कार्यों में भी बजट का समुचित उपयोग न होना विकास की गति धीमा कर रहा है। पंचायत राज व्यवस्था पर अपनी बात को मजबूत ढंग से सदन में रखा।
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विधायक ने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष बोलते हुए कहा कि प्रदेश की जनता बड़ी उम्मीदों के साथ इस बजट को देख रही थी। इसमें कृषि, शिक्षा, स्वास्थ्य, बेरोजगारी और महंगाई जैसी मूलभूत समस्याओं के समाधान की उम्मीद थी लेकिन बजट में इन मुद्दों पर ठोस और जमीनी प्रावधान दिखाई नहीं देते। कहा कि पिछले वर्ष लगभग आठ लाख करोड़ रुपये के बजट में से केवल लगभग तीन लाख करोड़ रुपये ही व्यय किए गए, शेष राशि खर्च न हो पाना दर्शाता है कि न तो स्पष्ट कार्ययोजनाएं है और न ही क्रियान्वयन की इच्छाशक्ति। उन्होंने प्रश्न उठाया कि यदि स्वीकृत धनराशि जनता के कल्याण पर खर्च ही नहीं हो पा रही तो बजट का आकार बढ़ाने का औचित्य क्या है। उन्होंने लगातार बढ़ रही महंगाई के मुद्दे को गंभीर बताया। वहीं कहा कि पशुपालन और गोसंरक्षण के लिए भी बजट में पर्याप्त और स्पष्ट प्रावधान नहीं किए गए हैं। गोशालाओं के संचालन का भार स्थानीय निकायों पर डाल दिया गया है।
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उन्होंने कहा कि बड़े जिलों में सरकारी मेडिकल कॉलेज की कमी है और निजी संस्थानों के साथ समझौते के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराने का मॉडल आम जनता के लिए महंगा साबित हो रहा है। वहीं कहा कि लोक निर्माण विभाग और अन्य विकास कार्यों में भी बजट का समुचित उपयोग न होना विकास की गति धीमा कर रहा है। पंचायत राज व्यवस्था पर अपनी बात को मजबूत ढंग से सदन में रखा।
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