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ग्राम पंचायत दौलरा में प्रशासक ने गलत ढंग से निकाले थे 3.46 लाख
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मुरादाबाद। विकास खंड मूंढापांडे की ग्राम पंचायत दौलरा में प्रशासकों का कार्यकाल खतम हो जाने के बाद भी विभिन्न विकास कार्यों के नाम पर 3.46 लाख रुपये निकाले जाने का मामला जांच में सही पाया गया है। जिसे गंभीरता से लेते हुए डीपीआरओ ने पंचायत सचिव दयाराम और तत्कालीन प्रशासक चंद्रपाल सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अमर उजाला में प्रकाशित इस खबर के बाद जांच शुरू होने से महकमे में हड़कंप है।
पंचायतराज विभाग में पूर्व डीपीआरओ की तैनाती के समय विकास कार्यों के नाम पर जमकर अनियमितता बरती गई। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद एडीओ पंचायत प्रशासक के रूप में कार्य करते रहे। इस दौैरान प्रशासकों ने आचार संहिता लागू होने के बावजूद विकास कार्य के नाम पर आनन-फानन जम कर धन निकाला था। यही नहीं प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी प्रशासक नियम विरुद्ध तरीके से धन निकालने में पीछे नहीं रहे थे। मूंढापांडे विकास खंड की ग्राम पंचायत दौलरा में भी ऐसा ही हुआ। वहां नवनिर्वाचित प्रधान की अगुवाई में 26 मई को शपथग्रहण हो जाने 27 मई को समितियों के गठन के साथ ही प्रशासकों का कार्यकाल पूरी तरह समाप्त हो गया था। लेकिन इसके बाद भी आठ जून को एडीओ पंचायत और ग्राम पंचायत सचिव ने बतौर प्रशासक की हैसियत से 3,46,875 रुपये वॉल पेंटिंग, सैनिटाइजर छिड़काव, फागिंग मशीन, सैनिटाइजर, सोलर लाइट और पंचायत भवन निर्माण के नाम पर निकाल लिये थे। अमर उजाला ने इस मामले को अपने छह अगस्तके अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसका संज्ञान लेते हुए डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने मामले की जांच की तो अमर उजाला की खबर पूरी तरह सत्य पाई गई। डीपीआरओ ने इसे गंभीरता से लेते हुए ग्राम पंचायत दौलरा के पंचायत सचिव दयाराम तथा तत्कालीन प्रशासक चंद्रपाल सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इससे महकमे में हड़कंप है।
ग्राम पंचायत दौलरा में प्रशासक द्वारा कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद भी 3,46,875 रुपये निकालने का मामला अमर उजाला में प्रकाशित हुआ था। जिसका संज्ञान लेते हुए मामले की जांच की गई तो शिकायत सही पाई गई। आरोपी पंचायत सचिव व तत्कालीन प्रशासक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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आलोक प्रियदर्शी, डीपीआरओ
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पंचायतराज विभाग में पूर्व डीपीआरओ की तैनाती के समय विकास कार्यों के नाम पर जमकर अनियमितता बरती गई। प्रधानों का कार्यकाल खत्म होने के बाद एडीओ पंचायत प्रशासक के रूप में कार्य करते रहे। इस दौैरान प्रशासकों ने आचार संहिता लागू होने के बावजूद विकास कार्य के नाम पर आनन-फानन जम कर धन निकाला था। यही नहीं प्रशासकों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद भी प्रशासक नियम विरुद्ध तरीके से धन निकालने में पीछे नहीं रहे थे। मूंढापांडे विकास खंड की ग्राम पंचायत दौलरा में भी ऐसा ही हुआ। वहां नवनिर्वाचित प्रधान की अगुवाई में 26 मई को शपथग्रहण हो जाने 27 मई को समितियों के गठन के साथ ही प्रशासकों का कार्यकाल पूरी तरह समाप्त हो गया था। लेकिन इसके बाद भी आठ जून को एडीओ पंचायत और ग्राम पंचायत सचिव ने बतौर प्रशासक की हैसियत से 3,46,875 रुपये वॉल पेंटिंग, सैनिटाइजर छिड़काव, फागिंग मशीन, सैनिटाइजर, सोलर लाइट और पंचायत भवन निर्माण के नाम पर निकाल लिये थे। अमर उजाला ने इस मामले को अपने छह अगस्तके अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। जिसका संज्ञान लेते हुए डीपीआरओ आलोक प्रियदर्शी ने मामले की जांच की तो अमर उजाला की खबर पूरी तरह सत्य पाई गई। डीपीआरओ ने इसे गंभीरता से लेते हुए ग्राम पंचायत दौलरा के पंचायत सचिव दयाराम तथा तत्कालीन प्रशासक चंद्रपाल सिंह को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। इससे महकमे में हड़कंप है।
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ग्राम पंचायत दौलरा में प्रशासक द्वारा कार्यकाल खत्म हो जाने के बाद भी 3,46,875 रुपये निकालने का मामला अमर उजाला में प्रकाशित हुआ था। जिसका संज्ञान लेते हुए मामले की जांच की गई तो शिकायत सही पाई गई। आरोपी पंचायत सचिव व तत्कालीन प्रशासक को नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण तलब किया गया है। स्पष्टीकरण असंतोषजनक पाया गया तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी।
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आलोक प्रियदर्शी, डीपीआरओ