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Moradabad News: वसीयत में जूना अखाड़ा को काली माता मंदिर पर नियंत्रण का दिया था अधिकार

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sun, 19 Apr 2026 02:55 AM IST
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In the will, Juna Akhara was given the right to control the Kali Mata Temple.
मुराबाद। करीब 43 साल श्री काली माता मंदिर लालबाग के महंत रहे कृष्णानंद गिरि महाराज ने 23 साल पहले ही अपने वसीयतनामा में शर्ताें के साथ जूना अखाड़ा 13 मढ़ी को मंदिर पर नियंत्रण करने का अधिकार दे दिया था। उन्होंने यह वसीयत 2003 में बनवाई थी। मंदिर से महंत सज्जन गिरि और महंत राम गिरि को हटाए जाने के बाद यह वसीयतनामा चर्चाओं में है।
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श्री काली माता जी मंदिर का इतिहास लगभग 400 वर्ष पुराना है। चमत्कारी साधु बाबा श्री मिश्री गिरि द्वारा टीले पर इस मंदिर की स्थापना की गई थी। तभी से इसका नाम श्री मिश्री गिरि जी का टीला भी पड़ा था। वर्ष 1960 से 2003 तक कृष्णानंद गिरि महाराज यहां के महंत रहे। जो यहां सबसे अधिक समय तक महंत रहे हैं।
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उन्होेंने मंदिर के विकास और व्यवस्थाओं में सुधार के लिए काफी काम किए। उनकी समाधि मंदिर में मुख्य रूप से स्थापित की गई है। महंत कृष्णानंद गिरि साधु संतों की परंपरा और अखाड़े की मर्यादा से भली भांति परिचित थे और भविष्य में मंदिर की व्यवस्थाओं को लेकर चिंतित रहते थे। इसलिए उन्होंने मृत्यु से कुछ समय पहले एक रजिस्टर्ड वसीयतनामा बनाकर मंदिर की व्यवस्था सुनिश्चित कर दी थी। वर्ष 2003 में बनवाई वसीयतनामा में उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा था कि किसी भी महंत और उनके किसी भी शिष्य द्वारा अखाड़े की परंपरा और मर्यादा के विपरीत कार्य किया जाता है तो जूना अखाड़ा 13 मढ़ी को यह अधिकार है कि वह मंदिर को अपने नियंत्रण में ले सकता है।
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इसी वसीयतनामा का हवाला देकर श्री पंच दशनाम जूना अखाड़े की ओर से कार्रवाई करते हुए नाै अप्रैल को श्री काली माता मंदिर लालबाग के महंत सज्जन गिरि और प्राचीन सिद्धपीठ श्री नाै देवी काली माता मंदिर के महंत राम गिरि को खराब आचरण के कारण पद से हटा दिया गया। इसके बाद से मंदिर और वहां की व्यवस्था चर्चा में बनी हुई है।

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वसीयतनामा का बिंदु सात

- मेरे शिष्य देवदत्त गिरि या अन्य किसी भी शिष्य द्वारा मेरे नाम, संपत्ति, किसी भी स्थान, अखाड़े या अन्य किसी भी वस्तु का दुरुपयोग कभी भी किया जाता है या भविष्य में कभी भी किया गया तब ऐसी स्थिति में श्री पंचदश नाम जूना अखाड़ा 13 मढ़ी को यह पूर्ण अधिकार होगा कि वह संबंधित मेरे शिष्य या व्यक्ति को तत्काल प्रभाव से कार्य मुक्त कर व निलंबित कर समस्त अधिकार व कार्याें का संचालन अपने हाथ में ले ले और अपने विवेकानुसार उचित कार्य करें। इस संबंध में मेरे द्वारा अखाड़े को यह पूर्ण अधिकार दिए जा रहे हैं।

वसीयतनामा का बिंदु 13

- उनके सभी प्रकार की चल व अचन संपत्ति, नाम व प्रतिष्ठा आदि का हमेशा सदुपयोग किया जाना हमारे सभी शिष्यों व उत्तराधिकारी का परम कर्त्तव्य है। यदि कोई भी कभी भी इन समस्त संपत्ति का किसी भी प्रकार का दुरुपयोप करता है या एक दूसरे के कार्याें में हस्तक्षेप करता है तो अपनी कार्यकारी संस्था श्री पंचदश नाम जूना अखाड़ा 13 मढ़ी को यह पूर्ण अधिकार प्रधान करता हूं कि वह हमारी सभी प्रकार की संपत्ति व स्थान पर अधिकार प्राप्त करके, दोषी व्यक्ति को हटाकर उसका संचाल अपने में ले ले। इस पर हमारे किसी भी शिष्य को कोई विरोध स्वीकार न किया जाए।

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- जूना अखड़ा की परंपरा और मर्यादा के विपरीत कार्य करने पर ही दोनों महंत को यहां से हटाकर प्रयागराज भेजा गया था। वसीयतनामा में महंत कृष्णानंद गिरि महाराज ने जूना अखाड़े को अधिकार दिया था, उसी के आधार पर कार्रवाई की गई है। - महंत नारायण गिरि, प्रवक्ता, जूना अखाड़ा


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वसीयत नामा में 14 बिंदुओं का जिक्र

मुरादाबाद। महंत कृष्णानंद गिरि महाराज के वसीयत नामा में अलग-अलग 14 बिंदुओं का जिक्र किया गया था। उन्होंने वसीयत नामा में अपने चल अचल संपत्ति, अपने तीन शिष्यों, उनके आचरण समेत अन्य का जिक्र किया है।
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