फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Moradabad News ›   Hurdles in treatment... Medicines must be paid for in cash despite having an Ayushman card; no bills provided

Moradabad News: इलाज में खेल... आयुष्मान कार्ड के बावजूद दवाएं नकद, नहीं मिल रहा बिल

Moradabad  Bureau मुरादाबाद ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 02:57 AM IST
विज्ञापन
Hurdles in treatment... Medicines must be paid for in cash despite having an Ayushman card; no bills provided
मुरादाबाद। आयुष्मान कार्ड से मुफ्त इलाज की उम्मीद लेकर निजी अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों के तीमारदारों को दवाओं के लिए जेब ढीली करनी पड़ रही है। अस्पताल में भर्ती मरीज का इलाज आयुष्मान योजना के तहत चल रहा है, लेकिन दवाएं खरीदने के लिए उन्हें मेडिकल स्टोर भेजा जा रहा है। आरोप है कि कुछ अस्पतालों में डॉक्टर दवाओं की पर्ची तक नहीं देते। तीमारदारों से कहा जाता है कि दवाओं की लिस्ट मेडिकल स्टोर पर पहुंचा दी गई है, वहीं से दवा ले आएं।
विज्ञापन


दवाओं के नाम पर रुपये लेने के बाद बिल भी नहीं दिया जाता। निजी अस्पतालों से इस तरह की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं। आयुष्मान कार्ड धारकों को इलाज के दौरान दवाओं के लिए अलग से भुगतान क्यों करना पड़ रहा है, यह सवाल मरीजों के तीमारदार उठा रहे हैं। उनका कहना है कि अस्पताल में भर्ती होने के बाद डॉक्टर के बताए मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदने के अलावा कोई विकल्प नहीं दिया जाता। दवाओं की पर्ची न मिलने से यह पता करना भी मुश्किल हो जाता है कि कौन सी दवा कितने रुपये की खरीदी गई। बिल नहीं मिलने पर खर्च का हिसाब और भुगतान का प्रमाण भी तीमारदारों के पास नहीं रहता।
विज्ञापन




केस-1 : कार्ड से इलाज, दवाओं का खर्च अलग
रामेश्वर कॉलोनी निवासी प्रवीण राघव के मुताबिक उनके पिता का इलाज कांठ रोड स्थित एक अस्पताल में आयुष्मान कार्ड से हुआ। पिता आईसीयू में भर्ती रहे लेकिन दवाएं उन्हें मेडिकल स्टोर से नकद खरीदनी पड़ीं। परिजनों के मुताबिक, इलाज के दौरान दवाओं के लिए रुपये देने पड़े। उनका सवाल था कि जब मरीज का इलाज योजना के तहत हो रहा है तो दवाओं के खर्च का भुगतान अलग से क्यों करना पड़ रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन


केस-2 : डॉक्टर की सूची, मेडिकल स्टोर से खरीदारी
महलकपुर निजामपुर निवासी महेंद्र सिंह की मां का इलाज कांठ रोड स्थित निजी अस्पताल में हुआ। आरोप है कि इलाज कर रहे डॉक्टर ने दवाओं की सूची मेडिकल स्टोर पर भेजी और कहा कि दवाएं ले आओ। मरीज के तीमारदारों को दवा का कोई बिल या सूची तक नहीं दी गई। ऐसे में दवाओं के नाम, उनकी मात्रा और कीमत का मिलान करना मुश्किल हो गया। हालांकि हालत गंभीर होने के कारण मरीज की मौत हो गई।


केस-3 : रुपये दिए, लेकिन बिल नहीं मिल
असालतपुरा निवासी वसीम खान का आरोप है कि आयुष्मान कार्ड धारक के परिजनों को दवाओं के लिए नकद रुपये देने के बावजूद बिल नहीं मिला। परिजनों के सामने समस्या यह रही कि खर्च का लिखित प्रमाण न होने से वे भुगतान का ब्योरा दर्ज नहीं करा सके। उनका आरोप है कि अस्पताल में इलाज के दौरान दवाओं के लिए भुगतान करना पड़ा, जबकि मरीज आयुष्मान योजना का लाभार्थी था।


वर्जन
आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जनआरोग्य योजना के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में स्वीकृत पैकेज के अंतर्गत शामिल इलाज और सेवाओं के लिए लाभार्थी से अतिरिक्त रकम नहीं ली जा सकती। रैंडम चेकिंग के लिए टीम भी बनाई गई है। जो शिकायतें हमारे पास आती हैं, हम जांच कर निस्तारण कराते हैं।
- डॉ. आरके शर्मा, नोडल अधिकारी, आयुष्मान भारत
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed